लखनऊ में बैठकर अमेरिकी नागरिकों से साइबर ठगी, फर्जी Call Center का भंडाफोड़; 4 महिलाओं समेत 16 पकड़े गए

लखनऊ के अलीगंज में पुलिस ने अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाने वाले कथित फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा किया है। 4 महिलाओं समेत 16 लोग पकड़े गए। सुबह करीब 4 बजे एक संदिग्ध युवक से पूछताछ के बाद पुलिस इस सेंटर तक पहुंची।

लखनऊ के अलीगंज-कपूरथला इलाके में पुलिस ने अमेरिकी नागरिकों को तकनीकी सहायता देने के बहाने निशाना बनाने वाले कथित फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने चार महिलाओं समेत 16 लोगों को पकड़ा। शुरुआती जांच में फर्जी हेल्पलाइन और remote-access software के जरिए पीड़ितों की निजी व बैंकिंग जानकारी हासिल करने का आरोप सामने आया है।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | लखनऊ | 19 सितंबर 2026

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अलीगंज के कपूरथला इलाके में कथित फर्जी कॉल सेंटर से चार महिलाओं समेत 16 लोगों को पुलिस ने पकड़ा।

खबर में खास

  • लखनऊ के अलीगंज में कथित फर्जी Call Center का खुलासा
  • चार महिलाओं समेत 16 लोग पकड़े गए
  • अमेरिकी नागरिकों को बनाया जाता था निशाना
  • सुबह 4 बजे संदिग्ध युवक से पूछताछ के बाद खुला मामला
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाने वाले एक कथित अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क का खुलासा हुआ है। अलीगंज के कपूरथला इलाके में चल रहे एक call centre पर पुलिस ने छापा मारकर चार महिलाओं समेत 16 लोगों को पकड़ा है।
शुरुआती पुलिस जांच में आरोप है कि यहां से अमेरिकी नागरिकों को technical और software support देने के नाम पर संपर्क किया जाता था और बाद में उनके computer का remote access लेकर संवेदनशील जानकारी हासिल की जाती थी।

सुबह 4 बजे एक युवक पर हुआ शक

इस पूरे मामले के खुलने की कहानी भी दिलचस्प है।

शुक्रवार सुबह करीब 4 बजे पुलिसकर्मी विपिन वर्मा गश्त कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें रिध्या प्लाजा के बाहर एक युवक संदिग्ध हालत में खड़ा दिखाई दिया।

पूछताछ में युवक ने बताया कि वह अपने दोस्त का इंतजार कर रहा है। पुलिसकर्मी ने उससे दोस्त को फोन करने को कहा। फोन पर दोस्त ने बताया कि वह ठाकुरगंज में है और उसे अलीगंज आना ही नहीं था। यहीं से पुलिस का शक गहरा गया।

पुलिस ने आसपास नजर रखनी शुरू की। कुछ देर बाद इमारत का shutter खुला और कई लोग अंदर जाते दिखाई दिए। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी गई और सुबह करीब 7 बजे पुलिस टीम ने office पर छापा मारा। अंदर 12 पुरुष और चार महिलाएं मिलीं।

अमेरिकी नागरिकों को कैसे बनाते थे निशाना?

पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक आरोपी इंटरनेट पर कथित तौर पर फर्जी customer-care और technical-support numbers चलाते थे।
जब अमेरिका में कोई व्यक्ति computer या software से जुड़ी समस्या के लिए इन नंबरों पर संपर्क करता तो call को Lucknow स्थित centre तक route किया जाता था।
इसके बाद कर्मचारी खुद को software या service company का representative बताते और समस्या ठीक करने के नाम पर पीड़ित को remote-access application download करने के लिए कहते।
आरोप है कि computer का access मिलने के बाद पीड़ित की banking, debit और credit-card संबंधी संवेदनशील जानकारी हासिल की जाती थी। जागरण की रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से AnyDesk जैसे remote-access app के इस्तेमाल का भी जिक्र है।

रोज करीब 50 कॉल आने का दावा

Times of India की रिपोर्ट के मुताबिक इस call centre पर कथित तौर पर रोज करीब 50 calls आती थीं। पुलिस अब electronic devices और communication channels की जांच कर रही है।
इससे यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कितने अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाया गया और ठगी से हासिल रकम आखिर कहां भेजी जाती थी।

चार महीने पहले किराए पर लिया था ऑफिस

पुलिस जांच में सामने आया है कि यह office करीब चार महीने पहले किराए पर लिया गया था।
TOI के मुताबिक मकान मालिक ने पुलिस को बताया कि premises मई में करीब ₹1 लाख प्रतिमाह पर किराए पर दिया गया था और भुगतान नकद किया जाना था। कर्मचारियों को office के अंदर mobile phone ले जाने की अनुमति नहीं होने की बात भी सामने आई है।
जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक दो managers को करीब ₹30,000 प्रतिमाह और अन्य callers को लगभग ₹18,000 वेतन मिलता था, जबकि महिला कर्मचारियों को ₹20,000 से ₹25,000 तक भुगतान किए जाने की बात जांच में सामने आई।

कौन चला रहा था पूरा नेटवर्क?

पुलिस अभी कथित नेटवर्क के दूसरे सदस्यों और वित्तीय लेनदेन को खंगाल रही है।
TOI की रिपोर्ट के मुताबिक जांच में अहमदाबाद के प्रांशु कुशवाहा का नाम suspected mastermind के रूप में सामने आया है और पुलिस उसकी तथा financial operations से जुड़े दूसरे लोगों की तलाश कर रही है।
जागरण में DCP North अमित कुमार आनंद के हवाले से बताया गया कि पकड़े गए लोग अमेरिकी नागरिकों से जानकारी जुटाकर दूसरी टीम तक पहुंचाते थे और इसके बाद पैसे निकालने की प्रक्रिया आगे बढ़ती थी। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि दूसरी टीम कहां से काम कर रही थी और रकम किन माध्यमों से पहुंचती थी।

क्या ₹100 करोड़ की ठगी हुई?

इस मामले में रकम को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अलग विवरण सामने आए हैं।
कुछ मीडिया रिपोर्टों में बड़े पैमाने पर करोड़ों रुपये की ठगी की बात कही गई है। हालांकि इस specific Aliganj call centre से कुल कितनी रकम की ठगी हुई, कितने पीड़ित हैं और money trail कहां तक जाता है—इन सवालों की पुलिस जांच अभी जारी है।
इसलिए जांच पूरी होने से पहले ₹100 करोड़ को इस मामले की अंतिम और स्थापित रकम मानना उचित नहीं होगा।

लखनऊ में पहले भी पकड़े गए ऐसे Call Center

यह लखनऊ में सामने आया पहला ऐसा मामला नहीं है।
Times of India के मुताबिक पिछले करीब तीन महीनों में शहर में पकड़ा गया यह चौथा suspected international cyber-fraud call centre है।
अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक इससे पहले Summit Building और Sushant Golf City इलाके में भी अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाने वाले कथित फर्जी call centres पकड़े गए थे।
Summit Building वाले पुराने मामले में पुलिस ने 119 लोगों को गिरफ्तार किया था और जांच में बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की बात सामने आई थी। हालांकि वह अलग मामला है और उसकी रकम को मौजूदा Aliganj case के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
फिलहाल अलीगंज मामले में पुलिस electronic evidence, financial transactions और कथित नेटवर्क की दूसरी कड़ियों की जांच कर रही है। जांच आगे बढ़ने पर ही इस call centre से हुई कुल कथित ठगी की रकम और पीड़ितों की संख्या स्पष्ट हो सकेगी।

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