West Bengal Politics: 'दुर्गा प्रतिमा को सिर्फ सनातनी छुएंगे', CM शुभेंदु अधिकारी के बयान पर विवाद! TMC-वाम दलों ने उठाए सवाल
बंगाल के CM शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि दुर्गा प्रतिमा विसर्जन में केवल सनातन धर्म के अनुयायी प्रतिमा छुएंगे। TMC नेता कुणाल घोष और CPI(M) नेता विकास रंजन भट्टाचार्य ने इस बयान पर आपत्ति जताई।
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पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के दुर्गा प्रतिमा विसर्जन संबंधी बयान पर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। TMC और CPI(M) नेताओं ने सवाल उठाए हैं। जानिए सरकार और विपक्ष का पक्ष।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | कोलकाता | 22 अक्टूबर 2026
पश्चिम बंगाल में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन को लेकर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के एक बयान के बाद राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि हुगली नदी में दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान केवल सनातन धर्म को मानने वाले लोग ही प्रतिमाओं को स्पर्श करेंगे।
उनके इस बयान का तृणमूल कांग्रेस और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं ने विरोध किया है। विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाया है कि प्रतिमाओं को स्पर्श करने वाले लोगों की धार्मिक पहचान किस आधार पर तय की जाएगी।
खबर में खास
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मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 21 अक्टूबर को विसर्जन संबंधी बयान दिया।
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केवल सनातन धर्म के अनुयायियों के प्रतिमा स्पर्श करने की बात कही।
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TMC नेता कुणाल घोष ने कहा कि मां दुर्गा सभी की हैं।
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CPI(M) नेता विकास रंजन भट्टाचार्य ने संवैधानिक सवाल उठाए।
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विसर्जन के दौरान सुरक्षा के लिए 18 IPS अधिकारियों की तैनाती।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने क्या कहा?
बुधवार को कोलकाता के बाबूघाट पर विसर्जन की व्यवस्थाओं का निरीक्षण करते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने यह बयान दिया।
उन्होंने कहा कि कोलकाता पुलिस आयुक्त को उन लोगों की पहचान दर्ज करने के लिए कहा गया है, जो प्रतिमाओं को हुगली नदी में ले जाने के कार्य में शामिल होंगे।
मुख्यमंत्री के अनुसार, विसर्जन एक धार्मिक अनुष्ठान है और इसे हजारों वर्षों से चली आ रही परंपराओं तथा धार्मिक नियमों के अनुसार संपन्न कराया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि उनकी बात को सांप्रदायिक मुद्दे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
TMC नेता कुणाल घोष ने क्या सवाल उठाए?
तृणमूल कांग्रेस के विधायक कुणाल घोष ने मुख्यमंत्री के बयान की आलोचना की।
घोष ने कहा कि मां दुर्गा सभी की हैं और जाति, धर्म या समुदाय के आधार पर किसी को उनके आशीर्वाद से अलग नहीं किया जा सकता।
उन्होंने सवाल किया कि क्या अब मुख्यमंत्री यह जाँच करेंगे कि प्रतिमा विसर्जन में शामिल प्रत्येक व्यक्ति किस धर्म का अनुयायी है?
कुणाल घोष ने स्वामी विवेकानंद, श्रीरामकृष्ण परमहंस और चैतन्य महाप्रभु की शिक्षाओं का हवाला देते हुए कहा कि बंगाल की धार्मिक परंपराएं समावेशिता पर आधारित रही हैं।
CPI(M) ने संविधान का मुद्दा उठाया
CPI(M) के वरिष्ठ नेता विकास रंजन भट्टाचार्य ने भी मुख्यमंत्री के बयान पर सवाल उठाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री धार्मिक पहचान के आधार पर लोगों को अलग करने का प्रयास कर रहे हैं।
भट्टाचार्य ने पूछा कि सरकार किस आधार पर निर्धारित करेगी कि कौन व्यक्ति सनातन धर्म का अनुयायी है और कौन नहीं।
मानवाधिकार संगठन एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ डेमोक्रेटिक राइट्स (APDR) ने भी इस बयान की आलोचना करते हुए संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लेख किया है।
हालांकि, इस बयान या किसी लिखित आदेश की संवैधानिक वैधता पर अदालत का कोई निर्णय इन रिपोर्टों में सामने नहीं आया है।
दुर्गा विसर्जन की सुरक्षा व्यवस्था कैसी है?
कोलकाता में हाल ही में दुर्गा पूजा पंडाल में मची भगदड़ से 19 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद विसर्जन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है।
सरकार ने कोलकाता और आसपास के पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्रों में 18 IPS अधिकारियों को निगरानी की जिम्मेदारी दी है।
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल यानी NDRF को भी विसर्जन व्यवस्था में शामिल किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, हुगली नदी में विसर्जन के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त इंतजाम किए गए हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल क्या है?
