'पुलिस और लाठी से मत डरिए'—राहुल गांधी का नया वीडियो संदेश! 1 नवंबर को दिल्ली में महारैली, मोदी-शाह और चुनाव आयोग पर फिर निशाना

राहुल गांधी ने 29 अक्टूबर को जारी वीडियो संदेश में छात्रों और आम नागरिकों से 'चलो दिल्ली' मार्च में शामिल होने की अपील की। उधर, दिल्ली के व्यापारियों ने दिवाली के कारोबार पर असर पड़ने की आशंका जताई है।

Rahul Gandhi Chalo Dilli March: राहुल गांधी ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली महारैली से पहले नया वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने पुलिस कार्रवाई से न डरने की बात कही और मोदी सरकार तथा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली | 29 अक्टूबर 2026
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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 1 नवंबर की प्रस्तावित दिल्ली महारैली में शामिल होने की अपील की।

खबर में खास

  • राहुल गांधी ने गुरुवार, 29 अक्टूबर को नया वीडियो संदेश जारी किया।
  • 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में 'चलो दिल्ली' मार्च और महारैली प्रस्तावित।

  • राहुल ने पुलिस और लाठी से नहीं डरने की बात कही।

  • प्रधानमंत्री मोदी, अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक आरोप दोहराए।

  • दिल्ली के व्यापारियों ने रैली की तारीख बदलने या स्थान स्थानांतरित करने की मांग उठाई।
देश की राजनीति में मतदाता सूची और चुनाव आयोग को लेकर चल रहे विवाद के बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार, 29 अक्टूबर को एक नया वीडियो संदेश जारी किया है। इसमें उन्होंने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित विपक्षी महारैली में लोगों से शामिल होने की अपील की है।
राहुल गांधी ने वीडियो में कहा कि लोगों को पुलिस और लाठी से डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए विश्वास जताया कि प्रदर्शनकारियों को डराने की कोशिश नहीं होगी।
उन्होंने इस मार्च को संविधान और लोकतंत्र की रक्षा से जुड़ा आंदोलन बताया। यह कांग्रेस नेता का राजनीतिक संदेश है, किसी संभावित पुलिस कार्रवाई या सुरक्षा व्यवस्था की आधिकारिक जानकारी नहीं।

मोदी, शाह और ज्ञानेश कुमार का नाम लेकर क्या कहा?

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का नाम लेकर उनके खिलाफ राजनीतिक असहमति रखने वाले लोगों से प्रदर्शन में आने को कहा।
उन्होंने दावा किया कि यह मार्च किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है। कांग्रेस नेता ने अलग-अलग राजनीतिक विचार रखने वाले छात्र संगठनों से भी इसमें हिस्सा लेने की अपील की।
हालांकि, रैली का प्रमुख मुद्दा मतदाता सूची में कथित अनियमितताएं और विपक्ष द्वारा लगाए गए 'वोट चोरी' के आरोप हैं। इन आरोपों से चुनावी गड़बड़ी अपने आप प्रमाणित नहीं होती। चुनाव आयोग पहले मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया का बचाव कर चुका है और भाजपा भी विपक्ष के आरोपों को खारिज करती रही है।

1 नवंबर की रैली पर व्यापारियों को क्या आपत्ति है?

राहुल गांधी के इस नए संदेश से पहले दिल्ली के व्यापारिक संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने रैली की तारीख को लेकर चिंता जताई थी।
संगठन का कहना है कि त्योहारों के खरीदारी सीजन में इतनी बड़ी राजनीतिक सभा से सड़कें, यातायात और बाजारों तक ग्राहकों की पहुंच प्रभावित हो सकती है।
CTI ने 1 नवंबर की जगह 10 नवंबर के बाद कार्यक्रम करने अथवा स्थल बदलने का सुझाव दिया है। संगठन की ओर से भीड़ और वाहनों की संख्या को लेकर अनुमान दिए गए हैं, लेकिन उन्हें वास्तविक उपस्थिति या प्रमाणित आर्थिक नुकसान नहीं माना जा सकता।
राहुल गांधी पहले भी संकेत दे चुके हैं कि फिलहाल कार्यक्रम निर्धारित तारीख पर ही आयोजित करने का इरादा है

भाजपा ने 1 नवंबर की तारीख पर क्या सवाल उठाया?

भाजपा ने भी रैली की तारीख को लेकर कांग्रेस की आलोचना की है। पार्टी ने 1 नवंबर को 1984 के सिख-विरोधी दंगों की बरसी का हवाला देते हुए इस दिन राजनीतिक रैली आयोजित करने पर आपत्ति जताई थी।
कांग्रेस की ओर से रैली को मतदान अधिकारों और चुनावी पारदर्शिता से जुड़ा आंदोलन बताया गया है। इस तरह दोनों दल कार्यक्रम के उद्देश्य और तारीख को लेकर अलग-अलग राजनीतिक तर्क दे रहे हैं।

30 अक्टूबर और 1 नवंबर को क्या होने वाला है?

उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार, विपक्षी INDIA गठबंधन 30 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 'जन महाभियोग' नाम से प्रतीकात्मक राजनीतिक विरोध आयोजित करने की तैयारी में है।
इसके बाद 1 नवंबर को रामलीला मैदान में जनसभा प्रस्तावित है। दिल्ली पुलिस की ओर से सभा स्थल के लिए पहले अनुमति दिए जाने की रिपोर्ट भी सामने आ चुकी है। हालांकि, अनुमति का अर्थ यह नहीं कि प्रत्येक मार्च मार्ग या गतिविधि को बिना शर्त मंजूरी मिल गई है।
'जन महाभियोग' संवैधानिक पद से किसी अधिकारी को हटाने की वैधानिक संसदीय प्रक्रिया नहीं है।

अब किस बात पर नजर रहेगी?

29 अक्टूबर के वीडियो संदेश से स्पष्ट है कि राहुल गांधी निर्धारित रैली के लिए सार्वजनिक समर्थन जुटाने की अपील जारी रखे हुए हैं।
आगे तीन बातें महत्वपूर्ण होंगी—दिल्ली पुलिस की अंतिम सुरक्षा और यातायात व्यवस्था, व्यापारियों की चिंताओं पर आयोजकों की प्रतिक्रिया तथा 1 नवंबर को कार्यक्रम का वास्तविक आयोजन।
फिलहाल राहुल गांधी का नया वीडियो संदेश सत्यापित घटनाक्रम है, जबकि चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोप राजनीतिक विवाद का विषय बने हुए हैं।

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