मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली और मुंबई में विरोध तेज हो गया है। दिल्ली में AAP नेता सौरभ भारद्वाज समेत कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। धारा 163 लागू करने के साथ 11 मेट्रो स्टेशनों पर एंट्री-एग्जिट बंद किया गया, जबकि मुंबई में CJP ने ‘जेल भरो आंदोलन’ का ऐलान किया है।
अल्टीमेटम से सड़क तक पहुंची CEC को हटाने की लड़ाई—दिल्ली में हिरासत और कड़े प्रतिबंध, मुंबई में CJP की शक्ति परीक्षा
CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया, जबकि मुंबई में CJP ने आंदोलन बुलाया है।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राष्ट्रीय डेस्क | 2 अक्टूबर 2026
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के विरोध में शुक्रवार, 2 अक्टूबर को दिल्ली और मुंबई में सियासी हलचल तेज हो गई। दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए पहुंचे AAP के प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज समेत कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
प्रस्तावित प्रदर्शन को पुलिस की अनुमति नहीं मिलने के बाद नई दिल्ली जिले में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। जंतर-मंतर के आसपास बैरिकेडिंग की गई और पुलिस के साथ केंद्रीय सुरक्षा बलों को तैनात किया गया।
खबर में खास
सौरभ भारद्वाज समेत कई प्रदर्शनकारी दिल्ली में हिरासत में
नई दिल्ली जिले में BNSS की धारा 163 लागू
11 मेट्रो स्टेशनों पर एंट्री और एग्जिट अस्थायी रूप से बंद
मुंबई में CJP ने ‘जेल भरो आंदोलन’ का आह्वान किया
CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR वापस लेने की मांग
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की नहीं मिली अनुमति
दिल्ली में प्रदर्शन का आह्वान छात्र संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्षी नेताओं ने किया था। AISA, राज्यसभा सांसद मनोज झा और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण समेत कई लोगों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर सवाल उठाए हैं। AAP नेताओं ने भी लोगों से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की थी।
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी। नई दिल्ली जिले में BNSS की धारा 163 लागू करते हुए बिना लिखित अनुमति पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने, जुलूस निकालने, धरना देने और नारेबाजी करने पर प्रतिबंध लगाया गया।
सौरभ भारद्वाज समेत कई नेता हिरासत में
पाबंदियों के बावजूद जंतर-मंतर की तरफ बढ़ रहे AAP नेता सौरभ भारद्वाज और पार्टी के कई कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों को बसों में बैठाकर प्रदर्शन स्थल से हटाया।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध उनका लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के आरोपों पर जवाब और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग दोहराई।
11 मेट्रो स्टेशनों पर एंट्री-एग्जिट बंद
सुरक्षा व्यवस्था के तहत दिल्ली मेट्रो के 11 स्टेशनों पर प्रवेश और निकास अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। हालांकि राजीव चौक, मंडी हाउस, INA, नई दिल्ली और केंद्रीय सचिवालय जैसे प्रमुख स्टेशनों पर इंटरचेंज की सुविधा जारी रखी गई।
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने जंतर-मंतर रोड, संसद मार्ग, टॉल्स्टॉय मार्ग, कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों से बचने की सलाह दी। कई सड़कों पर ट्रैफिक डायवर्जन भी लागू किए गए।
मुंबई में CJP का ‘जेल भरो आंदोलन’
मुंबई में कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने शिवाजी पार्क के गेट नंबर छह पर शाम चार बजे प्रदर्शन का आह्वान किया है। मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क को साइलेंस जोन और बॉम्बे हाई कोर्ट के पुराने आदेश का हवाला देते हुए प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी।
अनुमति नहीं मिलने के बाद CJP ने ‘जेल भरो आंदोलन’ शुरू करने का ऐलान किया। दीपके का कहना है कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रखा जाएगा और आने वाले दिनों में इसे दूसरे शहरों तक पहुंचाया जाएगा।
CJP और प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें
CJP ने SIR वापस लेने, 2025 की मतदाता सूची को आधार बनाने, प्रभावित योग्य मतदाताओं के नाम बहाल करने और चुनावी प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराने की मांग रखी है।
अभिजीत दीपके ने दावा किया है कि SIR के दौरान करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए। हालांकि इस आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में जानबूझकर गड़बड़ी करने के आरोपों को खारिज किया है।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
चुनाव आयोग का कहना है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची से मृत, डुप्लीकेट और अयोग्य नामों को हटाकर सूची को सही बनाना है। आयोग ने चुनावी प्रक्रिया में पक्षपात और अनियमितता के आरोपों से भी इनकार किया है।
आयोग के मुताबिक, योग्य मतदाताओं को अपना नाम जुड़वाने, नोटिस का जवाब देने और नाम हटने की स्थिति में अपील करने की सुविधा दी गई है। दूसरी ओर, विपक्ष और प्रदर्शनकारी इस प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध अब प्रेस कॉन्फ्रेंस और अल्टीमेटम से आगे बढ़कर सड़क पर पहुंच चुका है। दिल्ली की हिरासत और पाबंदियों के बाद अब नजर मुंबई के ‘जेल भरो आंदोलन’ पर है। यह प्रदर्शन कितना बड़ा रूप लेता है और चुनाव आयोग क्या जवाब देता है—इसी से SIR विवाद की अगली राजनीतिक दिशा तय होगी।