ब्रजेश पाठक कौन हैं? 130 वोट की हार से UP के Deputy CM बनने तक का पूरा राजनीतिक सफर
छात्रसंघ अध्यक्ष से लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा और उपमुख्यमंत्री पद तक पहुंचे ब्रजेश पाठक कांग्रेस, बसपा और भाजपा—तीनों दलों में रह चुके हैं।
जानिए उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक की उम्र, शिक्षा, परिवार, छात्र राजनीति, लोकसभा-राज्यसभा कार्यकाल, चुनावी सफर, विभाग और घोषित संपत्ति की पूरी जानकारी।
ब्रजेश पाठक कौन हैं? 130 वोट की हार से UP के Deputy CM बनने तक का पूरा राजनीतिक सफर
लखनऊ। छात्र राजनीति से सार्वजनिक जीवन की शुरुआत करने वाले ब्रजेश पाठक आज उत्तर प्रदेश के सबसे प्रमुख राजनीतिक चेहरों में शामिल हैं। वह भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और 175–लखनऊ कैंट विधानसभा क्षेत्र के विधायक हैं।
उनका राजनीतिक सफर बेहद दिलचस्प रहा है। वर्ष 2002 में वह विधानसभा चुनाव केवल 130 वोट से हार गए थे। इसके बाद 2004 में उन्नाव से लोकसभा पहुंचे, 2008 में राज्यसभा सदस्य बने, 2017 में पहली बार उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव जीता और 2022 में उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया गया।
ब्रजेश पाठक कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी और भारतीय जनता पार्टी—तीनों प्रमुख राजनीतिक दलों से जुड़े रहे हैं। वह संसद के दोनों सदनों में काम कर चुके हैं और उत्तर प्रदेश सरकार में कानून, न्याय, ग्रामीण अभियंत्रण तथा स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विभाग संभाल चुके हैं।
जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि
ब्रजेश पाठक का जन्म 25 जून 1964 को उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के मल्लावां कस्बे में हुआ। उनके पिता का नाम स्वर्गीय सुरेश पाठक और माता का नाम स्वर्गीय कमला पाठक था।
कुछ पुराने समाचारों और ऑनलाइन परिचयों में उनकी जन्मतिथि 25 जून 1954 भी लिखी गई है। हालांकि संसद की आधिकारिक जीवनी में जन्मतिथि 25 जून 1964 दर्ज है। वर्ष 2022 के चुनावी शपथपत्र में उनकी आयु 57 वर्ष लिखी गई थी, जो 1964 की जन्मतिथि से मेल खाती है।
इसलिए 25 जून 1964 को उनकी अधिक विश्वसनीय और दस्तावेज आधारित जन्मतिथि माना जाना चाहिए।
पत्नी और बच्चे
ब्रजेश पाठक की पत्नी का नाम नम्रता पाठक है। संसद के अभिलेख के मुताबिक दोनों का विवाह 8 मार्च 1995 को हुआ था और उनकी दो पुत्रियां हैं।
नम्रता पाठक सामाजिक एवं राजनीतिक गतिविधियों से भी जुड़ी रही हैं। उन्होंने 2012 में बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर उन्नाव विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था। चुनावी शपथपत्र में उन्होंने अपना पेशा समाजसेवा बताया था।
ब्रजेश पाठक के 2022 के शपथपत्र में उनकी पत्नी का पेशा गृहिणी और समाजसेवी दर्ज है।
ब्रजेश पाठक की शिक्षा
ब्रजेश पाठक ने लखनऊ विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की। अलग-अलग आधिकारिक चुनावी और संसदीय अभिलेखों के अनुसार उन्होंने:
- वर्ष 1982 में बीकॉम की पढ़ाई पूरी की।
- वर्ष 1987 में लखनऊ विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री हासिल की।
- संसद की जीवनी में M.A. (I), Composite History का भी उल्लेख मिलता है।
- पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने वकालत को अपना पेशा बनाया।
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनावी शपथपत्र में उनकी शैक्षणिक श्रेणी “Graduate Professional” और योग्यता Bachelor of Law दर्ज की गई है। उसी शपथपत्र में उनका पेशा अधिवक्ता बताया गया है।
लखनऊ विश्वविद्यालय से शुरू हुई राजनीति
ब्रजेश पाठक की राजनीति की शुरुआत किसी बड़े दल से नहीं, बल्कि लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रसंघ से हुई।
वह विश्वविद्यालय में कानून की पढ़ाई के दौरान छात्र राजनीति में सक्रिय हुए। वर्ष 1987 में वह विधि संकाय के प्रतिनिधि बने। इसके बाद 1989 में लखनऊ विश्वविद्यालय छात्रसंघ के उपाध्यक्ष निर्वाचित हुए।
वर्ष 1990 में उन्होंने छात्रसंघ अध्यक्ष का चुनाव जीता। छात्रसंघ की राजनीति ने उन्हें लखनऊ और उत्तर प्रदेश के छात्र एवं युवा वर्ग में पहचान दिलाई। यही अनुभव आगे चलकर उनके मुख्यधारा के राजनीतिक सफर की नींव बना।
कांग्रेस से मुख्यधारा की राजनीति में प्रवेश
छात्र राजनीति के बाद ब्रजेश पाठक कांग्रेस से जुड़े। कांग्रेस ने उन्हें 2002 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में हरदोई जिले की मल्लावां सीट से उम्मीदवार बनाया।
केवल 130 वोट से हारे चुनाव
वर्ष 2002 का मल्लावां विधानसभा चुनाव बेहद करीबी रहा। बहुजन समाज पार्टी के कृष्ण कुमार सिंह उर्फ सतीश वर्मा को 37,220 वोट मिले, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार ब्रजेश पाठक ने 37,090 वोट हासिल किए।
| उम्मीदवार | पार्टी | वोट |
| कृष्ण कुमार सिंह उर्फ सतीश वर्मा | बसपा | 37,220 |
| ब्रजेश पाठक | कांग्रेस | 37,090 |
ब्रजेश पाठक केवल 130 वोटों से चुनाव हार गए। यह उनके राजनीतिक जीवन की पहली बड़ी चुनावी परीक्षा थी।
हालांकि इस हार के केवल दो वर्ष बाद वह लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंच गए।
बसपा में शामिल होकर बदला राजनीतिक सफर
कांग्रेस छोड़ने के बाद ब्रजेश पाठक वर्ष 2004 में बहुजन समाज पार्टी में शामिल हो गए। बसपा ने उन्हें उन्नाव लोकसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया।
यहीं से उनके राजनीतिक करियर ने तेजी से राष्ट्रीय स्तर की ओर कदम बढ़ाया।
2004 में उन्नाव से बने लोकसभा सांसद
वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में ब्रजेश पाठक ने उन्नाव सीट से 1,78,366 वोट हासिल किए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के दीपक कुमार को 17,761 मतों के अंतर से हराया।
| उम्मीदवार | पार्टी | वोट |
| ब्रजेश पाठक | बसपा | 1,78,366 |
| दीपक कुमार | समाजवादी पार्टी | 1,60,605 |
| देवी बख्श सिंह | भाजपा | 94,711 |
| शिवपाल सिंह | कांग्रेस | 83,473 |
इस जीत के साथ ब्रजेश पाठक पहली बार लोकसभा पहुंचे। उन्हें चौदहवीं लोकसभा में बसपा संसदीय दल का उपनेता भी बनाया गया।
लोकसभा की समितियों में जिम्मेदारी
संसद की आधिकारिक जीवनी के मुताबिक लोकसभा सदस्य रहते हुए ब्रजेश पाठक कई संसदीय समितियों से जुड़े। इनमें प्रमुख रूप से शामिल थीं:
- कार्मिक, लोक शिकायत, विधि एवं न्याय संबंधी समिति
- व्यापार सलाहकार समिति
- गृह मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति
- परिसीमन आयोग से संबंधित समिति
- विदेश मामलों की स्थायी समिति
- विशेषाधिकार समिति
- कोयला एवं इस्पात संबंधी समिति
- वित्त संबंधी समिति
- रेलवे संबंधी समिति
- पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति
इन जिम्मेदारियों ने उन्हें कानून, प्रशासन, वित्त, गृह और विदेश नीति जैसे विषयों पर संसदीय अनुभव दिया।
2008 में राज्यसभा पहुंचे
बसपा ने नवंबर 2008 में ब्रजेश पाठक को उत्तर प्रदेश से राज्यसभा भेजा। उनका राज्यसभा कार्यकाल 26 नवंबर 2008 से 25 नवंबर 2014 तक रहा।
इस तरह वह उन चुनिंदा उत्तर प्रदेश नेताओं में शामिल हो गए जिन्हें संसद के दोनों सदनों—लोकसभा और राज्यसभा—में काम करने का अवसर मिला।
बसपा के भीतर उनकी पहचान प्रमुख ब्राह्मण नेताओं में होने लगी। पार्टी की सामाजिक समीकरण आधारित राजनीति और सम्मेलनों में भी वह सक्रिय भूमिका निभाते रहे।
2014 में दोबारा उन्नाव से लोकसभा चुनाव
राज्यसभा कार्यकाल के दौरान उन्होंने 2014 का लोकसभा चुनाव उन्नाव से बसपा उम्मीदवार के रूप में लड़ा। इस चुनाव में उन्हें 2,00,176 वोट मिले और वह तीसरे स्थान पर रहे।
भाजपा के साक्षी महाराज ने 5,18,834 वोट प्राप्त करके चुनाव जीता। समाजवादी पार्टी के अरुण शंकर शुक्ला दूसरे स्थान पर रहे।
अगस्त 2016 में भाजपा में शामिल
लगभग 12 वर्ष तक बसपा में रहने के बाद ब्रजेश पाठक ने अगस्त 2016 में पार्टी छोड़ दी।
22 अगस्त 2016 को वह तत्कालीन भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए।
भाजपा में आने के कुछ महीनों बाद ही उन्हें 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में लखनऊ मध्य से टिकट दे दिया गया।
2017 में पहली बार विधायक बने
वर्ष 2017 में ब्रजेश पाठक ने 174–लखनऊ मध्य विधानसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा।
उन्होंने 78,400 वोट प्राप्त किए, जबकि समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार और तत्कालीन मंत्री रविदास मेहरोत्रा को 73,306 वोट मिले।
| उम्मीदवार | पार्टी | वोट |
| ब्रजेश पाठक | भाजपा | 78,400 |
| रविदास मेहरोत्रा | समाजवादी पार्टी | 73,306 |
ब्रजेश पाठक ने यह चुनाव 5,094 मतों के अंतर से जीता। इस जीत के साथ वह पहली बार उत्तर प्रदेश विधानसभा पहुंचे।
योगी सरकार में कानून मंत्री बने
2017 में विधायक बनने के बाद उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहली सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया।
शुरुआती समय में उन्हें प्रमुख रूप से इन विभागों की जिम्मेदारी मिली:
- विधि एवं न्याय
- विधायी कार्य
- अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत
- राजनीतिक पेंशन
अगस्त 2019 के मंत्रिमंडल विस्तार और विभागीय फेरबदल के बाद उन्हें विधायी, न्याय एवं ग्रामीण अभियंत्रण सेवा जैसे विभागों की जिम्मेदारी दी गई।
कानून मंत्री के रूप में उनके कार्यक्षेत्र में सरकारी मुकदमे, सरकारी अधिवक्ता, न्यायिक ढांचे और विधायी मामलों से संबंधित जिम्मेदारियां शामिल थीं।
2022 में लखनऊ कैंट से उतारा गया
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने ब्रजेश पाठक का विधानसभा क्षेत्र बदल दिया। उन्हें लखनऊ मध्य के बजाय 175–लखनऊ कैंट सीट से उम्मीदवार बनाया गया।
इस सीट पर उनका मुकाबला समाजवादी पार्टी के सुरेंद्र सिंह गांधी उर्फ राजू गांधी से हुआ।
| उम्मीदवार | पार्टी | वोट | मत प्रतिशत |
| ब्रजेश पाठक | भाजपा | 1,08,147 | 54.70% |
| सुरेंद्र सिंह गांधी ‘राजू गांधी’ | समाजवादी पार्टी | 68,635 | 34.71% |
| अनिल पांडेय | बसपा | 10,426 | 5.27% |
| दिलप्रीत सिंह विर्क | कांग्रेस | 6,510 | 3.29% |
ब्रजेश पाठक ने सपा उम्मीदवार को 39,512 वोटों के अंतर से पराजित किया। इसके साथ वह लगातार दूसरी बार उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य बने।
25 मार्च 2022 को बने उपमुख्यमंत्री
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के बाद 25 मार्च 2022 को योगी आदित्यनाथ ने दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
इसी मंत्रिमंडल में ब्रजेश पाठक को उत्तर प्रदेश का उपमुख्यमंत्री बनाया गया। केशव प्रसाद मौर्य के साथ वह राज्य के दो उपमुख्यमंत्रियों में शामिल हुए।
उपमुख्यमंत्री पद के साथ उन्हें स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी दी गई।
उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री कार्यालय की मंत्रिपरिषद सूची के मुताबिक उनके पास:
- चिकित्सा शिक्षा
- चिकित्सा एवं स्वास्थ्य
- परिवार कल्याण
- मातृ एवं शिशु कल्याण
से संबंधित विभाग हैं।
स्वास्थ्य मंत्री के रूप में जिम्मेदारी
स्वास्थ्य मंत्री के रूप में ब्रजेश पाठक राज्य के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों के निरीक्षणों को लेकर चर्चा में रहे हैं। विभिन्न अवसरों पर उन्होंने अस्पतालों का दौरा करके मरीजों और उनके तीमारदारों से बातचीत की।
उनके विभाग के प्रमुख कार्यक्षेत्रों में शामिल हैं:
- सरकारी अस्पतालों में उपचार की उपलब्धता
- डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की नियुक्ति एवं उपस्थिति
- मेडिकल कॉलेजों का विस्तार
- चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता
- दवाओं और जांच सुविधाओं की उपलब्धता
- मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं
- ग्रामीण एवं शहरी स्वास्थ्य केंद्र
- परिवार कल्याण योजनाएं
- अस्पतालों की साफ-सफाई और प्रबंधन
सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की उपलब्धियों का मूल्यांकन करते समय सरकारी दावों के साथ स्वतंत्र स्वास्थ्य आंकड़ों, मरीजों के अनुभव और जमीनी स्थिति को भी देखना आवश्यक है।
ब्रजेश पाठक की राजनीतिक समयरेखा
| वर्ष | राजनीतिक घटनाक्रम |
| 1987 | लखनऊ विश्वविद्यालय में विधि संकाय प्रतिनिधि |
| 1989 | लखनऊ विश्वविद्यालय छात्रसंघ के उपाध्यक्ष |
| 1990 | लखनऊ विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष |
| 2002 | कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में मल्लावां से चुनाव; 130 वोट से हार |
| 2004 | बसपा में शामिल और उन्नाव से लोकसभा सांसद निर्वाचित |
| 2008 | उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य बने |
| 2008–2014 | राज्यसभा सदस्य |
| 2012 | पत्नी नम्रता पाठक ने बसपा से उन्नाव विधानसभा चुनाव लड़ा |
| 2014 | उन्नाव से बसपा उम्मीदवार के रूप में लोकसभा चुनाव लड़ा |
| 22 अगस्त 2016 | बसपा छोड़कर भाजपा में शामिल |
| 2017 | लखनऊ मध्य से पहली बार विधायक बने |
| 2017–2022 | योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री |
| 2022 | लखनऊ कैंट से दूसरी बार विधायक बने |
| 25 मार्च 2022 | उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बने |
| अगस्त 2026 तक | उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य संबंधी विभागों के मंत्री |
ब्रजेश पाठक की घोषित संपत्ति
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में दाखिल स्वघोषित शपथपत्र के अनुसार ब्रजेश पाठक और उनके परिवार की कुल घोषित संपत्ति ₹10,03,83,962 थी।
शपथपत्र में किसी प्रकार की देनदारी घोषित नहीं की गई थी।
| विवरण | 2022 में घोषित जानकारी |
| कुल संपत्ति | ₹10,03,83,962 |
| कुल देनदारी | शून्य |
| पेशा | अधिवक्ता |
| पत्नी का पेशा | गृहिणी एवं समाजसेवी |
| शैक्षणिक श्रेणी | Graduate Professional |
| घोषित योग्यता | एलएलबी |
| घोषित आपराधिक मामले | शून्य |
इन आंकड़ों में उम्मीदवार, पत्नी और आश्रित सदस्यों की घोषित चल एवं अचल संपत्ति शामिल हो सकती है। ये 2022 के चुनाव के समय उम्मीदवार द्वारा दिए गए स्वघोषित आंकड़े हैं। इन्हें 2026 की वर्तमान संपत्ति या वर्तमान बाजार मूल्य नहीं माना जाना चाहिए।
क्या ब्रजेश पाठक पर आपराधिक मामले हैं?
ब्रजेश पाठक ने 2022 के नवीनतम उपलब्ध विधानसभा चुनावी शपथपत्र में कोई लंबित आपराधिक मामला घोषित नहीं किया था।
हालांकि पुराने चुनावी शपथपत्रों में मामलों का उल्लेख मिलता है। वर्ष 2004 के लोकसभा शपथपत्र में चार, 2014 में एक और 2017 के विधानसभा शपथपत्र में एक मामला दर्ज था।
इसका अर्थ यह नहीं है कि पुराने मामले 2026 में भी लंबित हैं। नवीनतम उपलब्ध 2022 के शपथपत्र में घोषित मामलों की संख्या शून्य है।
इसलिए वेबसाइट पर सबसे सटीक वाक्य होगा:
“ब्रजेश पाठक ने 2022 के विधानसभा चुनावी शपथपत्र में कोई लंबित आपराधिक मामला घोषित नहीं किया था।”
तीन दलों से जुड़ा रहा राजनीतिक सफर
ब्रजेश पाठक के राजनीतिक जीवन की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि वह तीन बड़े राजनीतिक दलों से जुड़े रहे:
- कांग्रेस से उन्होंने 2002 का विधानसभा चुनाव लड़ा।
- बसपा के टिकट पर लोकसभा जीते और राज्यसभा पहुंचे।
- भाजपा में शामिल होने के बाद दो बार विधायक, कैबिनेट मंत्री और उपमुख्यमंत्री बने।
उनके राजनीतिक सफर में पार्टी परिवर्तन के साथ लगातार बढ़ती जिम्मेदारियां दिखाई देती हैं। भाजपा में शामिल होने के लगभग छह वर्ष के भीतर वह राज्य के उपमुख्यमंत्री पद तक पहुंच गए।
ब्रजेश पाठक की राजनीतिक पहचान
ब्रजेश पाठक की पहचान छात्र राजनीति से निकले, कानून की पढ़ाई करने वाले और संसदीय तथा राज्य स्तर पर लंबा अनुभव रखने वाले नेता के रूप में बनी है।
उनके राजनीतिक करियर की प्रमुख विशेषताएं हैं:
- लखनऊ विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति से शुरुआत
- वकालत और कानून की शैक्षणिक पृष्ठभूमि
- केवल 130 वोट से विधानसभा चुनाव की हार
- लोकसभा और राज्यसभा दोनों का अनुभव
- उत्तर प्रदेश विधानसभा में लगातार दो जीत
- कानून और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी
- बसपा से भाजपा में आने के बाद तेजी से बढ़ता राजनीतिक कद
- लखनऊ की शहरी राजनीति में सक्रिय उपस्थिति
निष्कर्ष
ब्रजेश पाठक का राजनीतिक सफर छात्रसंघ के प्रतिनिधि से शुरू होकर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पद तक पहुंचा है। इस दौरान उन्होंने चुनावी हार, पार्टी परिवर्तन, लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा और राज्य मंत्रिमंडल—सभी स्तरों पर राजनीति का अनुभव प्राप्त किया।
वर्ष 2002 में केवल 130 वोटों से चुनाव हारने के दो साल बाद वह लोकसभा सांसद बने। बसपा में रहते हुए राज्यसभा पहुंचे और भाजपा में शामिल होने के बाद लगातार दो विधानसभा चुनाव जीते। वर्ष 2022 में लखनऊ कैंट से 39,512 वोट की जीत के बाद उन्हें उत्तर प्रदेश का उपमुख्यमंत्री बनाया गया।
उनकी राजनीतिक यात्रा संघर्ष, संगठनात्मक अनुकूलन और लगातार बढ़ती प्रशासनिक जिम्मेदारियों की कहानी है। अगस्त 2026 तक वह लखनऊ कैंट से भाजपा विधायक, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और राज्य के स्वास्थ्य संबंधी प्रमुख विभागों के मंत्री हैं।
