CEC ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे का अल्टीमेटम, CJP ने मांगा इस्तीफा; देशभर में आंदोलन की चेतावनी
कॉकरोच जनता पार्टी ने SIR विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगाया है। संगठन ने इस्तीफा नहीं देने पर देशव्यापी आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी।
SIR और चुनाव आयोग के भीतर मतभेद के दावों के बीच CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से 48 घंटे में इस्तीफा मांगा है। मांग पूरी नहीं होने पर देशभर में आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी गई है।
SIR पर चुनाव आयोग पहले ही विपक्ष और पूर्व अधिकारियों के सवालों से घिरा हुआ है। अब CJP के 48 घंटे वाले अल्टीमेटम ने विवाद को सड़क तक ले जाने की चेतावनी दे दी है। हालांकि चुनाव आयोग का कहना है कि उसके सभी महत्वपूर्ण फैसले तीनों आयुक्तों की सहमति से लिए गए हैं।
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से 48 घंटे में इस्तीफा देने की मांग करते हुए देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राष्ट्रीय डेस्क | 24 सितंबर 2026
खबर में खास
ज्ञानेश कुमार से 48 घंटे में इस्तीफे की मांग
CJP ने देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी
SIR से जुड़े फैसलों पर उठाए गंभीर सवाल
दो चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों के बाद बढ़ा विवाद
चुनाव आयोग ने मतभेद के दावों को किया खारिज
नई दिल्ली। Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग पर उठ रहे सवालों के बीच कॉकरोच जनता पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। CJP ने ज्ञानेश कुमार से 48 घंटे के भीतर पद से इस्तीफा देने की मांग की है।
संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि मुख्य चुनाव आयुक्त तय समय के भीतर इस्तीफा नहीं देते हैं तो चुनाव आयोग के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। CJP ने ज्ञानेश कुमार पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को प्रभावित करने के आरोप लगाए हैं।
CJP’s 48-Hour Ultimatum
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दिल्ली में आयोजित Press Conference के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि SIR से जुड़े फैसलों और मतदाता सूची की प्रक्रिया ने चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दीपके ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि मांग पूरी नहीं होने पर संगठन देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन और आंदोलन करेगा।
CJP ने SIR की प्रक्रिया रोकने, चुनाव आयोग के कामकाज की निष्पक्ष जांच कराने और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई है।
Why The Controversy Increased
यह विवाद एक रिपोर्ट सामने आने के बाद तेज हुआ, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले लगभग 10 महीनों में चुनाव आयोग के अलग-अलग फैसलों पर करीब 14 बार सवाल या आपत्तियां उठाई थीं।
इन आपत्तियों को मतदाता सूची में नाम जोड़ने, नाम हटाने, नाम दोबारा शामिल करने, Form-6 में बदलाव और SIR के दौरान अपनाई गई तकनीकी प्रक्रिया से जुड़ा बताया गया।
रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर निशाना साधना शुरू कर दिया। कई नेताओं ने SIR रोकने, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने और ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग उठाई है।
Election Commission’s Response
चुनाव आयोग ने अपने भीतर औपचारिक मतभेद होने के दावों को खारिज किया है। आयोग के अनुसार, बैठकों के दौरान अधिकारियों और चुनाव आयुक्तों की तरफ से सवाल एवं सुझाव आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है।
आयोग ने कहा है कि SIR सहित उसके सभी महत्वपूर्ण फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए हैं। किसी भी चुनाव आयुक्त ने अंतिम फैसले के खिलाफ औपचारिक असहमति दर्ज नहीं कराई।
इसलिए CJP की ओर से लगाए गए आरोप फिलहाल राजनीतिक दावे हैं। आरोपों की किसी स्वतंत्र या न्यायिक जांच में पुष्टि नहीं हुई है।
Questions Over Voter Rights
SIR के विरोध में सबसे बड़ा सवाल मतदाताओं के नाम को लेकर उठाया जा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि तकनीकी Mapping और दस्तावेजों की प्रक्रिया के कारण योग्य मतदाताओं के नाम सूची से बाहर हो सकते हैं।
चुनाव आयोग का कहना है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को साफ और सही बनाना है। योग्य मतदाताओं को नाम जोड़ने, Notice का जवाब देने और नाम हटने पर Appeal करने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
इसके बावजूद Form-6, माता-पिता की जानकारी, Logical Discrepancy और पुराने रिकॉर्ड से Mapping जैसे विषयों पर आयोग से अधिक पारदर्शिता की मांग की जा रही है।
Pressure Rising On Election Commission
CJP के अल्टीमेटम से पहले विपक्षी दल और पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा भी SIR की प्रक्रिया पर सवाल उठा चुके हैं। अब आंदोलन की चेतावनी के कारण यह विवाद चुनावी और कानूनी बहस से आगे बढ़कर सड़कों तक पहुंच सकता है।
फिलहाल मुख्य चुनाव आयुक्त या चुनाव आयोग की तरफ से CJP के 48 घंटे वाले अल्टीमेटम पर कोई अलग औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि आयोग इन आरोपों का जवाब देता है या CJP देशव्यापी आंदोलन की घोषणा करती है।
CJP के 48 घंटे वाले अल्टीमेटम ने SIR विवाद को नया और गंभीर मोड़ दे दिया है। अब सवाल सिर्फ चुनाव आयोग के अंदर कथित मतभेद का नहीं, बल्कि देश की चुनावी व्यवस्था पर जनता के भरोसे का है। आयोग की अगली सफाई और CJP का आंदोलन इस विवाद की आगे की दिशा तय करेगा।