महाकाल से अयोध्या तक दिग्विजय की पदयात्रा, राम मंदिर ट्रस्ट बदलने की मांग

दशहरे पर उज्जैन में दिग्विजय सिंह ने दर्शन-पूजन किया। अयोध्या तक प्रस्तावित पदयात्रा के लिए उन्होंने धार्मिक संस्थाओं में पारदर्शिता और राम मंदिर की प्रबंधन व्यवस्था में बदलाव की मांग रखी है।

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा उज्जैन से अयोध्या तक जाएगी। आयोजकों ने इसे गैर-राजनीतिक बताते हुए पार्टी के झंडे और राजनीतिक भाषण नहीं रखने की बात कही है। यात्रा में मंदिरों के चढ़ावे और धार्मिक संस्थानों की जवाबदेही के मुद्दे उठाए जाएंगे।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | उज्जैन/अयोध्या | 20 अक्टूबर 2026
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उज्जैन से अयोध्या तक प्रस्तावित सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा के लिए दिग्विजय सिंह ने धार्मिक संस्थाओं में पारदर्शिता की मांग रखी है। फाइल तस्वीरों का कोलाज।
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा के शुभारंभ से जुड़े धार्मिक कार्यक्रम मंगलवार को उज्जैन में हुए। दिग्विजय ने पत्नी अमृता राय के साथ मंदिरों में दर्शन-पूजन किया। यह पदयात्रा मध्य प्रदेश से उत्तर प्रदेश होते हुए अयोध्या तक जाएगी। 
यात्रा के लिए उन्होंने मंदिरों में दान और चढ़ावे के इस्तेमाल में पारदर्शिता की मांग रखी है। राम मंदिर की मौजूदा प्रबंधन व्यवस्था बदलना भी उनकी पहले से घोषित मांगों में शामिल है। यह दिग्विजय सिंह की मांग है, ट्रस्ट बदलने का कोई घोषित सरकारी फैसला नहीं। 

खबर में खास

  • उज्जैन से अयोध्या तक 900 किलोमीटर से अधिक की पदयात्रा की योजना है।
  • आयोजकों ने यात्रा में कांग्रेस के झंडे और राजनीतिक भाषण नहीं रखने की बात कही है।
  • मंदिरों के दान-चढ़ावे में पारदर्शिता और जवाबदेही यात्रा के घोषित मुद्दे हैं। 

आज उज्जैन में क्या हुआ?

दिग्विजय सिंह ने चिंतामन गणेश, महाकालेश्वर और हरसिद्धि मंदिर में पूजा की। इसके बाद वह पार्थिव शिवलिंग निर्माण और पूजन कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने सनातन धर्म की शिक्षाओं और परंपराओं का पालन करने की बात कही। 

राम मंदिर ट्रस्ट को लेकर क्या है उनकी मांग?

दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर के मौजूदा ट्रस्ट को भंग करके व्यवस्था का दायित्व रामालय ट्रस्ट को सौंपने की मांग रखी है। वह इसमें विभिन्न धार्मिक पीठों और परंपराओं के प्रतिनिधियों की भागीदारी चाहते हैं।
उन्होंने मंदिर के चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच और जिम्मेदारी तय करने की भी मांग की है। ये उनके आरोप और मांगें हैं; इनसे किसी पदाधिकारी का दोष साबित नहीं होता। संबंधित रिपोर्ट में इन मांगों पर ट्रस्ट की नई प्रतिक्रिया शामिल नहीं है। 

कांग्रेस नेता की यात्रा, लेकिन पार्टी का झंडा नहीं?

आयोजकों के अनुसार, यात्रा को किसी राजनीतिक दल के कार्यक्रम की तरह नहीं चलाया जाएगा। इसमें कांग्रेस के झंडे, बैनर और राजनीतिक भाषण नहीं रखने की बात कही गई है।
दिग्विजय ने भी यात्रा को किसी धर्म, संप्रदाय या व्यक्ति के विरोध का अभियान बताने से इनकार किया है। उनका कहना है कि श्रद्धालुओं के दान का पारदर्शी उपयोग और धार्मिक संस्थाओं की जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए।

उत्तर प्रदेश में किन इलाकों से गुजरने की योजना है?

घोषित मार्ग के मुताबिक यात्रा मध्य प्रदेश के विभिन्न पड़ावों और ओरछा से आगे बढ़ते हुए उत्तर प्रदेश में चिरगांव, उरई, कालपी, कानपुर देहात और बाराबंकी जैसे इलाकों से होकर अयोध्या पहुंचेगी। ये प्रस्तावित पड़ाव हैं; यात्रा की वास्तविक प्रगति के अनुसार कार्यक्रम बदल सकता है। 
पहले चरण का कार्यक्रम 20 अक्टूबर से 5 नवंबर तक जारी किया गया है। इसमें उज्जैन, शाजापुर, राजगढ़ और गुना जिले के पड़ाव शामिल हैं। यात्रा के दौरान स्थानीय लोगों, किसानों और श्रद्धालुओं से संवाद की योजना भी है। 

क्या यात्रा का ऐलान आज हुआ है?

नहीं। यात्रा की घोषणा और उससे जुड़ी मांगें पहले सामने आ चुकी थीं। 9 सितंबर को उज्जैन से अयोध्या पदयात्रा की घोषणा की रिपोर्ट प्रकाशित की थी। आज का नया घटनाक्रम दशहरे पर उज्जैन में दर्शन-पूजन और यात्रा के शुभारंभ से जुड़े कार्यक्रम हैं।

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