पॉडकास्ट में डींगे, बुलंदशहर से गिरफ्तारी और अब पुलिस कस्टडी: जानिए स्वतंत्र भारद्वाज पर कैसे कसता गया शिकंजा

दिल्ली पुलिस ने पटियाला हाउस कोर्ट के जज के सामने किया पेश, अदालत ने एक दिन की पुलिस हिरासत में भेजा; पुराने मुकदमे में SC/ST एक्ट और धमकियों की शिकायत पर POCSO केस

स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी और एक दिन की पुलिस कस्टडी से जुड़ी तस्वीर

निशु आजाद के पिता संजय कुमार से कथित मारपीट के मामले में दिल्ली पुलिस ने स्वतंत्र भारद्वाज को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया है। बुलंदशहर से हिरासत में लिए जाने के बाद उसे पटियाला हाउस कोर्ट के जज के सामने पेश किया गया, जहां से एक दिन की पुलिस कस्टडी मिली। पुलिस अब वायरल पॉडकास्ट, मारपीट, कथित राजनीतिक संपर्कों और निशु को मिली धमकियों के संबंध में पूछताछ करेगी।

नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर छात्रा निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ हुई कथित मारपीट का कैमरे पर जिक्र करने के बाद विवादों में आए स्वतंत्र भारद्वाज को दिल्ली पुलिस ने औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद उसे पटियाला हाउस कोर्ट के जज के सामने पेश किया गया, जहां से अदालत ने भारद्वाज को एक दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया।

इससे पहले दिल्ली पुलिस ने स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया था। उसे दिल्ली लाने और शुरुआती पूछताछ के बाद गिरफ्तारी की प्रक्रिया पूरी की गई। अब पुलिस उससे जंतर-मंतर की घटना, वायरल पॉडकास्ट में किए गए दावों और कथित राजनीतिक संपर्कों को लेकर पूछताछ कर सकती है।

गिरफ्तारी के बाद एक दिन की पुलिस कस्टडी

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निशु आजाद के पिता से कथित मारपीट के मामले में गिरफ्तार स्वतंत्र भारद्वाज को अदालत ने एक दिन की दिल्ली पुलिस हिरासत में भेज दिया।

एबीपी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद स्वतंत्र भारद्वाज को पटियाला हाउस कोर्ट के संबंधित जज के आवास पर पेश किया। अदालत ने उसे एक दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया।

पुलिस कस्टडी के दौरान जांच अधिकारी कथित मारपीट की पूरी घटना, उसमें शामिल दूसरे लोगों, वायरल इंटरव्यू और उसके मोबाइल तथा सोशल मीडिया गतिविधियों को लेकर पूछताछ कर सकते हैं। हालांकि, पुलिस ने पूछताछ के सभी बिंदुओं का आधिकारिक विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया है। स्रोत: एबीपी न्यूज

बुलंदशहर से लिया गया था हिरासत में

स्वतंत्र भारद्वाज को एक दिन पहले दिल्ली पुलिस की टीम ने बुलंदशहर से हिरासत में लिया था। पुलिस को उसके बुलंदशहर में मौजूद होने की जानकारी मिली थी, जिसके बाद उसकी तलाश में कई टीमों को लगाया गया।

मीडिया रिपोर्ट में पुलिस सूत्रों के हवाले से दावा किया गया कि भारद्वाज मोटरसाइकिल से खुर्जा की तरफ निकल गया था। पुलिस टीम ने उसका पीछा करके उसे पकड़ लिया। इसके बाद उसे दिल्ली लाया गया और पूछताछ के बाद औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया।

इससे पहले तक विश्वसनीय रिपोर्टों में पुलिस कार्रवाई के लिए “हिरासत” शब्द इस्तेमाल किया जा रहा था। अदालत में पेशी और पुलिस रिमांड के बाद अब उसकी गिरफ्तारी की पुष्टि हो गई है।

वायरल पॉडकास्ट से दोबारा खुला मामला

पूरा विवाद स्वतंत्र भारद्वाज के एक पॉडकास्ट की क्लिप वायरल होने के बाद तेज हुआ। क्लिप में वह कथित तौर पर निशु आजाद के पिता संजय कुमार के सिर पर कड़े से हमला करने, उन्हें कई टांके लगने और राजनीतिक संपर्कों के कारण जेल नहीं जाने जैसी बातें कहता दिखाई दिया।

भारद्वाज ने कथित रूप से कहा था कि उसके खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला बनना चाहिए था, लेकिन फिर भी उसे जेल नहीं जाना पड़ा। इन दावों का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद लोगों ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाने शुरू कर दिए।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि पॉडकास्ट में भारद्वाज द्वारा चोट और टांकों के बारे में किए गए दावे पुलिस की मेडिकल जानकारी से मेल नहीं खाते। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, RML अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट में संजय कुमार की चोट को सामान्य प्रकृति यानी “Simple Injury” बताया गया था।

जंतर-मंतर पर क्या हुआ था?

यह मामला जून-जुलाई 2026 में जंतर-मंतर पर CJP के आंदोलन के दौरान हुई घटना से जुड़ा है। संजय कुमार अपनी नाबालिग बेटी निशु आजाद के साथ प्रदर्शन में मौजूद थे और मोबाइल से वीडियो बना रहे थे।

इसी दौरान विवाद शुरू हुआ और मामला कथित मारपीट तक पहुंच गया। संजय कुमार ने आरोप लगाया था कि कुछ लोगों ने उन्हें घेरकर पीटा और उनके सिर पर कड़े जैसी ठोस चीज से वार किया। मामले में स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार का नाम सामने आया था।

घटना के बाद मुकदमा दर्ज हुआ, लेकिन निशु और CJP से जुड़े लोगों का आरोप था कि पुलिस ने शुरुआत में मामले को गंभीरता से नहीं लिया और पर्याप्त धाराएं नहीं लगाईं। दिल्ली पुलिस ने राजनीतिक दबाव में काम करने के आरोपों से इनकार किया है।

CJP के प्रदर्शन के बाद तेज हुई कार्रवाई

वायरल पॉडकास्ट सामने आने के बाद CJP के नेताओं और समर्थकों ने दिल्ली के संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में निशु आजाद, उनके पिता संजय कुमार, CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका शामिल हुए।

आजाद समाज पार्टी के प्रमुख और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद, पूर्णिया सांसद पप्पू यादव और दिल्ली प्रदेश यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष अक्षय लाकड़ा भी प्रदर्शन में पहुंचे थे।

प्रदर्शनकारी स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी, पुराने मामले में SC/ST एक्ट और हत्या के प्रयास से संबंधित कानूनी प्रावधान जोड़ने की मांग कर रहे थे। कई घंटे की बातचीत के बाद दिल्ली पुलिस ने FIR में SC/ST एक्ट की धाराएं जोड़ने की पुष्टि की। उसी दिन शाम को भारद्वाज को बुलंदशहर से हिरासत में लिया गया। स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस

SC/ST एक्ट और POCSO मामला क्या है?

दिल्ली पुलिस ने संजय कुमार से कथित मारपीट के पुराने मुकदमे में SC/ST एक्ट के प्रावधान जोड़े हैं। जांच में पुलिस को यह निर्धारित करना होगा कि कथित हमला जातीय पहचान के आधार पर किया गया था या नहीं।

इसके अलावा नाबालिग निशु ने आरोप लगाया कि मामला उठाने के बाद उसे सोशल मीडिया पर दुष्कर्म की धमकियां, आपत्तिजनक टिप्पणियां और अश्लील सामग्री भेजी गई। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने POCSO एक्ट और आपराधिक धमकी से संबंधित प्रावधानों में अलग FIR दर्ज की है।

पुलिस को अब धमकी देने वाले सोशल मीडिया अकाउंट की पहचान करनी होगी। यह भी जांच का विषय है कि उन अकाउंट का स्वतंत्र भारद्वाज या किसी अन्य व्यक्ति से क्या संबंध है। केवल FIR दर्ज होने से आरोप न्यायालय में सिद्ध नहीं हो जाते।

राजनीतिक संपर्कों के दावे पर होगी पूछताछ?

वायरल पॉडकास्ट में स्वतंत्र भारद्वाज ने दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान सहित कुछ राजनीतिक नेताओं के नाम लिए थे। उसने कथित तौर पर इन नेताओं से नजदीकी होने का दावा किया था।

चिराग पासवान ने स्वतंत्र भारद्वाज से व्यक्तिगत संबंध होने से साफ इनकार किया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में नेताओं के साथ कई लोग तस्वीर खिंचवाते हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि नेता उन्हें व्यक्तिगत रूप से जानते हैं।

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की लीगल टीम ने भी दिल्ली पुलिस को शिकायत देकर कहा कि भारद्वाज का पार्टी या चिराग पासवान से कोई संबंध नहीं है। पार्टी ने आरोप लगाया कि उसने राजनीतिक नामों का गलत इस्तेमाल किया।

अब पुलिस पूछताछ में यह पता लगाया जा सकता है कि पॉडकास्ट में किए गए राजनीतिक संरक्षण के दावों का कोई तथ्यात्मक आधार था या वे केवल प्रभाव दिखाने के लिए कही गई बातें थीं।

भारद्वाज ने आत्मरक्षा का किया था दावा

मामला बढ़ने के बाद स्वतंत्र भारद्वाज ने अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि जंतर-मंतर पर उसे कई लोगों ने घेर लिया था और उसने आत्मरक्षा में प्रतिक्रिया दी। उसका दावा था कि यदि वह अपना बचाव नहीं करता तो उसके साथ गंभीर घटना हो सकती थी।

पुलिस अब मौके के वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और दूसरे उपलब्ध सबूतों के आधार पर इस दावे की जांच करेगी। भारद्वाज के आत्मरक्षा के दावे को भी अभी स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।

राहुल गांधी ने निशु को दिया था समर्थन

निशु आजाद ने वीडियो जारी करके लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मदद मांगी थी। इसके बाद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि निशु को घबराने की जरूरत नहीं है और वह उसके साथ हैं।

राहुल गांधी ने दिल्ली पुलिस तथा केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए परिवार को न्याय मिलने तक साथ देने की बात कही थी। उनके बयान के बाद मामला राष्ट्रीय राजनीतिक बहस में आ गया और पुलिस पर कार्रवाई का दबाव बढ़ा।

अब पुलिस किन सवालों के जवाब तलाशेगी?

एक दिन की पुलिस हिरासत के दौरान जांच का केंद्र कई महत्वपूर्ण सवाल हो सकते हैं—

  • जंतर-मंतर पर विवाद की शुरुआत किसने की?
  • संजय कुमार पर हमला किस वस्तु से किया गया?
  • घटना में स्वतंत्र भारद्वाज के साथ और कौन लोग शामिल थे?
  • पॉडकास्ट में चोट और टांकों को लेकर किए गए दावे कितने सही हैं?
  • राजनीतिक संरक्षण की बात किस आधार पर कही गई?
  • निशु को ऑनलाइन धमकियां देने वाले अकाउंट किसके हैं?
  • वायरल वीडियो और मौके के दूसरे फुटेज में क्या समानता है?

पुलिस रिमांड समाप्त होने के बाद स्वतंत्र भारद्वाज को दोबारा अदालत में पेश किया जा सकता है। अदालत आगे की जांच और पुलिस की मांग के आधार पर न्यायिक हिरासत, अतिरिक्त पुलिस रिमांड या अन्य कानूनी राहत पर फैसला करेगी।

फिलहाल स्वतंत्र भारद्वाज आरोपी है और मामले की जांच जारी है। उसके खिलाफ लगे आरोपों का अंतिम निर्णय न्यायालय में साक्ष्यों के आधार पर होगा।

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