दिल्ली में इंसाफ मांगने सड़क पर उतरी पुलिस, नेतृत्व करने वाला ACP सस्पेंड! 500 पुलिसकर्मियों के प्रदर्शन के बाद अब हाईकोर्ट तक पहुंचा विवाद

शाहदरा थाने में वकील से मारपीट के आरोप से शुरू हुआ विवाद; दो अफसरों का तबादला, पुलिसकर्मियों की पांच मांगें और अब हाईकोर्ट में वकीलों की नई पहल

Delhi Police Protest: दिल्ली पुलिस मुख्यालय पर प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले ACP मनस्वी वशिष्ठ को निलंबित कर दिया गया। पुलिसकर्मियों ने सुरक्षा और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की थी। अब वकीलों ने भी हाईकोर्ट का रुख किया है।

दिल्ली में इंसाफ मांगने सड़क पर उतरी पुलिस, नेतृत्व करने वाला ACP सस्पेंड! वकील भी हाईकोर्ट पहुंचे, जानिए पूरा विवाद

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली | 3 नवंबर 2026
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दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करने वाले पुलिसकर्मियों की सुरक्षा और तबादलों को लेकर विवाद बढ़ा।

खबर में खास

  • दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर सोमवार को बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शन किया।
  • प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले ACP मनस्वी वशिष्ठ मंगलवार को निलंबित कर दिए गए।
  • विवाद की शुरुआत शाहदरा थाने में एक वकील के घायल होने और पुलिस से टकराव के बाद हुई।
  • पुलिसकर्मियों ने सुरक्षा, निष्पक्ष जांच और शिकायत निवारण व्यवस्था की मांग उठाई।
  • वकीलों ने हाईकोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने को कहा, लेकिन अदालत ने औपचारिक याचिका दाखिल करने को कहा।
नई दिल्ली। देश की राजधानी में एक असामान्य घटनाक्रम सामने आया है। आम जनता की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाने वाली दिल्ली पुलिस के कर्मचारी अपनी ही सुरक्षा तथा विभागीय कार्रवाई के खिलाफ पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करने पहुंचे। लेकिन इस प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (ACP) मनस्वी वशिष्ठ को मंगलवार, 3 नवंबर को निलंबित कर दिया गया।
मामला यहीं नहीं रुका। मंगलवार दोपहर वकीलों का एक समूह भी दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा और ACP के आचरण पर अदालत से स्वतः संज्ञान लेने की मांग की।

आखिर पुलिसकर्मियों को प्रदर्शन क्यों करना पड़ा?

विवाद की शुरुआत 23 अक्टूबर को शाहदरा पुलिस स्टेशन में हुई एक घटना से हुई। उस दौरान वकील ललित बंसल को कथित हाथापाई में सिर पर गंभीर चोट लगी थी।
वकीलों ने संबंधित पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग करते हुए अदालतों में हड़ताल शुरू की।
इसके बाद 28 अक्टूबर को ACP मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा थाने के तत्कालीन SHO अरुण कुमार का तबादला कर दिया गया। तबादलों के बाद वकीलों ने अपनी हड़ताल वापस ले ली, लेकिन पुलिसकर्मियों के एक वर्ग में नाराजगी फैल गई।

500 पुलिसकर्मी पहुंचे, अधिकारियों के सामने रखीं मांगें

सोमवार, 2 नवंबर को पुलिसकर्मी जय सिंह रोड स्थित दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर एकत्र हुए।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शन की शुरुआत अपेक्षाकृत कम लोगों से हुई और बाद में लगभग 500 कर्मचारी वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई बैठक में शामिल हुए।
पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार और अन्य अधिकारियों के सामने कर्मचारियों ने पांच प्रमुख मांगें रखीं।
इनमें वकीलों से विवाद की स्थिति में स्पष्ट नियम बनाने, पुलिसकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और शिकायत निवारण समिति गठित करने जैसी मांगें शामिल थीं।

पुलिसकर्मियों की सबसे बड़ी मांग क्या थी?

प्रदर्शन में शामिल पुलिसकर्मियों का कहना था कि अदालत परिसर और थानों में विवाद होने पर उनकी सुरक्षा के लिए स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए।
उन्होंने वकीलों के खिलाफ दर्ज FIR बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के वापस नहीं लेने तथा अदालतों में पुलिसकर्मियों की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की।
दूसरी तरफ, वकीलों का आरोप है कि शाहदरा थाने में कार्रवाई की मांग करने पहुंचे अधिवक्ताओं के साथ दुर्व्यवहार और धमकी दी गई थी।
दोनों पक्षों के आरोपों की स्वतंत्र जांच और उपलब्ध साक्ष्यों का मूल्यांकन आवश्यक है।

प्रदर्शन के अगले दिन ACP निलंबित

मंगलवार को ACP मनस्वी वशिष्ठ के निलंबन की खबर सामने आई।
दैनिक जागरण ने गृह मंत्रालय के स्तर पर कार्रवाई की रिपोर्ट दी है, हालांकि उसने यह भी लिखा कि इसकी आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं थी।
ACP के निलंबन के कारणों और विभागीय प्रक्रिया का पूरा विवरण सार्वजनिक होने पर ही कार्रवाई के सभी आधार स्पष्ट होंगे।

हाईकोर्ट में वकीलों ने क्या मांग रखी?

मंगलवार दोपहर वकीलों ने दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष ACP के कथित बयानों और आचरण का मुद्दा उठाया।
उन्होंने अदालत से स्वतः संज्ञान लेने का आग्रह किया। लेकिन कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव साम्ब्रे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की पीठ ने इस तरह संज्ञान लेने से इनकार करते हुए वकीलों से संबंधित साक्ष्यों के साथ विधिवत याचिका दाखिल करने को कहा।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि हाईकोर्ट ने ACP को दोषी ठहरा दिया है।

अब दिल्ली पुलिस के सामने क्या सवाल है?

पूरे घटनाक्रम ने पुलिसकर्मियों की कार्यस्थल सुरक्षा, विभागीय अनुशासन और वकीलों की शिकायतों की निष्पक्ष जांच से जुड़े सवाल सामने रखे हैं।
पुलिसकर्मियों को सुरक्षा और शिकायत निवारण व्यवस्था की जरूरत है, जबकि वकीलों द्वारा लगाए गए आरोपों की भी उचित जांच आवश्यक है।
**सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब कानून लागू करने वाली पुलिस और न्यायिक व्यवस्था से जुड़े वकील आमने-सामने हों, तो ऐसी स्थिति में निष्पक्ष और जवाबदेह कार्रवाई कैसे सुनिश

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