चिराग-नीतीश को UP में लाए तो 'दूसरा रास्ता'! BJP के सहयोगी राजभर की चेतावनी, स्वामी प्रसाद मौर्य को NDA में आने का न्योता

बलिया में अरविंद राजभर ने बिहार के NDA सहयोगियों की यूपी में एंट्री का किया विरोध; डुमरियागंज और शोहरतगढ़ से दो मुस्लिम उम्मीदवारों के नाम बताए, स्वामी प्रसाद के लिए खोले दरवाजे

UP Politics: ओपी राजभर के बेटे अरविंद राजभर ने चेतावनी दी कि JDU और LJP को यूपी NDA में शामिल किया गया तो सुभासपा दूसरा विकल्प तलाशेगी। साथ ही दो उम्मीदवारों के नाम बताए और स्वामी प्रसाद मौर्य को न्योता दिया।

चिराग-नीतीश को UP में लाए तो 'दूसरा रास्ता'! BJP के सहयोगी राजभर की चेतावनी, स्वामी प्रसाद मौर्य को NDA में आने का न्योता

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बलिया में सुभासपा नेता अरविंद राजभर ने बिहार के NDA सहयोगी दलों की यूपी में संभावित भागीदारी का विरोध किया।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | बलिया/लखनऊ | 3 नवंबर 2026

खबर में खास

  • सुभासपा नेता अरविंद राजभर ने JDU और LJP को यूपी NDA में शामिल करने का विरोध किया।
  • चेतावनी दी कि ऐसा हुआ तो उनकी पार्टी दूसरा राजनीतिक विकल्प तलाशेगी।
  • बिहार में सुभासपा को NDA में जगह नहीं मिलने का मुद्दा उठाया।
  • डुमरियागंज और शोहरतगढ़ के लिए दो मुस्लिम नेताओं के नाम बताए।
  • स्वामी प्रसाद मौर्य को सुभासपा और NDA में शामिल होने का न्योता दिया।
लखनऊ/बलिया। उत्तर प्रदेश में भाजपा के नेतृत्व वाले NDA के भीतर सहयोगी दलों की हिस्सेदारी को लेकर नई राजनीतिक खींचतान सामने आई है। योगी सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर के बेटे और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय प्रमुख महासचिव अरविंद राजभर ने नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड (JDU) तथा चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को लेकर खुली आपत्ति जताई है।
बलिया में आयोजित युवा सम्मेलन में अरविंद राजभर ने कहा कि बिहार के सहयोगी दलों को उत्तर प्रदेश के NDA में शामिल किया गया तो सुभासपा अपने लिए दूसरा राजनीतिक रास्ता तलाशने पर विचार करेगी।

BJP के सहयोगी ने क्यों दी चेतावनी?

अरविंद राजभर ने अपने बयान के पीछे बिहार में हुए पुराने गठबंधन विवाद का हवाला दिया।
उनका कहना है कि बिहार में जब सुभासपा ने NDA के साथ चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी, तब उसे गठबंधन में जगह नहीं दी गई। अब बिहार के दल उत्तर प्रदेश में NDA के साथ चुनाव लड़ना चाहते हैं।
राजभर ने इसी आधार पर सवाल उठाया कि गठबंधन के अलग-अलग राज्यों में सहयोगी दलों के साथ अलग व्यवहार क्यों होना चाहिए।
हालांकि, इस बयान का अर्थ यह नहीं है कि सुभासपा ने NDA छोड़ दिया है। फिलहाल यह गठबंधन की संभावित सीट साझेदारी को लेकर दी गई राजनीतिक चेतावनी है।

नीतीश और चिराग की पार्टियां यूपी में क्या चाहती हैं?

जनता दल यूनाइटेड और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) उत्तर प्रदेश में अपने संगठन का विस्तार कर रही हैं।
JDU ने पूर्वांचल के कई जिलों में गतिविधियां बढ़ाई हैं। नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार हाल में वाराणसी के एक कार्यकर्ता सम्मेलन में शामिल हुए थे।
वहीं चिराग पासवान की पार्टी भी उत्तर प्रदेश की विधानसभा सीटों पर संगठनात्मक तैयारी कर रही है।
दोनों दल भाजपा के सहयोगी हैं, लेकिन यूपी में सीटों के बंटवारे पर कोई अंतिम समझौता सार्वजनिक नहीं हुआ है।

स्वामी प्रसाद मौर्य को NDA में आने का न्योता

अरविंद राजभर ने इस बीच पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य को भी अपनी पार्टी में आने का निमंत्रण दिया।
उन्होंने कहा कि स्वामी प्रसाद अनुभवी नेता हैं और यदि वह सुभासपा के साथ आना चाहते हैं तो उनका स्वागत किया जाएगा।
राजभर ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर स्वामी प्रसाद को NDA में शामिल कराने के लिए भाजपा नेतृत्व से बातचीत की जा सकती है।
यह बयान ऐसे समय आया है, जब स्वामी प्रसाद मौर्य और अखिलेश यादव के बीच राजनीतिक मतभेद तथा कांग्रेस नेताओं के साथ मौर्य की मुलाकात चर्चा में है।

दो मुस्लिम उम्मीदवारों के नाम भी सामने आए

बलिया के कार्यक्रम में अरविंद राजभर ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए दो मुस्लिम नेताओं के नाम भी बताए।
उन्होंने डुमरियागंज और शोहरतगढ़ विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ से जुड़े आफताब आलम और खुर्शीद आलम को चुनाव लड़ाने की बात कही।
हालांकि, गठबंधन की सीट साझेदारी और अंतिम उम्मीदवार सूची की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।

क्या यूपी में NDA के भीतर नया विवाद शुरू हो गया?

बयान से स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश में गठबंधन की सीट साझेदारी पर सहयोगी दलों के हित अलग-अलग हो सकते हैं।
एक तरफ बिहार के NDA सहयोगी उत्तर प्रदेश में हिस्सेदारी चाहते हैं, दूसरी तरफ सुभासपा ने उनके प्रवेश का विरोध किया है।
फिलहाल भाजपा, JDU और LJP के शीर्ष नेतृत्व की ओर से इस नई चेतावनी पर कोई अंतिम गठबंधन निर्णय सामने नहीं आया है।
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या भाजपा अपने सभी सहयोगियों की मांगों में सहमति बना पाएगी, या सीटों का बंटवारा तय होने से पहले ही सहयोगी दलों के बीच मतभेद और खुलकर सामने आएंगे?

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