महेश बाबू से राजामौली-साइना नेहवाल तक को SIR नोटिस, क्या वोटर लिस्ट से कटेंगे नाम? जानिए असली वजह
तेलंगाना में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान महेश बाबू, एसएस राजामौली, साइना नेहवाल, वीवीएस लक्ष्मण और मिताली राज समेत कई हस्तियों को नोटिस मिला है। अधिकारियों ने दस्तावेज पेश कर मतदाता विवरण सत्यापित कराने को कहा है।
हैदराबाद की कई चर्चित हस्तियों को चुनाव अधिकारियों ने SIR के तहत मतदाता विवरण सत्यापित कराने का नोटिस भेजा है। नोटिस मिलने का मतलब नाम कटना नहीं है। सुनवाई और दस्तावेजों की जांच के बाद निर्वाचन अधिकारी अंतिम फैसला करेंगे।
हैदराबाद। तेलंगाना में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दायरे में अब सिनेमा और खेल जगत के कई बड़े नाम भी आ गए हैं। अभिनेता महेश बाबू, फिल्म निर्देशक एसएस राजामौली, बैडमिंटन स्टार साइना नेहवाल, पूर्व क्रिकेटर वीवीएस लक्ष्मण और भारतीय महिला क्रिकेट टीम की पूर्व कप्तान मिताली राज सहित कई चर्चित हस्तियों को चुनाव अधिकारियों ने नोटिस भेजा है।
नोटिस में संबंधित मतदाताओं से अपने विवरण और पात्रता से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इन हस्तियों के नाम मतदाता सूची से काट दिए गए हैं। नोटिस वोटर रिकॉर्ड का सत्यापन पूरा करने के लिए भेजे गए हैं।
किन बड़ी हस्तियों को मिला नोटिस?
आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, नोटिस पाने वाले प्रमुख लोगों में तेलुगु अभिनेता महेश बाबू और उनके परिवार के सदस्यों के साथ फिल्म निर्देशक एसएस राजामौली तथा उनका परिवार शामिल है।
खेल जगत से पूर्व भारतीय क्रिकेटर वीवीएस लक्ष्मण, बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल और पूर्व महिला क्रिकेट कप्तान मिताली राज के नाम भी सामने आए हैं। हैदराबाद में रहने वाली कुछ अन्य प्रमुख हस्तियों को भी वोटर लिस्ट में दर्ज जानकारी की पुष्टि कराने के लिए नोटिस दिए गए हैं।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में भी इन हस्तियों को SIR प्रक्रिया के तहत नोटिस भेजे जाने की जानकारी दी गई है।
आखिर क्यों भेजे गए नोटिस?
तेलंगाना में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण कराया जा रहा है। इस प्रक्रिया में मौजूदा मतदाताओं की जानकारी का पुराने चुनावी रिकॉर्ड से मिलान किया गया है। जिन मतदाताओं की जानकारी वर्ष 2002 की मतदाता सूची से सीधे नहीं जुड़ सकी या जिनके रिकॉर्ड में अतिरिक्त सत्यापन की जरूरत पाई गई, उन्हें दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया जा रहा है।
मतदाता को नोटिस मिलने की कई वजह हो सकती हैं। पुराने रिकॉर्ड में नाम न मिलना, पते में बदलाव, पारिवारिक विवरण का मिलान न होना या उपलब्ध जानकारी अधूरी होना इनमें शामिल हो सकता है।
नोटिस में संबंधित व्यक्ति को निर्वाचन अधिकारी के सामने अपना पक्ष रखने और निर्धारित दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए कहा जाता है। दस्तावेजों की जांच के बाद ही अधिकारी रिकॉर्ड को स्वीकार करने या उसमें बदलाव करने का निर्णय लेते हैं।
क्या वोटर लिस्ट से कट जाएंगे नाम?
सिर्फ SIR नोटिस मिलने के कारण किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से अपने आप नहीं कटता। तेलंगाना के मुख्य निर्वाचन अधिकारी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि वर्ष 2002 की मतदाता सूची में नाम नहीं मिलने मात्र से किसी वर्तमान मतदाता को सूची से बाहर नहीं किया जाएगा।
ऐसे मतदाताओं को चुनाव आयोग की ओर से मान्य दस्तावेजों में से कोई एक जमा कराकर अपनी पहचान और पात्रता की पुष्टि करने का अवसर मिलेगा। नोटिस का उत्तर देने, दस्तावेज जमा करने और सुनवाई में शामिल होने के बाद निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी फैसला करेंगे।
टाइम्स ऑफ इंडिया की पूर्व रिपोर्ट के अनुसार, पुरानी मतदाता सूची का इस्तेमाल केवल रिकॉर्ड के मिलान और सत्यापन को आसान बनाने के लिए किया जा रहा है।
महेश बाबू और राजामौली पर कोई आरोप नहीं
इन हस्तियों को जारी नोटिस प्रशासनिक सत्यापन प्रक्रिया का हिस्सा हैं। अभी तक ऐसी कोई जानकारी सामने नहीं आई है कि महेश बाबू, एसएस राजामौली, साइना नेहवाल, वीवीएस लक्ष्मण या मिताली राज पर फर्जी तरीके से मतदाता बनने का आरोप लगाया गया हो।
नोटिस को किसी अनियमितता या अपराध का प्रमाण समझना गलत होगा। चुनाव अधिकारी उनसे केवल मतदाता सूची में दर्ज जानकारी की पुष्टि और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी करा रहे हैं।
संबंधित हस्तियां दस्तावेज देकर यह स्पष्ट कर सकती हैं कि उनका सामान्य निवास किस विधानसभा क्षेत्र में है और मतदाता सूची में दर्ज बाकी विवरण सही हैं या उनमें सुधार की आवश्यकता है।
SIR क्या है?
SIR का पूरा नाम Special Intensive Revision, यानी विशेष गहन पुनरीक्षण है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना और उसमें मौजूद गलत, दोहरे या अप्रासंगिक रिकॉर्ड की पहचान करना है।
इस अभियान के दौरान बूथ लेवल अधिकारी यानी BLO घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी एकत्र करते हैं। मतदाताओं को पहले से भरे हुए गणना प्रपत्र दिए जाते हैं, जिनमें उन्हें अपने और परिवार से जुड़ी जानकारी की पुष्टि करनी होती है।
जिन लोगों के दस्तावेज या विवरण पूरी तरह स्पष्ट नहीं होते, उन्हें चुनाव अधिकारी नोटिस भेजकर सुनवाई का अवसर देते हैं। निर्धारित प्रक्रिया पूरी किए बिना किसी मतदाता का नाम हटाने का अंतिम फैसला नहीं किया जाना चाहिए।
नाम किन परिस्थितियों में हट सकता है?
मतदाता सूची से किसी व्यक्ति का नाम तब हटाया जा सकता है, जब सत्यापन में उसके मृत होने, स्थायी रूप से दूसरे क्षेत्र में चले जाने, एक से अधिक जगह नाम दर्ज होने या मतदाता बनने की पात्रता पूरी न करने की पुष्टि हो।
इसके अतिरिक्त, नोटिस का उत्तर न देने अथवा पर्याप्त दस्तावेज उपलब्ध न कराने पर भी संबंधित निर्वाचन अधिकारी मामले की जांच कर सकता है। लेकिन अंतिम निर्णय से पहले मतदाता को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना आवश्यक है।
इसीलिए नोटिस प्राप्त करने वाले लोगों को निर्धारित समय पर जवाब देने और अपने दस्तावेज जमा करने की सलाह दी जाती है।
आधार कार्ड की क्या भूमिका है?
आधार कार्ड को पहचान साबित करने वाले दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है, लेकिन इसे अपने आप नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जाता। चुनाव अधिकारी मतदाता की पात्रता की जांच के लिए आयोग द्वारा निर्धारित दूसरे दस्तावेज भी मांग सकते हैं।
मतदाता को वही दस्तावेज प्रस्तुत करने चाहिए, जिनका उल्लेख नोटिस या चुनाव आयोग की आधिकारिक सूची में किया गया हो। किसी अनधिकृत व्यक्ति के साथ व्यक्तिगत कागजात साझा करने से बचना चाहिए।
कब जारी होगी अंतिम मतदाता सूची?
तेलंगाना में SIR के तहत दावे, आपत्तियां और सुनवाई पूरी होने के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी। इस दौरान निर्वाचन अधिकारी मिले हुए दस्तावेजों और मतदाताओं के जवाबों की जांच करेंगे।
महेश बाबू से लेकर राजामौली और साइना नेहवाल तक चर्चित हस्तियों को नोटिस मिलने से यह मामला सुर्खियों में जरूर आया है, लेकिन यह प्रक्रिया आम और खास सभी मतदाताओं पर समान रूप से लागू है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि संबंधित हस्तियां कब अपने दस्तावेज प्रस्तुत करती हैं और चुनाव अधिकारी सत्यापन पूरा करने के बाद उनके रिकॉर्ड पर क्या निर्णय लेते हैं।
