कर्नाटक सूखे पर खरगे की PM मोदी को चिट्ठी: ₹18,748 करोड़ के नुकसान का दावा, तुरंत मांगी ₹3,705 करोड़ की राहत
कांग्रेस अध्यक्ष ने किसानों, पेयजल और पशुओं के चारे का संकट बताते हुए केंद्र के सामने रखीं छह मांगें; 3 से 7 अक्टूबर तक प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेगी केंद्रीय टीम
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कर्नाटक के भीषण सूखे को लेकर मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने ₹18,748 करोड़ के फसल नुकसान का हवाला देते हुए ₹3,705.30 करोड़ की केंद्रीय सहायता मांगी है।
177 तालुक सूखे की चपेट में, 31 लाख से अधिक किसान परिवार प्रभावित; खरगे बोले—राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर तुरंत मदद करे केंद्र
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राष्ट्रीय डेस्क | 3 अक्टूबर 2026
खबर में खास
- खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखा पत्र
- केंद्र से ₹3,705.30 करोड़ की सहायता मांगी
- ₹18,748.23 करोड़ के फसल नुकसान का दावा
- 31 लाख से अधिक किसान परिवार प्रभावित
- केंद्रीय टीम 3 से 7 अक्टूबर तक करेगी निरीक्षण
कर्नाटक में गंभीर सूखे और किसानों के बढ़ते संकट को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। खरगे ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर राज्य के लिए ₹3,705.30 करोड़ की केंद्रीय सहायता जल्द जारी करने का अनुरोध किया है।
खरगे ने कहा कि सूखा राहत एक मानवीय आवश्यकता है और इस मामले में केंद्र तथा राज्य सरकार को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर काम करना चाहिए। उन्होंने इसी मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी पत्र लिखा है।
19.52 लाख हेक्टेयर की फसल प्रभावित
राज्य सरकार के शुरुआती आकलन के अनुसार करीब 19.52 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसलों को नुकसान हुआ है। इसकी अनुमानित कीमत ₹18,748.23 करोड़ बताई गई है। इसी नुकसान के आधार पर केंद्र से NDRF और SDRF के नियमों के तहत ₹3,705.30 करोड़ की सहायता मांगी गई है।
कर्नाटक सरकार ने शुरुआत में यह सहायता 101 सूखाग्रस्त तालुकों के लिए मांगी थी। बाद में वैज्ञानिक और जमीनी आकलन के बाद सूखाग्रस्त घोषित तालुकों की संख्या बढ़कर 177 हो गई। राज्य में कुल 240 तालुक हैं।
31 लाख किसान परिवारों पर संकट
खरगे के अनुसार सूखे से कर्नाटक के 31 लाख से अधिक किसान परिवारों की आजीविका प्रभावित हुई है। फसल खराब होने के साथ कई क्षेत्रों में पीने के पानी और पशुओं के चारे की समस्या भी बढ़ रही है।
कर्नाटक में इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून की बारिश सामान्य से करीब 35 प्रतिशत कम रही। राज्य के प्राकृतिक आपदा निगरानी केंद्र के मुताबिक यह वर्ष 1971 के बाद सबसे कमजोर मानसून रहा है।
PM मोदी के सामने रखीं छह मांगें
मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री के सामने छह प्रमुख मांगें रखी हैं—
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सूखा प्रभावित कल्याण कर्नाटक क्षेत्र में केंद्रीय टीम भेजकर जमीनी आकलन कराया जाए।
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राज्य द्वारा मांगी गई ₹3,705.30 करोड़ की पूरी सहायता जारी की जाए।
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छोटे और सीमांत किसानों की पहचान के लिए पुराने कृषि आंकड़ों के बजाय कर्नाटक के अपडेटेड ‘भूमि’ रिकॉर्ड इस्तेमाल किए जाएं।
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जांच के बाद सूखाग्रस्त घोषित होने वाले अतिरिक्त तालुकों को भी केंद्रीय सहायता में शामिल किया जाए।
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पेयजल आपूर्ति और पशुओं के चारे के लिए अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराई जाए।
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जलाशयों में कम पानी के कारण वैकल्पिक बिजली उत्पादन पर आने वाले खर्च में केंद्र मदद करे।
