UP Politics: ₹7 लाख में BJP युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष की कुर्सी का सौदा? कानपुर में वायरल चैट से विवाद, भाजपा नेता बोले—'सब फर्जी है'
कानपुर में भाजयुमो उत्तर जिलाध्यक्ष पद के लिए सात लाख रुपये की कथित डील वाली व्हाट्सऐप चैट वायरल हुई है। भाजपा जिलाध्यक्ष अनिल दीक्षित और उपाध्यक्ष अंशु ठाकुर ने इसे फर्जी बताया है। पार्टी ने जांच की बात कही है।
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Kanpur BJP News: भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष पद के लिए ₹7 लाख की कथित डील वाली चैट सोशल मीडिया पर वायरल है। भाजपा नेता अनिल दीक्षित ने आरोपों को खारिज किया है, जबकि अंशु ठाकुर ने पुलिस से शिकायत करने की बात कही है।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | कानपुर, उत्तर प्रदेश | 31 अक्टूबर 2026
खबर में खास
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कानपुर में भाजपा युवा मोर्चा के उत्तर जिलाध्यक्ष पद को लेकर ₹7 लाख की कथित डील का व्हाट्सऐप चैट वायरल।
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वायरल संदेशों में भाजपा के उत्तर जिलाध्यक्ष अनिल दीक्षित का नाम लिया गया है।
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अनिल दीक्षित ने किसी भी पद के लिए पैसा लेने या माँगने से इनकार किया।
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भाजपा जिला उपाध्यक्ष अंशु ठाकुर ने चैट और वीडियो को फर्जी बताया।
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अंशु ठाकुर ने 31 अक्टूबर को पुलिस आयुक्त से शिकायत करने की बात कही।
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भाजपा के जिला पदाधिकारियों ने वायरल चैट की सच्चाई की जाँच कराने की बात कही।
कानपुर। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भारतीय जनता पार्टी के कानपुर संगठन में पदाधिकारियों की नियुक्ति को लेकर नया विवाद सामने आया है। भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के कानपुर उत्तर जिलाध्यक्ष पद के लिए सात लाख रुपये की कथित डील का दावा करने वाली व्हाट्सऐप चैट सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।
वायरल संदेशों में भाजपा के उत्तर जिलाध्यक्ष अनिल दीक्षित का नाम आने के बाद पार्टी के भीतर चर्चा शुरू हो गई। हालांकि दीक्षित ने आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए चैट को फर्जी बताया है।
भाजपा जिला उपाध्यक्ष अंशु ठाकुर ने भी वायरल संदेशों और वीडियो को गलत बताया है। दोनों पक्षों की प्रतिक्रिया सामने आने के बावजूद चैट की प्रामाणिकता स्वतंत्र रूप से साबित नहीं हुई है।
वायरल चैट में सात लाख रुपये की क्या बात लिखी है?
सोशल मीडिया पर प्रसारित कथित व्हाट्सऐप बातचीत में भारतीय जनता युवा मोर्चा के कानपुर उत्तर जिलाध्यक्ष पद को लेकर पैसों के लेनदेन की चर्चा दिखाई गई है।
एक संदेश में पद के लिए 10 से 15 लाख रुपये तक खर्च होने की बात है। इसके जवाब में सात लाख रुपये में बातचीत तय होने और नई सूची आने का इंतजार करने का दावा किया गया है।
वायरल चैट में संगठन के एक वरिष्ठ जिला पदाधिकारी पर पैसे लेकर नियुक्ति कराने का आरोप भी है।
लेकिन यह केवल वायरल चैट में किया गया दावा है। न तो सात लाख रुपये का भुगतान प्रमाणित हुआ है और न ही किसी पद के बदले पैसे लेने की पुष्टि हुई है।
अनिल दीक्षित ने क्या सफाई दी?
भाजपा कानपुर उत्तर के जिलाध्यक्ष अनिल दीक्षित ने आरोपों को खारिज किया है।
अमर उजाला के मुताबिक, दीक्षित ने कहा कि उन्होंने अंशु ठाकुर या किसी अन्य व्यक्ति से संगठन में पद देने के बदले न तो पैसे माँगे और न ही कोई रकम ली।
दीक्षित ने वायरल चैट और उससे संबंधित वीडियो को फर्जी बताते हुए कहा कि यह उनकी तथा संगठन की छवि खराब करने की कोशिश है।
लाइव हिन्दुस्तान की रिपोर्ट में भी उनके हवाले से वायरल सामग्री को विरोधियों की साजिश बताया गया है।
अंशु ठाकुर ने कहा—पुलिस आयुक्त से करेंगे शिकायत
मामले में भाजपा के उत्तर जिला उपाध्यक्ष अंशु ठाकुर का नाम भी सामने आया है।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित चैट और वीडियो असली नहीं हैं। उनके मुताबिक, किसी ने गलत सामग्री तैयार करके भाजपा नेताओं को बदनाम करने की कोशिश की है।
अंशु ठाकुर ने 31 अक्टूबर को कानपुर पुलिस आयुक्त से मिलकर प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग करने की बात कही है।
हालांकि, शनिवार सुबह तक उपलब्ध रिपोर्टों में उनके द्वारा वास्तव में शिकायत सौंप दिए जाने या FIR दर्ज होने की पुष्टि नहीं मिली है।
भाजपा संगठन ने जांच की बात कही
भाजपा उत्तर जिले के महामंत्री अवधेश सोनकर ने वायरल चैट की जानकारी मिलने की पुष्टि करते हुए इसकी सच्चाई का पता लगाने की बात कही।
जिला मीडिया प्रभारी अनुराग शर्मा ने इसे संगठन की छवि धूमिल करने के लिए बनाई गई कथित कूटरचित सामग्री बताया।
उन्होंने कहा कि मामले की जाँच कराई जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
फिलहाल किसी व्यक्ति के खिलाफ दोषसिद्धि, आधिकारिक जांच रिपोर्ट या पुलिस के अंतिम निष्कर्ष की जानकारी उपलब्ध नहीं है
आईटी सेल की नियुक्तियों पर भी पहले से विवाद
भाजपा के कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र में संगठनात्मक नियुक्तियों से जुड़ा यह पहला विवाद नहीं है।
इससे पहले क्षेत्रीय आईटी सेल के संयोजक और सह-संयोजक की नियुक्ति को लेकर भी अलग-अलग पत्र सामने आने की खबर आई थी।
कुछ कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि प्रदेश स्तर से तय नामों में क्षेत्रीय स्तर पर बदलाव किया गया।
हालांकि क्षेत्रीय अध्यक्ष रामकिशोर साहू ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा था कि उन्होंने किसी नियुक्ति सूची में बदलाव नहीं किया।
इन दोनों घटनाओं के बीच किसी आपसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।
अब किन सवालों के जवाब जरूरी हैं?
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न वायरल सामग्री की प्रामाणिकता का है।
क्या संबंधित चैट वास्तव में उन लोगों के बीच हुई जिनके नाम इससे जोड़े जा रहे हैं? क्या इसके मूल डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध हैं? और यदि चैट फर्जी है, तो उसे तैयार करके प्रसारित किसने किया?
इन प्रश्नों का उत्तर आधिकारिक जाँच से ही मिल सकता है।
भारतीय जनता पार्टी की जिला इकाई ने आरोपों का खंडन किया है। फिलहाल किसी पद के बदले सात लाख रुपये लेने का तथ्य प्रमाणित नहीं हुआ है।
प्रत्यक्षदर्शी का सवाल: राजनीतिक संगठनों में नियुक्तियों से जुड़ी ऐसी वायरल सामग्री सामने आने पर क्या पार्टी को निष्पक्ष जाँच के निष्कर्ष सार्वजनिक करने चाहिए?
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