SIR पर चुनाव आयोग में मतभेद? 14 आपत्तियों की रिपोर्ट पर EC ने कहा- कोई औपचारिक असहमति नहीं
चुनाव आयोग के सूत्रों का कहना है कि SIR और दूसरे मुद्दों पर सवाल व सुझाव जरूर आए, लेकिन किसी आयुक्त ने अंतिम फैसले के खिलाफ औपचारिक असहमति दर्ज नहीं की।
विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर चुनाव आयोग में मतभेद की खबरों पर सफाई सामने आई है। सूत्रों ने कहा कि चर्चा के दौरान टिप्पणियां और सुझाव दिए गए, लेकिन सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
पूरी खबर SIR पर उठे सवालों के बीच चुनाव आयोग की सफाई ने विवाद को दिया नया मोड़, अब पारदर्शिता और कथित लिखित आपत्तियों की सच्चाई पर टिकी देशभर की निगाहें
SIR के फैसलों पर चुनाव आयोग में मतभेद के दावों के बीच सामने आई सफाई
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | बिजनेस डेस्क | 23 सितंबर 2026
खबर में खास
SIR के फैसलों पर मतभेद की रिपोर्ट के बाद आयोग की सफाई
दो चुनाव आयुक्तों द्वारा 14 आपत्तियां दर्ज कराने का दावा
आयोग के सूत्रों ने औपचारिक असहमति से किया इनकार
अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए जाने की बात कही
विपक्ष ने चुनाव आयोग की पारदर्शिता पर उठाए सवाल
चर्चा हुई, लेकिन फैसला सर्वसम्मति से लिया गया
चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक, किसी महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा के दौरान आयोग के सदस्यों का सवाल पूछना या सुझाव देना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। SIR से जुड़े मामलों पर भी चुनाव आयुक्तों ने अपनी टिप्पणियां रखीं और कुछ विषयों पर स्पष्टीकरण मांगा।
सूत्रों का कहना है कि चर्चा पूरी होने के बाद आयोग द्वारा लिए गए अंतिम फैसलों पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों की सहमति थी। इसलिए बैठकों में उठाए गए सवालों और सुझावों को औपचारिक असहमति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
रिपोर्ट में 14 आपत्तियों का किया गया दावा
मीडिया रिपोर्ट में कहा गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने बीते 10 महीनों में आयोग के कई कदमों पर लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इनमें मतदाता पंजीकरण के फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता सूची से नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया तथा चुनावी डाटाबेस के कथित केंद्रीकरण से जुड़े विषय शामिल थे।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि कुछ निर्देश चुनाव आयुक्तों की जानकारी या मंजूरी के बिना जारी किए गए थे। हालांकि आयोग से जुड़े सूत्रों ने इन दावों को औपचारिक मतभेद मानने से इनकार किया है।
फॉर्म-6 और मतदाता डाटाबेस पर उठे सवाल
रिपोर्ट के अनुसार, नए मतदाताओं के पंजीकरण वाले फॉर्म-6 में SIR से जुड़ा एक नया प्रश्न शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई गई थी। कथित तौर पर यह सवाल किया गया था कि नियमों में औपचारिक बदलाव किए बिना आवेदन पत्र में नया प्रावधान कैसे जोड़ा गया।
इसके अलावा मतदाता सूची के डिजिटल डाटाबेस तक राज्य और स्थानीय स्तर के निर्वाचन अधिकारियों की पहुंच को लेकर भी चिंता जताए जाने का दावा किया गया। आपत्ति में कथित तौर पर कहा गया कि मतदाता सूची तैयार करने और उसमें बदलाव करने का अधिकार संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के पास रहना चाहिए।
विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त को घेरा
मामला सामने आने के बाद कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। विपक्ष का कहना है कि यदि आयोग के सदस्यों ने वास्तव में लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं, तो उनकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
विपक्षी नेताओं ने SIR के दौरान मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटने का मुद्दा भी उठाया और आयोग से पूरी प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता बरतने की मांग की।
क्या कहता है चुनाव आयोग से जुड़ा कानून?
चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ दो अन्य चुनाव आयुक्त होते हैं। तीनों सदस्यों का दर्जा समान माना जाता है और आयोग के कामकाज से जुड़े फैसले यथासंभव सर्वसम्मति से लिए जाने का प्रावधान है।
यदि किसी मामले पर सदस्यों के बीच अलग-अलग राय होती है, तो फैसला बहुमत के आधार पर लिया जा सकता है। मौजूदा विवाद में आयोग से जुड़े सूत्रों का दावा है कि अंतिम निर्णयों के खिलाफ किसी सदस्य ने औपचारिक असहमति दर्ज नहीं की और फैसले सर्वसम्मति से हुए।