₹2000 से ऊपर UPI पेमेंट पर लगेगा चार्ज? राहुल गांधी ने मोदी सरकार को घेरा, जानें नए नियम की सच्चाई
₹2,000 से ऊपर UPI पेमेंट पर संभावित MDR को लेकर राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है। हालांकि सरकार का कहना है कि UPI यूजर्स से कोई ट्रांजैक्शन फीस नहीं ली जाएगी और P2P पेमेंट भी फ्री रहेगा।
UPI पेमेंट पर चार्ज को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। केंद्र की नई अधिसूचना में ₹2,000 तक UPI ट्रांजैक्शन पर किसी भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष चार्ज की मनाही की गई है। राहुल गांधी का आरोप है कि इससे ₹2,000 से ऊपर के merchant transactions पर भविष्य में MDR लगाने का रास्ता खुल गया है। हालांकि सरकार स्पष्ट कर चुकी है कि UPI consumers और person-to-person transactions पर कोई transaction fee नहीं लगेगी।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली | 15 सितंबर 2026
UPI पर ₹2,000 की सीमा से जुड़े नए नियम को लेकर राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं।
खबर में खास
₹2,000 तक UPI पर चार्ज लगाने की मनाही
₹2,000 से ऊपर consumer fee अभी लागू नहीं
राहुल गांधी ने सरकार पर MDR का रास्ता खोलने का आरोप लगाया
P2P UPI transactions फ्री रखने की सरकार की घोषणा
UPI से ₹2,000 से ज्यादा का पेमेंट करने पर क्या अब पैसे कटेंगे?
सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक यही सवाल चर्चा में है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने UPI को लेकर केंद्र की नई व्यवस्था पर मोदी सरकार को घेरा है।
राहुल गांधी का आरोप है कि सरकार ने चुपचाप ऐसा रास्ता तैयार कर दिया है, जिससे भविष्य में ₹2,000 से ज्यादा के merchant UPI transactions पर Merchant Discount Rate यानी MDR लगाया जा सकता है।
लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि आज से ₹2,001 या उससे ज्यादा का UPI payment करने वाले ग्राहक से कोई charge कटना शुरू हो गया है।
सरकार ने आखिर बदला क्या है?
14 सितंबर को वित्त मंत्रालय ने Payment and Settlement Systems Act, 2007 की धारा 10A के तहत नई अधिसूचना जारी की।
इसमें दो electronic payment modes को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया—
RuPay Debit Card और ₹2,000 तक के UPI transactions।
इनके जरिए भुगतान करने या प्राप्त करने वाले व्यक्ति पर बैंक या payment system provider सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से कोई charge नहीं लगा सकता।
विवाद की वजह यही ₹2,000 की सीमा है।
क्या ₹2000 से ऊपर UPI करते ही पैसे कटेंगे?
नहीं।
फिलहाल सरकार ने ऐसा कोई consumer transaction charge घोषित नहीं किया है, जो ₹2,000 की सीमा पार करते ही ग्राहक से वसूला जाए।
अगर आप किसी व्यक्ति को ₹5,000, ₹10,000 या ₹20,000 UPI से भेजते हैं तो केवल रकम ₹2,000 से ज्यादा होने की वजह से कोई नया सरकारी UPI charge लागू नहीं हो जाता।
वित्त मंत्रालय ने अगस्त में स्पष्ट कहा था कि UPI consumers पर transaction charge नहीं लगेगा और सभी Person-to-Person यानी P2P transactions free रहेंगे।
फिर राहुल गांधी ने सवाल क्यों उठाया?
विवाद कानून और notification में हुए बदलाव को लेकर है।
पहले UPI और RuPay जैसे निर्धारित digital payment modes पर व्यापक zero-MDR कानूनी व्यवस्था थी।
नई व्यवस्था में अधिसूचना ने विशेष रूप से ₹2,000 तक के UPI transactions को no-charge category में रखा है। Reuters के मुताबिक इससे ₹2,000 से ऊपर कुछ transactions पर भविष्य में fees की संभावना के लिए कानूनी रास्ता खुला है, हालांकि अभी ऐसा charge लगाने का अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
राहुल गांधी इसी बदलाव पर सवाल उठा रहे हैं।
राहुल गांधी ने क्या आरोप लगाया?
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार UPI पर fees लगाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
उनका दावा है कि ₹2,000 से ज्यादा के merchant UPI transactions पर भविष्य में MDR लगाया जा सकता है और इसका आर्थिक असर आखिरकार ग्राहक तक पहुंच सकता है।
उन्होंने इसे अमेरिकी दबाव से भी जोड़ते हुए सरकार पर निशाना साधा।
यह राहुल गांधी का राजनीतिक आरोप है।
सरकार ने यह नहीं कहा है कि किसी विदेशी payment company के दबाव में यह बदलाव किया गया है।
MDR आखिर होता क्या है?
MDR यानी Merchant Discount Rate payment processing से जुड़ा शुल्क है।
आमतौर पर यह consumer से सीधे वसूली जाने वाली transaction fee के समान चीज नहीं है।
सरकार का कहना है कि अगर भविष्य में UPI पर MDR लाया भी जाता है तो यह केवल कुछ चुनिंदा merchant transactions, तय threshold से ऊपर और nominal rate पर होगा।
इसलिए तीन चीजों को अलग-अलग समझना जरूरी है—
Consumer UPI charge, P2P transaction और Merchant MDR।
मौजूदा विवाद मुख्य रूप से तीसरे यानी संभावित merchant MDR को लेकर है।
क्या दुकानदार को ₹2000 से ज्यादा पेमेंट पर MDR देना होगा?
अभी नहीं।
₹2,000 से ऊपर होते ही हर दुकानदार से MDR काटने का कोई blanket rule लागू नहीं हुआ है।
सरकार ने कहा है कि अगर भविष्य में MDR लागू किया जाता है तो वह केवल सीमित merchant transactions पर होगा और उसकी दर debit या credit card MDR से काफी कम होगी।
यानी अभी ₹2,000 से ज्यादा = MDR लागू वाला सीधा नियम नहीं है।
P2P पेमेंट का क्या होगा?
अगर आप अपने दोस्त, रिश्तेदार या किसी दूसरे व्यक्ति के बैंक खाते में UPI से पैसे भेजते हैं तो सरकार के मुताबिक Person-to-Person transactions free रहेंगे।
₹2,000 की मौजूदा चर्चा को P2P transfer पर automatic charge समझना गलत होगा।
कांग्रेस ने सरकार पर क्या आरोप लगाया?
राहुल गांधी के अलावा कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी इस मुद्दे पर केंद्र को घेरा है।
उनका कहना है कि नई अधिसूचना ₹2,000 तक UPI को स्पष्ट सुरक्षा देती है, लेकिन इससे ऊपर के transactions को उसी तरह स्पष्ट रूप से सुरक्षित नहीं किया गया है।
कांग्रेस का आरोप है कि इससे भविष्य में UPI fees का रास्ता तैयार हो रहा है।
सरकार क्या कह रही है?
केंद्र सरकार का पक्ष इससे अलग है।
वित्त मंत्रालय ने अगस्त में स्पष्ट कहा था—
UPI citizens के लिए free रहेगा।
Consumers पर transaction charge नहीं लगेगा।
P2P transactions free रहेंगे।
और अगर भविष्य में MDR आया तो वह केवल सीमित merchant transactions पर nominal rate से होगा।
सरकार का तर्क है कि UPI ecosystem के विस्तार, technology, security और long-term sustainability के लिए sustainable revenue model जरूरी है।
₹2000 से ऊपर UPI पर अभी क्या स्थिति है?
इस पूरी बहस को आसान भाषा में समझें तो—
₹2,000 तक: नई अधिसूचना में स्पष्ट no-charge protection।
₹2,000 से ऊपर consumer payment: केवल सीमा पार करने से ग्राहक पर कोई नया charge घोषित नहीं हुआ है।
P2P payment: सरकार के मुताबिक free रहेगा।
Merchant MDR: भविष्य में कुछ चुनिंदा बड़े merchant transactions पर लगाया जा सकता है, लेकिन अभी blanket MDR लागू नहीं हुआ है।
इसलिए फिलहाल “₹2,000 से ऊपर UPI पर चार्ज लग गया” कहना गलत होगा।
सही बात यह है कि नई व्यवस्था ने भविष्य के सीमित merchant MDR को लेकर बहस और राजनीतिक विवाद को फिर से खोल दिया है।