DU में पीएम मोदी के कार्यक्रम के दो दिन बाद छात्रों की मौत, सत्य निकेतन हादसे पर CJP ने पूछा—जिम्मेदार कौन?
पांच मंजिला PG इमारत गिरने से सात लोगों की मौत और पांच घायल; CJP ने शहरी प्रशासन, अवैध PG और अधिकारियों की जवाबदेही पर उठाए सवाल
दिल्ली के सत्य निकेतन में छात्रों का पांच मंजिला PG ढहने से सात लोगों की मौत हो गई। हादसे के बाद CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका ने सरकार को घेरते हुए सुरक्षित हॉस्टल, अवैध निर्माण और प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा उठाया है।
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के नजदीक सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला PG इमारत गिरने से सात लोगों की मौत हो गई, जबकि पांच लोग घायल हुए हैं। छात्रों से भरी इमारत के अचानक मलबे में बदल जाने के बाद दिल्ली की जर्जर इमारतों, अवैध PG और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
इस हादसे को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और सह-संयोजक आशुतोष रांका ने केंद्र और दिल्ली सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। CJP नेताओं ने सवाल किया कि राजधानी में बड़ी संख्या में छात्र असुरक्षित इमारतों में रहने को मजबूर क्यों हैं और ऐसे निर्माण वर्षों तक सरकारी एजेंसियों की नजर से कैसे बचे रहते हैं।
सात लोगों की मौत, पांच घायल
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, सत्य निकेतन हादसे में मलबे से कुल 12 लोगों को बाहर निकाला गया। इनमें सात लोगों की मौत हो गई और पांच घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया।
मृतकों की पहचान अभिषेक, युवराज सोनी, पवन, अर्पित, अक्षत सिंह यादव और सुरिंदर सिंह के रूप में बताई गई है, जबकि एक मृतक की पहचान खबर लिखे जाने तक स्पष्ट नहीं हुई थी। घायलों में असगर अली, नीरज बावा, आदित्य कुमार, नीतीश चिब और मोहम्मद अयान शामिल हैं। हादसे से संबंधित विस्तृत जानकारी
पुलिस, दमकल विभाग और NDRF की टीमों ने कई घंटों तक मलबा हटाकर फंसे लोगों को बाहर निकालने का अभियान चलाया। संकरी गलियों और भारी मलबे के कारण बचाव कार्य में काफी मुश्किलें आईं।
CJP ने सरकार पर उठाए गंभीर सवाल
CJP नेताओं की प्रतिक्रिया पर एबीपी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, आशुतोष रांका ने देश के शहरी प्रशासन की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि जर्जर बुनियादी ढांचे, टूटी सड़कों, प्रदूषित हवा और जाम सीवर जैसी समस्याओं के बावजूद राजनीतिक और नौकरशाही स्तर पर जवाबदेही तय नहीं हो रही है।
उन्होंने कहा कि लगातार सामने आ रहे ऐसे हादसों पर गंभीर चर्चा और ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है। उनके मुताबिक, किसी बड़ी दुर्घटना के बाद केवल जांच की घोषणा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि हादसे से पहले ही असुरक्षित इमारतों की पहचान करके कार्रवाई होनी चाहिए।
सौरव दास ने पीएम मोदी को लेकर क्या कहा?
CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने हादसे के बाद प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि हादसे से करीब दो दिन पहले प्रधानमंत्री दिल्ली विश्वविद्यालय के एक कॉलेज में छात्रों से मिलकर आए थे, लेकिन सत्य निकेतन में छात्रों के मलबे में फंसने के बाद तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
हालांकि, यह बयान हादसे के शुरुआती घंटों में दिया गया था। बाद में प्रधानमंत्री की ओर से मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की गई। इसलिए CJP की आलोचना को उस समय की प्रतिक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए।
क्या बेसमेंट में चल रहा काम बना हादसे की वजह?
इमारत गिरने का वास्तविक कारण विस्तृत तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। शुरुआती रिपोर्टों में बताया गया कि करीब 50 वर्ष पुरानी इमारत के बेसमेंट में मरम्मत या निर्माण का काम चल रहा था।
स्थानीय लोगों ने कमजोर नींव, बेसमेंट में पानी जमा होने और निर्माण कार्य को संभावित कारण बताया है। अधिकारियों ने अभी इन दावों की अंतिम पुष्टि नहीं की है।
रिपोर्टों के मुताबिक, इमारत मूल रूप से कम मंजिलों के लिए स्वीकृत थी, लेकिन बाद में इसमें अतिरिक्त निर्माण किया गया। पुलिस और प्रशासन इस बात की जांच कर रहे हैं कि निर्माण के लिए आवश्यक अनुमति ली गई थी या नहीं और इमारत को PG के रूप में चलाने के लिए सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा था या नहीं।
बिल्डिंग मालिक सहित तीन लोग गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस ने हादसे के संबंध में इमारत मालिक हरिराम गुप्ता, उनकी पत्नी उर्मिला और बेटे महेश को गिरफ्तार किया है। मालिक के खिलाफ गैर इरादतन हत्या, इमारत के रखरखाव में लापरवाही और लोगों की सुरक्षा खतरे में डालने जैसी धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
हरिराम को पुलिस की टीम ने राजस्थान के भिवाड़ी से पकड़ा। हादसे के बाद उसकी तलाश के लिए पुलिस की दस टीमें बनाई गई थीं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट
मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में होगी। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इमारत में अवैध निर्माण किसकी अनुमति या लापरवाही से हुआ और क्या संबंधित विभागों को पहले इसकी जानकारी थी।
MCD के पांच अधिकारी निलंबित
हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम ने साउथ जोन के उपायुक्त सहित पांच अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। कार्रवाई के दायरे में डिप्टी कमिश्नर, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, असिस्टेंट इंजीनियर और जूनियर इंजीनियर बताए गए हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट ने भी मामले को गंभीर बताते हुए टिप्पणी की कि जिम्मेदारी केवल इमारत मालिकों तक सीमित नहीं है। कोर्ट ने MCD के साथ दिल्ली विश्वविद्यालय की भूमिका पर भी सवाल उठाया, क्योंकि पर्याप्त हॉस्टल नहीं होने के कारण बाहर से आने वाले छात्रों को निजी PG पर निर्भर रहना पड़ता है।
दिल्ली सरकार ने नई सुरक्षा नीति का किया ऐलान
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि दिल्ली सरकार PG, स्कूल, नर्सिंग होम और सार्वजनिक उपयोग वाली अन्य इमारतों के लिए नई सुरक्षा नीति पर काम करेगी। ऐसी इमारतों का नियमित स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने और सुरक्षा प्रमाणपत्र अनिवार्य करने की तैयारी है।
सरकार ने सत्य निकेतन सहित PG की अधिक संख्या वाले इलाकों में इमारतों का सर्वे और स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने का निर्देश दिया है। आसपास की संदिग्ध इमारतों की जांच करने और नियमों का उल्लंघन मिलने पर सीलिंग या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की बात भी कही गई है। सरकार की प्रस्तावित सुरक्षा नीति
हादसे ने खड़े किए कई बड़े सवाल
सत्य निकेतन हादसे ने दिल्ली में छात्रों की आवास व्यवस्था की वास्तविक स्थिति सामने ला दी है। सबसे बड़ा सवाल है कि भारी किराया लेने वाले PG में छात्रों की सुरक्षा जांच क्यों नहीं होती? यदि इमारत पहले से कमजोर थी तो उसे खाली क्यों नहीं कराया गया? कथित अवैध निर्माण के दौरान संबंधित विभागों ने कार्रवाई क्यों नहीं की?
मालिकों की गिरफ्तारी और अधिकारियों का निलंबन जांच की शुरुआत है। अब पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के साथ यह सुनिश्चित करना जरूरी होगा कि दिल्ली में कोई दूसरा छात्र असुरक्षित PG में रहने के कारण ऐसी दुर्घटना का शिकार न बने।
