‘मुझसे बड़ा गुंडा कौन?’ योगी सरकार के मंत्री राजभर का बयान वायरल! मुख्तार-धनंजय का नाम लेकर बोले—आंख निकालने की हैसियत रखता हूं

बांदा की जन अधिकार महारैली में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर का विवादित बयान; बृजेश सिंह, धनंजय सिंह, अभय सिंह और मुख्तार अंसारी का जिक्र, कार्यकर्ताओं से न डरने की अपील

Om Prakash Rajbhar News: यूपी के कैबिनेट मंत्री ओपी राजभर ने बांदा की रैली में खुद को सबसे बड़ा गुंडा बताया। उन्होंने मुख्तार अंसारी, धनंजय और बृजेश सिंह के नाम लेकर दरबार करने का दावा किया और विरोधियों को चेतावनी दी।

‘मुझसे बड़ा गुंडा कौन?’ योगी सरकार के मंत्री राजभर का बयान वायरल! मुख्तार-धनंजय का नाम लेकर बोले—आंख निकालने की हैसियत रखता हूं

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बांदा की जन अधिकार महारैली में दिए बयान को लेकर यूपी सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर चर्चा में हैं।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | बांदा/लखनऊ | 3 नवंबर 2026

खबर में खास

  • यूपी के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने खुद को देश का सबसे बड़ा गुंडा बताया।
  • मुख्तार अंसारी, बृजेश सिंह, धनंजय सिंह और अभय सिंह का नाम लेकर दरबार करने का दावा किया।
  • कार्यकर्ताओं को डराने वालों के लिए आंख निकालने जैसी चेतावनी भरी भाषा इस्तेमाल की।
  • बयान 2 नवंबर को बांदा की जन अधिकार महारैली में दिया गया।
  • 3 नवंबर को बयान की रिपोर्ट और वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक चर्चा तेज हुई।
बांदा। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर का एक बयान चर्चा में है। बांदा की जन अधिकार महारैली में उन्होंने खुद को देश का सबसे बड़ा गुंडा बताते हुए मुख्तार अंसारी, धनंजय सिंह, बृजेश सिंह और अभय सिंह जैसे चर्चित नामों का जिक्र किया।
सोमवार, 2 नवंबर को दिए गए इस बयान की रिपोर्टें मंगलवार को सामने आईं। राजभर की टिप्पणी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री हैं और उनकी पार्टी भाजपा के नेतृत्व वाले NDA गठबंधन का हिस्सा है।

आखिर राजभर ने मंच से क्या कहा?

बांदा के बबेरू स्थित नवीन मंडी परिसर में भागीदारी पार्टी की जन अधिकार महारैली आयोजित की गई थी। इसमें ओम प्रकाश राजभर मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे थे।
कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बांदा में बड़े-बड़े गुंडों की चर्चा होती है, लेकिन उनके मुकाबले में वह खुद को अधिक प्रभावशाली मानते हैं।
उन्होंने मुख्तार अंसारी, धनंजय सिंह, बृजेश सिंह और अभय सिंह का नाम लेकर दावा किया कि ऐसे चर्चित लोग उनके यहां दरबार करते रहे हैं।
हालांकि, उनके इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। मुख्तार अंसारी का 2024 में निधन हो चुका है।

कार्यकर्ताओं को आंख निकालने की चेतावनी क्यों सुनाई?

राजभर ने अपने समर्थकों से कहा कि वे किसी से डरें नहीं। इसी दौरान उन्होंने चेतावनी भरी भाषा में कहा कि उनके कार्यकर्ताओं को कोई आंख दिखाएगा तो वह उसकी दूसरी आंख निकालने की हैसियत रखते हैं।
यह टिप्पणी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के संदर्भ में की गई थी। हालांकि, एक जिम्मेदार मंत्री की ओर से ऐसी भाषा के इस्तेमाल पर सार्वजनिक जवाबदेही का सवाल उठता है।

रैली में राजनीतिक ताकत दिखाने की कोशिश

जन अधिकार महारैली का आयोजन भागीदारी पार्टी ने किया था। उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रेमचंद्र प्रजापति ने बुंदेलखंड में अपने समाज की राजनीतिक हिस्सेदारी का मुद्दा उठाया।
राजभर ने समर्थकों से अपनी राजनीतिक पहचान मजबूत करने और दूसरे दलों के बजाय अपने संगठन के लिए काम करने की अपील की।
उन्होंने समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव की राजनीतिक रणनीति की भी आलोचना की।

क्या राजभर ने अपराध स्वीकार किया?

नहीं। खुद को गुंडा बताने वाली टिप्पणी एक सार्वजनिक राजनीतिक भाषण का हिस्सा है। इसे किसी आपराधिक कृत्य की औपचारिक स्वीकारोक्ति नहीं माना जा सकता।
इसी प्रकार, जिन नेताओं के नाम उन्होंने लिए, उनके साथ व्यक्तिगत संबंध या मुलाकात का स्वतंत्र प्रमाण इस बयान से स्थापित नहीं होता।

अब किस सवाल पर चर्चा है?

राजभर उत्तर प्रदेश सरकार में संवैधानिक जिम्मेदारी निभाने वाले मंत्री हैं। ऐसे में उनके बयान से सार्वजनिक पद की गरिमा और राजनीतिक भाषा को लेकर प्रश्न उठते हैं।
एक तरफ मंत्री अपने समर्थकों को निर्भीक रहने का संदेश दे रहे थे, दूसरी तरफ इसके लिए इस्तेमाल किए गए शब्दों की व्याख्या राजनीतिक धमकी के रूप में भी की जा सकती है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या किसी जनप्रतिनिधि को समर्थकों का मनोबल बढ़ाने के लिए ऐसी भाषा इस्तेमाल करनी चाहिए, या राजनीतिक नेतृत्व से अधिक संयमित संवाद की अपेक्षा होनी चाहिए?

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