‘बच्चों की सुरक्षा सिर्फ बहाना?’ अंडर-18 Social Media Ban के प्लान पर अभिजीत दीपके ने मोदी सरकार को घेरा

CJP नेता अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि सरकार नाबालिगों की ऑनलाइन सुरक्षा के नाम पर Gen Alpha की राजनीतिक आवाज को नियंत्रित करना चाहती है। उन्होंने कहा कि सरकार वास्तव में चिंतित है तो लड़कियों को परेशान करने वाले अकाउंट्स पर कार्रवाई करे।

18 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट पर संभावित पाबंदी को लेकर CJP नेता अभिजीत दीपके ने मोदी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने इसे बच्चों की सुरक्षा से ज्यादा सरकार की बनाई छवि बचाने की कोशिश बताया।

अंडर-18 Social Media Ban पर छिड़ी नई बहस, अभिजीत दीपके बोले—युवाओं की आवाज से बुरी तरह डरी हुई है सरकार

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नाबालिगों के सोशल मीडिया अकाउंट पर संभावित पाबंदी को लेकर CJP नेता अभिजीत दीपके ने मोदी सरकार की मंशा पर सवाल उठाए।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राष्ट्रीय डेस्क | 29 सितंबर 2026

खबर में खास

  • अंडर-18 सोशल मीडिया अकाउंट पर रोक लगाने की तैयारी
  • केंद्र सरकार कर सकती है IT इंटरमीडियरी नियमों में बदलाव
  • सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिगों की ऑनलाइन सुरक्षा पर जताई चिंता
  • अभिजीत दीपके ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल
  • सरकार की ओर से दीपके के आरोपों पर प्रतिक्रिया सामने नहीं आई
18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया अकाउंट खोलने से रोकने की संभावित योजना पर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के नेता अभिजीत दीपके ने इस प्रस्ताव को लेकर मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
दीपके ने कहा कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा जरूरी है, लेकिन इसके नाम पर युवाओं की राजनीतिक आवाज और सरकार की आलोचना को नियंत्रित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार Gen Z के बाद अब Gen Alpha के ऑनलाइन प्रभाव से चिंतित है।

सुप्रीम कोर्ट की चिंता के बाद सरकार की तैयारी

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नाबालिगों की पहुंच और उन्हें दिखाई जाने वाली सामग्री को लेकर चिंता जताई है। इसके बाद केंद्र सरकार ने संकेत दिया है कि IT इंटरमीडियरी नियमों में बदलाव किया जा सकता है।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के अकाउंट रोकने के लिए सख्त आयु सत्यापन प्रणाली लागू करनी पड़ सकती है। हालांकि, अंतिम नियम, उनकी समयसीमा और अपवादों की पूरी जानकारी अभी स्पष्ट नहीं हुई है।

दीपके ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल

अभिजीत दीपके ने कहा कि बीजेपी ने लंबे समय तक मेनस्ट्रीम मीडिया और WhatsApp के जरिए राजनीतिक नैरेटिव पर प्रभाव बनाए रखा, लेकिन Instagram पर Gen Z ने राजनीतिक प्रचार पर सवाल उठाए और उसका मजाक भी बनाया।
उन्होंने कहा कि अब Gen Alpha भी इंटरनेट की दुनिया में तेजी से सक्रिय हो रहा है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि नाबालिगों पर प्रस्तावित पाबंदी का उद्देश्य केवल बच्चों की सुरक्षा है या इसके पीछे युवाओं की आलोचनात्मक आवाज को रोकने की कोशिश भी छिपी है।

‘सुरक्षित इंटरनेट बनाने पर ध्यान दे सरकार’

दीपके ने कहा कि यदि केंद्र सरकार वास्तव में युवाओं की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर गंभीर है तो उसे इंटरनेट को सुरक्षित बनाने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने ऑनलाइन लड़कियों को परेशान करने, धमकी देने और अभद्र सामग्री फैलाने वाले अकाउंट्स के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की।
CJP नेता ने आरोप लगाया कि सरकार की आलोचना करने वाले कंटेंट को हटाया जा रहा है और व्यवस्था की कमियां उजागर करने वाले कई कंटेंट क्रिएटर्स के अकाउंट भी निशाने पर आए हैं। हालांकि, इन आरोपों पर केंद्र सरकार या Meta की कोई प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट के सामने आने तक उपलब्ध नहीं थी।

‘वे बुरी तरह डरे हुए हैं’

अभिजीत दीपके ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता में बैठे लोग युवाओं की ऑनलाइन आवाज से “बुरी तरह डरे हुए” हैं। उनके अनुसार, प्रस्तावित फैसला बच्चों की सुरक्षा से अधिक पिछले वर्षों में तैयार की गई राजनीतिक छवि को बचाने की कोशिश दिखाई देता है।
दीपके के आरोपों के बाद सोशल मीडिया पर बच्चों की सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर बहस तेज हो सकती है। एक तरफ नाबालिगों को हानिकारक सामग्री, ऑनलाइन उत्पीड़न और डिजिटल लत से बचाने की आवश्यकता है, वहीं दूसरी तरफ सरकार के प्रस्तावित नियमों की पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं।

अंतिम नियमों पर टिकी निगाहें

सरकार की ओर से अभी प्रस्तावित बदलावों का पूरा प्रारूप सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसलिए यह स्पष्ट होना बाकी है कि आयु की पुष्टि कैसे होगी, अभिभावकों की सहमति मान्य होगी या नहीं और बच्चों की निजता की सुरक्षा के लिए क्या प्रावधान किए जाएंगे।

नाबालिगों की ऑनलाइन सुरक्षा जरूरी है, लेकिन इसके नाम पर आलोचना और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रभावित नहीं होनी चाहिए। अभिजीत दीपके के आरोपों ने प्रस्तावित Social Media Ban को नई राजनीतिक बहस में बदल दिया है। अब सबकी निगाहें सरकार के अंतिम नियमों और युवाओं की निजता तथा सुरक्षा के बीच बनाए जाने वाले संतुलन पर टिकी हैं।

 

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