RSS में महिलाओं को लेकर राहुल गांधी का बड़ा आरोप, BJP ने पूछा—कांग्रेस में कितनी महिला CM? छिड़ी सियासी जंग

राहुल गांधी ने RSS को पुरुष प्रधान और संविधान विरोधी बताते हुए महिलाओं के प्रति उसकी सोच पर सवाल उठाए। जवाब में भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के महिला नेतृत्व और 33 प्रतिशत आरक्षण पर उसका रुख पूछा।

राहुल गांधी के RSS पर दिए बयान से सियासी विवाद तेज हो गया है। भाजपा ने कांग्रेस के महिला नेतृत्व और आरक्षण पर पलटवार किया। जानिए क्या कहा राहुल गांधी ने और RSS में महिलाओं की भूमिका को लेकर वास्तविक व्यवस्था क्या है।

खबर में खास

  • राहुल गांधी ने RSS पर महिलाओं को लेकर गंभीर वैचारिक आरोप लगाए।
  • भाजपा प्रवक्ता सीआर केशवन और विधायक राम कदम ने तीखा पलटवार किया।

  • तेलंगाना BJP अध्यक्ष ने कांग्रेस से महिला मुख्यमंत्रियों की संख्या पर सवाल पूछा।

  • RSS और राष्ट्र सेविका समिति की अलग संगठनात्मक संरचना भी चर्चा में आई।
    rahul-gandhi-rss-bjp-women-row-21-oct-2026-og.jpg
    महिलाओं की भूमिका को लेकर राहुल गांधी और भाजपा के बीच जुबानी जंग तेज। (AI सांकेतिक ग्राफिक)
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली | 21 अक्टूबर 2026
देश की राजनीति में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और कांग्रेस के बीच एक बार फिर वैचारिक टकराव तेज हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने संघ पर महिलाओं के प्रति भेदभावपूर्ण सोच रखने का आरोप लगाया है। इसके जवाब में भारतीय जनता पार्टी ने बुधवार को राहुल गांधी और कांग्रेस पर पलटवार करते हुए सवाल उठाया कि महिला सशक्तिकरण की बात करने वाली कांग्रेस ने अपने संगठन और सरकारों में महिलाओं को कितना नेतृत्व दिया है।
20 अक्टूबर को राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर RSS को लेकर तीखी टिप्पणी की थी। अब भाजपा के कई नेताओं की प्रतिक्रिया के बाद यह विवाद महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और आरक्षण तक पहुँच गया है।
राहुल गांधी ने RSS पर क्या आरोप लगाए?
राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में RSS को केवल पुरुषों का संगठन और संविधान विरोधी विचारधारा वाला समूह बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि संघ की सोच में महिलाओं को पुरुषों के अधीन देखा जाता है।
राहुल ने अपने बयान में शिव-शक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि वह इसी विचार में विश्वास रखते हैं और संघ की विचारधारा के खिलाफ राजनीतिक संघर्ष जारी रखेंगे।
उन्होंने यह दावा भी किया कि संघ की विचारधारा से जुड़ी कई महिलाएँ उनके पक्ष में हैं। हालांकि उन्होंने अपने इस दावे के समर्थन में किसी महिला पदाधिकारी का नाम सार्वजनिक नहीं किया।
BJP का पलटवार—कांग्रेस में कितनी महिलाओं को नेतृत्व मिला?
राहुल के बयान पर भाजपा विधायक राम कदम ने कहा कि कांग्रेस नेता को RSS की कार्यप्रणाली की जानकारी लेकर ही टिप्पणी करनी चाहिए।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सीआर केशवन ने राहुल गांधी पर महिला सम्मान के मुद्दे पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कांग्रेस के सत्ता में रहने के दौरान महिला आरक्षण कानून पारित न होने का मुद्दा भी उठाया।
वहीं तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष एन. रामचंदर राव ने सवाल किया कि कांग्रेस की सरकारों में कितनी महिला मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने राहुल गांधी से परिसीमन के साथ 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करने के प्रस्ताव पर कांग्रेस का रुख स्पष्ट करने को कहा।
ये भाजपा नेताओं के राजनीतिक आरोप और सवाल हैं। इन्हें कांग्रेस के खिलाफ किसी स्वतंत्र जांच का निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।
RSS में महिलाओं की सदस्यता को लेकर वास्तविक व्यवस्था क्या है?
इस विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू RSS और राष्ट्र सेविका समिति के बीच अंतर है।
RSS की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, उसकी पारंपरिक स्वयंसेवक सदस्यता पुरुषों के लिए है। महिलाओं के लिए 1936 में लक्ष्मीबाई केलकर ने राष्ट्र सेविका समिति की स्थापना की थी।
राष्ट्र सेविका समिति संघ की विचारधारा से प्रेरित है, लेकिन संगठनात्मक रूप से स्वतंत्र संस्था है। इसमें महिलाएँ अपनी शाखाएँ, प्रशिक्षण और सामाजिक गतिविधियाँ संचालित करती हैं।
RSS की वेबसाइट भी समिति को स्वतंत्र रूप से कार्य करने वाला संगठन बताती है। इसलिए राष्ट्र सेविका समिति को RSS के भीतर महिलाओं की औपचारिक सदस्यता के समान समझना सही नहीं होगा।
महिला आरक्षण पर क्यों पहुँची बहस?
राहुल गांधी ने संघ की विचारधारा को चुनौती दी, जबकि भाजपा ने कांग्रेस से महिला आरक्षण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर सवाल पूछे।
दरअसल, महिला सशक्तिकरण की चर्चा में दो अलग-अलग पहलू हैं। पहला, किसी संगठन में महिलाओं की औपचारिक सदस्यता और नेतृत्व का अवसर। दूसरा, राजनीतिक दलों में महिला उम्मीदवारों, विधायकों और निर्णय लेने वाले पदों पर महिलाओं की वास्तविक भागीदारी।
इसी कारण यह विवाद सिर्फ RSS या कांग्रेस तक सीमित नहीं है। इससे यह सवाल भी सामने आता है कि देश के राजनीतिक दल और वैचारिक संगठन महिलाओं को कितनी निर्णायक जिम्मेदारियाँ देते हैं।

क्या यह विवाद आगे भी बढ़ेगा?

2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव सहित आगामी चुनावों से पहले भाजपा और कांग्रेस के बीच वैचारिक मुद्दों पर टकराव बढ़ रहा है।
राहुल गांधी लंबे समय से RSS की विचारधारा के आलोचक रहे हैं, जबकि भाजपा नेतृत्व उनके आरोपों का राजनीतिक जवाब देता रहा है।
फिलहाल इस नए विवाद में भाजपा के कई नेताओं का जवाब सामने आया है। राहुल के ताजा बयान पर RSS नेतृत्व की ओर से कोई अलग विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया इन रिपोर्टों में दर्ज नहीं थी।
अब देखना होगा कि कांग्रेस महिला प्रतिनिधित्व को लेकर उठाए गए भाजपा के सवालों का क्या जवाब देती है।
प्रत्यक्षदर्शी का सवाल: महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण की राजनीति में ज्यादा महत्वपूर्ण क्या है—नेताओं के बयान या संगठनों में महिलाओं की वास्तविक भागीदारी?

About The Author

Advertisement

LatestNews

UP Election 2027: 11 साल बाद BJP से कुशाग्र सागर का इस्तीफा! सपा विधायक की बढ़ती नजदीकियों के बीच बदायूं में सियासी हलचल
Andhra Pradesh Election: जगन रेड्डी की पार्टी को सुप्रीम कोर्ट से राहत! उम्मीदवारों पर हमले के आरोप, चुनाव आयोग को 24 घंटे में फैसला लेने का निर्देश
UP Police News: CM योगी का बड़ा ऐलान! पुलिसकर्मियों के 3 भत्ते बढ़े, ₹700 की जगह मिलेंगे ₹1,000; जानिए किसे कितना फायदा
PM-DAKSH योजना पर कांग्रेस का बड़ा हमला: ₹130 करोड़ का बजट घटकर ₹20 करोड़ कैसे हुआ? जयराम रमेश ने मोदी सरकार से पूछा सवाल
राहुल गांधी की विदेश यात्रा पर BJP का बड़ा सवाल, 'सत्ता परिवर्तन' के बयान से मचा घमासान; कांग्रेस ने किया पलटवार
Supreme Court: ED को सुप्रीम कोर्ट की नसीहत, पिनराई विजयन को 7 दिन की राहत; भ्रष्टाचार केस में FIR फिर भी बरकरार
UP Election 2027: 30 अक्टूबर को लखनऊ आ सकते हैं अमित शाह! CM योगी संग बनेगा BJP का चुनावी प्लान, बूथ तक बड़ी तैयारी