11 छात्राओं के यौन उत्पीड़न के आरोप, कांग्रेस सांसद को दो अदालतों से राहत! JNU से बर्खास्तगी पर रोक, अब गिरफ्तारी से भी संरक्षण

मणिपुर से कांग्रेस सांसद बिमोल अकोइजम पर गंभीर आरोपों के बाद JNU ने नौकरी से हटाया था; हाईकोर्ट ने आदेश रोका, दिल्ली की विशेष अदालत ने 5 नवंबर तक गिरफ्तारी से संरक्षण दिया

JNU Sexual Harassment Case: 11 छात्राओं की शिकायतों के बाद बर्खास्त कांग्रेस सांसद बिमोल अकोइजम को हाईकोर्ट से राहत मिली। आज दिल्ली की अदालत ने 5 नवंबर तक गिरफ्तारी से संरक्षण दिया। जानिए आरोप और अदालतों के फैसले।

11 छात्राओं के यौन उत्पीड़न के आरोप, कांग्रेस सांसद को दो अदालतों से राहत! JNU से बर्खास्तगी पर रोक, अब गिरफ्तारी से भी संरक्षण

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JNU छात्राओं की शिकायतों से जुड़े मामले में कांग्रेस सांसद बिमोल अकोइजम को अदालत से अंतरिम राहत मिली है।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली | 3 नवंबर 2026

खबर में खास

  • JNU की कम से कम 11 छात्राओं ने कांग्रेस सांसद और प्रोफेसर बिमोल अकोइजम पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए।
  • विश्वविद्यालय की आंतरिक जांच के बाद 9 अक्टूबर को उन्हें नौकरी से बर्खास्त किया गया था।
  • 2 नवंबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी के आदेश पर अंतरिम रोक लगाई।
  • 3 नवंबर को विशेष अदालत ने 5 नवंबर तक उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई रोक दी।
  • सांसद ने आरोपों से इनकार किया है; आपराधिक मामले की जांच जारी है।
नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) की कम से कम 11 छात्राओं द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों का सामना कर रहे कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम को लगातार दो दिनों में दो अलग-अलग अदालतों से अंतरिम राहत मिली है।
सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय से उनकी बर्खास्तगी पर रोक लगाई। इसके अगले दिन मंगलवार, 3 नवंबर को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने निर्देश दिया कि 5 नवंबर तक उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी।
लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि इन आदेशों से यौन उत्पीड़न के आरोप समाप्त नहीं हुए हैं और न ही सांसद को निर्दोष घोषित किया गया है।

आखिर 11 छात्राओं ने क्या शिकायत की थी?

अकोइजम JNU के स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज में प्रोफेसर रहे हैं। मई 2026 में कम से कम 11 छात्राओं ने उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायतें दर्ज कराई थीं।
शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि प्रोफेसर उन्हें बैठकों और अन्य कार्यक्रमों के बहाने विश्वविद्यालय परिसर स्थित आवास पर बुलाते थे और अनुचित व्यवहार करते थे।
कुछ छात्राओं ने कक्षाओं में आपत्तिजनक टिप्पणियां करने के आरोप भी लगाए।
विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति ने शिकायतों, गवाहों और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच की।

JNU ने कांग्रेस सांसद को नौकरी से क्यों निकाला?

आंतरिक समिति की रिपोर्ट के आधार पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने 9 अक्टूबर को अकोइजम को सेवा से बर्खास्त कर दिया।
JNU के आदेश में कहा गया था कि जांच और उपलब्ध तथ्यों पर विचार करने के बाद अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई।
इसके बाद 11 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने विश्वविद्यालय के मुख्य सुरक्षा अधिकारी की शिकायत पर FIR दर्ज की।
अकोइजम ने सभी आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने विश्वविद्यालय की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया।

हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी पर क्यों लगाई रोक?

अकोइजम ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपनी बर्खास्तगी को चुनौती दी।
उनके वकील ने तर्क दिया कि विश्वविद्यालय ने नौकरी से हटाने से पहले उन्हें उचित नोटिस और अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया।
सोमवार, 2 नवंबर को न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी ने बर्खास्तगी के आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए JNU से जवाब मांगा।
इस मामले की अगली सुनवाई जनवरी 2027 में निर्धारित है।

आज दूसरी अदालत से क्या राहत मिली?

मंगलवार को राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश दिग्विनय सिंह ने सांसद की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई की।
अदालत ने दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा और जांच अधिकारी को 5 नवंबर को केस फाइल के साथ उपस्थित रहने का निर्देश दिया।
साथ ही अगली सुनवाई तक अकोइजम के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया।
उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है।

BJP और कांग्रेस की राजनीति में क्यों उठा मामला?

बिमोल अकोइजम मणिपुर की इनर मणिपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस सांसद हैं।
अक्टूबर में BJP महिला मोर्चा ने उनके खिलाफ प्रदर्शन किया था। BJP सांसद बांसुरी स्वराज ने भी कांग्रेस नेतृत्व से इस प्रकरण पर जवाब मांगा था।
हालांकि, राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप से अलग मामले में निष्पक्ष जांच और शिकायतकर्ताओं तथा आरोपी, दोनों के कानूनी अधिकार महत्वपूर्ण हैं।

क्या दो अदालतों से राहत मिलने का मतलब आरोप गलत थे?

नहीं। हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय के बर्खास्तगी आदेश पर अंतरिम रोक लगाई है, जबकि विशेष अदालत ने गिरफ्तारी सहित दंडात्मक कार्रवाई से अस्थायी संरक्षण दिया है।
इन आदेशों का अर्थ आरोपों की सत्यता पर अंतिम निर्णय नहीं है।
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि 5 नवंबर को पुलिस अदालत में क्या तथ्य रखेगी और जांच में 11 छात्राओं की शिकायतों पर आगे क्या निष्कर्ष सामने आएंगे?

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