UP Election 2027: पीलीभीत में EPIC नंबर वही, 13,150 वोटरों के नाम बदले? कांग्रेस ने 16,554 प्रविष्टियों पर उठाए सवाल

यूपी चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस ने पीलीभीत सदर की वोटर लिस्ट में 16,554 प्रविष्टियों पर सवाल उठाए हैं। दावा है कि 13,150 मतदाताओं के EPIC नंबर वही रहे, लेकिन नाम बदल गए। चुनाव आयोग से जांच की मांग की गई है।

यूपी कांग्रेस ने पीलीभीत सदर की मतदाता सूची में 16,554 प्रविष्टियों में कथित गड़बड़ी का दावा किया। पार्टी के मुताबिक 13,150 वोटरों के EPIC नंबर वही रहे, लेकिन नाम बदल गए। जानिए पूरी शिकायत।

खबर में खास

  • कांग्रेस ने 13,150 मतदाता प्रविष्टियों में नाम बदलने का आरोप लगाया।
  • 804 नाम काटने और 2,600 कथित गैर-निवासियों के नाम जोड़ने का दावा।

  • आराधना मिश्रा ने सभी जिलों की मतदाता सूचियों की जाँच कराने की घोषणा की।

  • कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट से SIR पर रोक और निष्पक्ष जाँच की मांग की।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | लखनऊ | 21 अक्टूबर 2026
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कांग्रेस ने पीलीभीत सदर की 16,554 मतदाता प्रविष्टियों में कथित गड़बड़ी का दावा किया।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले मतदाता सूची को लेकर नया राजनीतिक विवाद सामने आया है। इस बार कांग्रेस ने पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए दावा किया है कि हजारों मतदाताओं के वोटर पहचान पत्र यानी EPIC नंबर और सूची के क्रमांक वही रखे गए, लेकिन उनसे जुड़े नाम बदल दिए गए।
बुधवार को लखनऊ स्थित कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी नेताओं ने पीलीभीत सदर की 16,554 मतदाता प्रविष्टियों में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। कांग्रेस ने चुनाव आयोग से जवाब माँगते हुए सुप्रीम कोर्ट से विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR पर रोक लगाने की मांग भी की। हालांकि पार्टी के आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
आखिर 13,150 मतदाताओं के बारे में क्या दावा है?
कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में जुलाई से सितंबर के बीच मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव किए गए।
उनके अनुसार, 13,150 प्रविष्टियों में EPIC नंबर और क्रमांक समान रहे, लेकिन मतदाताओं के नाम बदल गए। इसके अतिरिक्त 804 वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाने और 2,600 ऐसे लोगों के नाम जोड़ने का आरोप लगाया गया, जो कथित रूप से संबंधित क्षेत्र के निवासी नहीं हैं।
इन तीनों श्रेणियों को जोड़कर कांग्रेस ने 16,554 प्रविष्टियों में गड़बड़ी का दावा किया है। ये संख्या कांग्रेस द्वारा प्रस्तुत शिकायत पर आधारित है, चुनाव आयोग की जाँच से प्रमाणित निष्कर्ष नहीं।

कांग्रेस ने सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल पर क्यों उठाए सवाल?

राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में बदलाव के लिए किसी विशेष सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किए जाने की आशंका है।
उन्होंने कहा कि EPIC नंबर समान रहने के बावजूद नाम बदलने की स्थिति में यह पता लगाना आवश्यक है कि संशोधन किसके निर्देश पर और किस प्रक्रिया के अंतर्गत हुआ।
कांग्रेस ने संबंधित अधिकारियों से बदलावों का विस्तृत रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की है। हालांकि किसी सॉफ्टवेयर के जानबूझकर दुरुपयोग का स्वतंत्र तकनीकी प्रमाण अब तक सामने नहीं आया है।

2022 के चुनाव परिणाम से क्यों जोड़ा मामला?

कांग्रेस ने पीलीभीत सदर के पिछले विधानसभा चुनाव का भी उल्लेख किया।
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि 2022 में भाजपा उम्मीदवार संजय गंगवार 6,930 मतों के अंतर से जीते थे, जबकि कांग्रेस अब 16 हजार से ज्यादा मतदाता प्रविष्टियों में गड़बड़ी का दावा कर रही है।
पार्टी ने इन दोनों आँकड़ों की तुलना करते हुए चुनावी निष्पक्षता पर सवाल उठाए।
लेकिन एक महत्वपूर्ण अंतर है—मतदाता सूची में संदिग्ध प्रविष्टियों की संख्या और चुनाव में गलत तरीके से पड़े वास्तविक वोटों की संख्या एक जैसी नहीं होती। इसलिए सिर्फ दोनों आँकड़ों की तुलना से चुनाव परिणाम प्रभावित होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
आराधना मिश्रा ने पूरे यूपी में जाँच का किया ऐलान
उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा 'मोना' ने कहा कि पार्टी अब प्रदेश के प्रत्येक जिले में मतदाता सूचियों की जाँच कराएगी।
उन्होंने मतदाताओं के नाम हटाए जाने के मामलों में कानूनी प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करने और पार्टी संगठन को इस मुद्दे पर सक्रिय करने की बात कही।
सांसद इमरान मसूद ने भी नागरिकों से अपने नाम और मतदान विवरण की जाँच करने की अपील की। उन्होंने कहा कि मताधिकार की सुरक्षा सभी नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण है।
चुनाव आयोग के सामने अब कौन-से सवाल?
कांग्रेस का दावा है कि संबंधित मतदाता सूची जारी होने के बाद भी उसमें संशोधन किए गए। अब यह स्पष्ट करना आवश्यक होगा कि प्रत्येक बदलाव के पीछे आवेदन, सत्यापन और स्वीकृति की कौन-सी प्रक्रिया अपनाई गई।
समाचार तैयार होने तक पीलीभीत की सभी 16,554 प्रविष्टियों पर निर्वाचन अधिकारियों की विस्तृत जाँच रिपोर्ट या चुनाव आयोग का विशिष्ट जवाब उपलब्ध नहीं था।
मतदाता अपने विवरण की जाँच भारत निर्वाचन आयोग के आधिकारिक Voters' Services Portal पर कर सकते हैं। यहाँ मतदाता सूची में नाम खोजने, आवेदन की स्थिति देखने और शिकायत दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध है।
2027 विधानसभा चुनाव से पहले क्यों महत्वपूर्ण है मामला?
उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर अगले साल चुनाव होने हैं। ऐसे समय में मतदाता सूची का सही और अद्यतन होना राजनीतिक दलों के साथ आम मतदाताओं के लिए भी महत्वपूर्ण है।
कांग्रेस ने इस मुद्दे को प्रदेशव्यापी अभियान बनाने का संकेत दिया है। दूसरी ओर अब यह देखना होगा कि चुनाव आयोग आरोपों का क्या जवाब देता है और संबंधित प्रविष्टियों की जाँच में क्या सामने आता है।
प्रत्यक्षदर्शी का सवाल: यदि किसी मतदाता का EPIC नंबर वही हो लेकिन सूची में नाम बदल जाए, तो ऐसी शिकायत की पारदर्शी जाँच और समयबद्ध समाधान की व्यवस्था कैसे सुनिश्चित होनी चाहिए?

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