उमर अब्दुल्ला के खिलाफ अपने ही सांसद ने खोला मोर्चा! पार्टी छोड़ी, लोकसभा से इस्तीफा भेजा; अनुच्छेद 370 पर तीखी तकरार

श्रीनगर के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस पर चुनावी वादे तोड़ने का आरोप लगाया। पार्टी ने जवाब में उनके संसदीय कामकाज पर सवाल उठाए, जिसके बाद विवाद और बढ़ गया।

श्रीनगर के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी की तस्वीर

श्रीनगर के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस छोड़कर लोकसभा से इस्तीफा भेजा। अनुच्छेद 370 पर आरोप-प्रत्यारोप के बीच उमर अब्दुल्ला की पार्टी में मतभेद सामने आए।

श्रीनगर | 4 नवंबर 2026 | प्रत्यक्षदर्शी समाचार
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जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस छोड़ दी और लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा भेजा। अनुच्छेद 370 को लेकर उमर अब्दुल्ला की पार्टी से उनका विवाद बढ़ गया है।
जम्मू-कश्मीर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर राजनीतिक विवाद खुलकर सामने आ गया है। श्रीनगर के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने मंगलवार, 3 नवंबर को पार्टी छोड़ दी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को अपना इस्तीफा भेज दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला पर चुनावी वादों से पीछे हटने का आरोप लगाया। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने भी तीखा जवाब दिया, जिस पर बुधवार को रुहुल्लाह ने फिर पलटवार किया।

खबर में खास

  • श्रीनगर के सांसद रुहुल्लाह मेहदी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस से 24 साल पुराना रिश्ता तोड़ा।
  • अनुच्छेद 370, आरक्षण और राज्य का दर्जा बहाल कराने के मुद्दों पर पार्टी नेतृत्व को घेरा।
  • नेशनल कॉन्फ्रेंस ने उनके संसदीय कामकाज और इस्तीफे के समय पर सवाल उठाए।
  • रुहुल्लाह ने जम्मू-कश्मीर में नया राजनीतिक आंदोलन शुरू करने का संकेत दिया।
  • लोकसभा अध्यक्ष से इस्तीफे की स्वीकृति की पुष्टि अभी नहीं हुई है।

हजारों समर्थकों के सामने क्यों दिया इस्तीफा?

रुहुल्लाह ने बडगाम के बहिश्ती जहरा पार्क में अपने पिता आगा सैयद मेहदी की 26वीं पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में यह घोषणा की।
उन्होंने मंच से पार्टी का इस्तीफा हस्ताक्षरित किया और उसे मोहम्मद अशरफ मट्टू को सौंपा, जिनके बेटे तुफैल मट्टू की 2010 में मौत के बाद कश्मीर में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे।
रुहुल्लाह ने आरोप लगाया कि 2024 के विधानसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने जम्मू-कश्मीर के लोगों से विशेष संवैधानिक दर्जे और अधिकारों की बहाली का वादा किया था, लेकिन सत्ता मिलने के बाद पार्टी पर्याप्त संघर्ष नहीं कर रही।

उमर और फारूक अब्दुल्ला पर क्या आरोप लगाए?

पूर्व सांसद बनने की प्रक्रिया में चल रहे रुहुल्लाह ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की राजनीतिक प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी जनता के अधिकारों के मुकाबले सत्ता में बने रहने पर अधिक ध्यान दे रही है।
उन्होंने आरक्षण नीति, राजनीतिक बंदियों और बिजली संबंधी चुनावी आश्वासनों का भी मुद्दा उठाया।
हालांकि, ये रुहुल्लाह के राजनीतिक आरोप हैं। इन पर नेशनल कॉन्फ्रेंस का पक्ष अलग है।

नेशनल कॉन्फ्रेंस ने क्या जवाब दिया?

पार्टी ने रुहुल्लाह के आरोपों को खारिज करते हुए सवाल पूछा कि उन्होंने संसद में अनुच्छेद 370 की बहाली के लिए कौन-से ठोस कदम उठाए।
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कहा कि राज्य का दर्जा वापस पाने की उसकी मांग का मतलब विशेष संवैधानिक दर्जे की मांग छोड़ना नहीं है।
पार्टी ने रुहुल्लाह के भाषण की भाषा और इस्तीफे के समय की भी आलोचना की। बुधवार को रुहुल्लाह ने पलटवार करते हुए कहा कि पार्टी नेतृत्व को चुनावी वादों पर सवाल पूछने वालों से नाराज होने के बजाय जनता को जवाब देना चाहिए।

BJP ने क्या कहा?

भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राम माधव ने इस घटनाक्रम को नेशनल कॉन्फ्रेंस का आंतरिक मामला बताया और पार्टी की अंदरूनी खींचतान में भाजपा की भूमिका होने से इनकार किया।
इसी बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद कुछ विधायकों की नाराजगी की खबरें भी सामने आई हैं।

क्या अब नई राजनीतिक पार्टी बनेगी?

रुहुल्लाह ने नए राजनीतिक आंदोलन का संकेत जरूर दिया है, लेकिन किसी नई पार्टी के गठन या चुनावी कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा नहीं की है।
सबसे पहले लोकसभा अध्यक्ष को भेजे गए उनके इस्तीफे पर फैसला महत्वपूर्ण होगा। स्वीकृति के बाद ही श्रीनगर सीट रिक्त होगी।
फिलहाल इस घटनाक्रम ने जम्मू-कश्मीर की सत्तारूढ़ पार्टी के भीतर राजनीतिक मतभेदों को सार्वजनिक कर दिया है।

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