यूपी की दो वोटर लिस्ट में 2.4 करोड़ का अंतर! अब होगा मिलान, कहीं आपका नाम तो नहीं छूटा?

विधानसभा चुनाव 2027 से पहले चुनाव आयोग का नया निर्देश। पंचायत और विधानसभा मतदाता सूचियों के मिलान से छूटे पात्र वोटरों की पहचान होगी, महिलाओं और युवाओं पर विशेष ध्यान।

यूपी की पंचायत और विधानसभा ग्रामीण मतदाता संख्या में लगभग 2.4 करोड़ का अंतर मिला है। आयोग ने सूचियों के मिलान का निर्देश दिया। जानिए नाम जोड़ने की प्रक्रिया और जरूरी तारीखें।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | लखनऊ | 5 नवंबर 2026
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उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले पंचायत और विधानसभा मतदाता सूचियों के मिलान के निर्देश दिए गए हैं।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले मतदाता सूची को लेकर एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। पंचायत चुनाव की मतदाता सूची और विधानसभा की ग्रामीण मतदाता संख्या में लगभग 2.4 करोड़ का अंतर मिलने के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने दोनों सूचियों का मिलान कराने का निर्देश दिया है। 12 नवंबर से शुरू होने वाले विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) में छूटे हुए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने पर जोर रहेगा।

खबर में खास

  • ग्रामीण मतदाताओं की दो अलग सूचियों की संख्या में लगभग 2.4 करोड़ का अंतर।
  • सभी जिलों में पंचायत, निकाय और विधानसभा की मतदाता सूचियों का मिलान होगा।
  • महिलाओं और 18–19 वर्ष के युवाओं की पहचान के लिए विशेष अभियान।
  • 12 नवंबर से 11 दिसंबर तक दावे और आपत्तियां दर्ज होंगी।
  • 4 जनवरी 2027 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने का कार्यक्रम।

आखिर 2.4 करोड़ का अंतर कैसे सामने आया?

इंडियन एक्सप्रेस की 5 नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार, पंचायत चुनाव की मतदाता सूची और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के ग्रामीण मतदाताओं की संख्या की तुलना में करीब 2.4 करोड़ का अंतर पाया गया।
पंचायत चुनाव की सूची राज्य निर्वाचन आयोग तैयार करता है, जबकि विधानसभा और लोकसभा चुनाव के लिए मतदाता सूची भारत निर्वाचन आयोग की देखरेख में बनती है।
दोनों सूचियों का दायरा और तैयारी की प्रक्रिया अलग होने के कारण संख्या में अंतर हो सकता है। इसलिए यह कहना गलत होगा कि 2.4 करोड़ लोगों के नाम काट दिए गए हैं।

चुनाव आयोग ने अब क्या निर्देश दिए?

मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने जिला निर्वाचन अधिकारियों को पंचायत, नगरीय निकाय और विधानसभा मतदाता सूचियों का मिलान करने के निर्देश दिए हैं।
जिन पात्र नागरिकों का नाम किसी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र की सूची में नहीं है, उनसे फॉर्म-6 भरवाकर पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी।
सरकारी राशन की दुकानों, शिक्षण संस्थानों और अन्य विभागों का सहयोग भी लिया जाएगा।

महिलाओं और युवाओं पर विशेष ध्यान क्यों?

SIR के बाद प्रकाशित विधानसभा मतदाता सूची में महिला मतदाताओं का अनुपात कम पाया गया है। इस स्थिति को देखते हुए पात्र महिलाओं की पहचान के लिए आशा, एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और स्वयं सहायता समूहों की मदद ली जाएगी।
वहीं कॉलेजों में मतदाता साक्षरता क्लबों के माध्यम से युवाओं को पंजीकरण के लिए प्रेरित किया जाएगा।

2027 चुनाव से पहले राजनीतिक महत्व क्या है?

उत्तर प्रदेश में सपा और कांग्रेस पहले से मतदाता सूची में नाम हटने तथा दोहरी प्रविष्टियों को लेकर सवाल उठाती रही हैं।
समाजवादी पार्टी ने कुछ विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों की शिकायत भी की थी। कांग्रेस ने SIR के बाद हटाए गए नामों का विस्तृत विवरण सार्वजनिक करने की मांग उठाई थी।
हालांकि इन पुराने आरोपों को वर्तमान 2.4 करोड़ के अंतर की पुष्टि नहीं माना जा सकता। नई मिलान प्रक्रिया पर दोनों दलों की विशिष्ट प्रतिक्रिया अभी सत्यापित नहीं हुई है।

वोटर लिस्ट में अपना नाम कैसे जांचें?

निर्वाचन आयोग के आधिकारिक पोर्टल voters.eci.gov.in पर मतदाता अपना नाम खोज सकते हैं।
यदि नाम दर्ज नहीं है और व्यक्ति पात्र है, तो फॉर्म-6 के माध्यम से आवेदन कर सकता है। विवरण में सुधार या संबंधित संशोधन के लिए फॉर्म-8 का प्रावधान है।
12 नवंबर को प्रारूप सूची जारी होने के बाद 11 दिसंबर तक दावे और आपत्तियां दर्ज की जा सकेंगी।

अब आगे क्या होगा?

आयोग ने मतदान केंद्रों का पुनर्व्यवस्थापन भी किया है। प्रदेश में मतदान केंद्रों की संख्या 1,77,516 से घटकर 1,73,730 हो गई है।
ऐसे में मतदाताओं के लिए अपना नाम और मतदान केंद्र दोनों जांचना महत्वपूर्ण होगा।
सबसे जरूरी बात यह है कि मतदाता सूचियों के बीच अंतर मिलने से किसी व्यक्ति का मतदान अधिकार अपने आप समाप्त नहीं होता। पात्रता की जांच, पंजीकरण और शिकायतों के निस्तारण के बाद ही सही स्थिति सामने आएगी।

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