करीबी पर ED की बड़ी कार्रवाई के बाद हरीश रावत ने छोड़े कांग्रेस के पद, ₹32 लाख कैश और सोना मिलने का दावा; 2027 से पहले गरमाई सियासत
उत्तराखंड की राजनीति में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रदेश कांग्रेस कार्यकारिणी और कांग्रेस वर्किंग कमेटी के स्थायी आमंत्रित सदस्य के पद से हटने का फैसला किया है। इससे एक दिन पहले ED ने उनके पूर्व OSD और मौजूदा निजी सहयोगी चंदन सिंह जीना के आवास पर कार्रवाई करते हुए करीब ₹1.28 करोड़ की संपत्ति जब्त या फ्रीज करने का दावा किया था।
देहरादून: उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम ने हलचल बढ़ा दी है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने पार्टी में अपने दो अहम संगठनात्मक पद छोड़ने का फैसला किया है। यह फैसला उनके लंबे समय से सहयोगी रहे चंदन सिंह जीना के घर प्रवर्तन निदेशालय यानी ED की कार्रवाई के बाद आया है। हालांकि यहां यह समझना जरूरी है कि रावत ने कांग्रेस की सदस्यता नहीं छोड़ी है। उन्होंने प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस वर्किंग कमेटी में स्थायी आमंत्रित सदस्य का पद छोड़ा है। कांग्रेस की आधिकारिक वेबसाइट पर भी हरीश रावत CWC के permanent invitee के रूप में सूचीबद्ध रहे हैं।
आखिर चंदन सिंह जीना के घर ED को क्या मिला?
प्रवर्तन निदेशालय ने 10 सितंबर को देहरादून में कई जगह तलाशी अभियान चलाया था। यह कार्रवाई उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग यानी UKSSSC की 2016 ग्राम पंचायत विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई।
इसी कार्रवाई के दौरान हरीश रावत के पूर्व OSD चंदन सिंह जीना के आवास की भी तलाशी ली गई। ED के अनुसार जीना हरीश रावत के मुख्यमंत्री रहने के दौरान OSD रहे थे और वर्तमान में भी उनके निजी सहयोगी के तौर पर काम कर रहे थे।
जांच एजेंसी का दावा है कि जीना के आवास से ₹32 लाख की बेहिसाब नकदी, करीब 200.5 ग्राम वजन के सोने के सिक्के और चेन तथा 12 लग्जरी कलाई घड़ियां मिलीं। एजेंसी के मुताबिक यहां से जब्त और फ्रीज की गई संपत्तियों का कुल मूल्य करीब ₹1.28 करोड़ है। ये अभी जांच एजेंसी के दावे हैं और मामले की जांच जारी है।
किस भर्ती परीक्षा से जुड़ा है मामला?
ED की जांच का संबंध वर्ष 2016 की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा से है। एजेंसी का आरोप है कि परीक्षा की कुछ OMR sheets को सुरक्षित कस्टडी से कथित तौर पर बाहर निकाला गया और अधूरी भरी OMR sheets को एक निजी कंप्यूटर एजेंसी तक पहुंचाया गया।
आरोप है कि बाद में इन OMR sheets में बदलाव और उन्हें भरने की प्रक्रिया हुई और इसके बदले बिचौलियों के जरिए अवैध भुगतान किया गया। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम कानूनी निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा।
UKSSSC से जुड़े परीक्षा घोटालों की जांच पहले से चलती रही है। ED ने दिसंबर 2024 में भी बताया था कि विभिन्न UKSSSC परीक्षाओं के paper leak मामलों में जांच के दौरान उम्मीदवारों से कथित तौर पर लाखों रुपये लेने के आरोप सामने आए थे।
हरीश रावत ने क्या कहा?
अपने सहयोगी के खिलाफ हुई कार्रवाई के बाद हरीश रावत ने सोशल मीडिया के जरिए अपना पक्ष रखा। उन्होंने स्वीकार किया कि चंदन सिंह जीना उनके OSD रह चुके हैं और लंबे समय से विभिन्न जिम्मेदारियां संभालते रहे हैं।
रावत ने कहा कि यदि भर्ती प्रक्रिया में OMR sheets से छेड़छाड़ में उनके सहयोगी की भूमिका के प्रमाण सामने आते हैं तो यह उनके लिए शर्मिंदगी की बात होगी। हालांकि उन्होंने साथ ही साफ किया कि मौजूदा आरोपों पर उन्हें विश्वास नहीं है।
फिर पद छोड़ने का फैसला क्यों किया?
हरीश रावत ने अपने फैसले को कांग्रेस की राजनीतिक लड़ाई से जोड़ा है। उनका कहना है कि इस समय कांग्रेस भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सरकार को घेर रही है और वह नहीं चाहते कि उनके या उनके किसी सहयोगी से जुड़े विवाद के कारण पार्टी की इस लड़ाई पर सवाल खड़े हों।
इसी आधार पर उन्होंने उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी की सदस्यता और कांग्रेस वर्किंग कमेटी के स्थायी आमंत्रित सदस्य के पद से हटने की इच्छा जताई।
ED की कार्रवाई को बताया 'नरेटिव बनाने की कोशिश'
रावत ने इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक नजरिए से भी देखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से पहले उनके सहयोगी के यहां हुई कार्रवाई के जरिए उनके खिलाफ एक राजनीतिक धारणा बनाने की कोशिश की जा रही है।
उनका कहना है कि उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में दांव बड़ा है और ऐसी स्थिति में वह पार्टी को किसी तरह की राजनीतिक असहजता नहीं देना चाहते।
दूसरी ओर, जांच एजेंसी भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है। ऐसे में रावत का राजनीतिक आरोप और ED की जांच—दोनों अलग-अलग पक्ष हैं।
42 हजार भर्तियों का भी किया जिक्र
हरीश रावत ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल का उल्लेख करते हुए दावा किया कि उनके करीब तीन वर्ष के शासन के दौरान 42 हजार से अधिक सरकारी भर्तियां हुई थीं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उस भर्ती प्रक्रिया में सरकार के स्तर पर निर्णय संबंधी कोई गलती हुई हो तो वह उत्तराखंड की जनता से उसके लिए क्षमा चाहते हैं।
2027 से पहले कांग्रेस के लिए क्यों अहम है मामला?
इस पूरे घटनाक्रम की टाइमिंग सबसे महत्वपूर्ण है। उत्तराखंड में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं और कांग्रेस पहले से राज्य में BJP सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार, रोजगार और भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मुद्दे उठा रही है।
ऐसे समय में पार्टी के सबसे बड़े और अनुभवी चेहरों में शामिल हरीश रावत के करीबी पर जांच एजेंसी की कार्रवाई कांग्रेस के लिए राजनीतिक चुनौती बन सकती है।
हरीश रावत पहले ही संकेत दे चुके हैं कि वह 2027 का विधानसभा चुनाव खुद नहीं लड़ना चाहते, लेकिन पार्टी के उम्मीदवारों और चुनावी अभियान के लिए काम करेंगे। अगस्त 2026 में भी उन्होंने स्पष्ट किया था कि राजनीति से संन्यास लेने की उनकी कोई योजना नहीं है।
यही कारण है कि संगठनात्मक पद छोड़ने का उनका फैसला राजनीतिक रूप से अहम है, लेकिन इसे कांग्रेस छोड़ने या सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने के रूप में देखना सही नहीं होगा।
अब नजर दो बातों पर रहेगी—पहली, कांग्रेस नेतृत्व हरीश रावत के इस्तीफे पर क्या फैसला करता है और दूसरी, चंदन सिंह जीना से जुड़े मामले में ED की जांच आगे किस दिशा में बढ़ती है।
2027 के चुनाव से पहले उत्तराखंड में यह मामला अब केवल जांच एजेंसी की कार्रवाई तक सीमित रहेगा या BJP-कांग्रेस के बीच बड़ा चुनावी मुद्दा बनेगा, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।
