कौन हैं दीपांशु शौकीन? NSUI से टिकट नहीं मिला तो निर्दलीय लड़े, DUSU में 30 हजार से ज्यादा वोट लेकर बने VP
DUSU Election 2026 में निर्दलीय दीपांशु शौकीन ने उपाध्यक्ष पद पर 30,615 वोट हासिल किए। NSUI से जुड़े रहे दीपांशु ने टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय चुनाव लड़ा और ABVP उम्मीदवार को 13,705 वोट से हराया।
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव 2026 में निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने उपाध्यक्ष पद जीतकर सबका ध्यान खींचा है। दिल्ली के पीरागढ़ी के रहने वाले दीपांशु के पिता DTC में कॉन्ट्रैक्ट कंडक्टर हैं। वह पहले NSUI से जुड़े थे, लेकिन टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय मैदान में उतरे। चुनाव प्रचार के दौरान उनका नंगे पैर छात्रों के बीच जाना भी चर्चा में रहा।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली | 19 सितंबर 2026
निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने DUSU 2026 में Vice-President पद पर जीत दर्ज की।
खबर में खास
दीपांशु शौकीन ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीता VP पद
मिले 30,615 वोट, जीत का अंतर 13,705
पहले NSUI से जुड़े थे दीपांशु
नंगे पैर प्रचार और छात्र मुद्दों को लेकर रहे चर्चा में
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ यानी DUSU Election 2026 में जहां ABVP ने चार में से तीन केंद्रीय पद जीते हैं, वहीं एक नाम सबसे अलग चर्चा में है—दीपांशु शौकीन।
दीपांशु ने किसी बड़े छात्र संगठन के उम्मीदवार के रूप में नहीं बल्कि निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर Vice-President का चुनाव जीता है।
उन्हें कुल 30,615 वोट मिले। उनके मुकाबले ABVP के इशू मौर्य को 16,910 और NSUI के वीर चतरथ को 4,313 वोट मिले। इस तरह दीपांशु ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 13,705 वोट के अंतर से हराया।
कौन हैं दीपांशु शौकीन?
दीपांशु शौकीन दिल्ली के पीरागढ़ी इलाके के रहने वाले हैं।
AajTak की रिपोर्ट के मुताबिक उनके पिता राकेश कुमार दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन यानी DTC में कॉन्ट्रैक्ट पर कंडक्टर के तौर पर काम करते हैं।
दीपांशु ने दिल्ली विश्वविद्यालय के शहीद भगत सिंह कॉलेज से ग्रेजुएशन किया है और फिलहाल DU में Buddhist Studies में पोस्ट ग्रेजुएशन कर रहे हैं।
NDTV की रिपोर्ट में उनकी मां को आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक परिवार की इच्छा थी कि दीपांशु UPSC की तैयारी करें, जबकि उनकी दिलचस्पी छात्र राजनीति में रही।
पहले NSUI से जुड़े थे दीपांशु
दीपांशु सीधे निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर छात्र राजनीति में नहीं आए थे। वह पहले कांग्रेस से जुड़े छात्र संगठन NSUI से जुड़े रहे।
टिकट को लेकर दीपांशु का कहना है कि उन्हें पहले Vice-President पद के लिए उम्मीदवार बनाने की बात हुई थी, लेकिन बाद में उन्हें टिकट नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि टिकट काटने के पीछे कथित कारणों को लेकर किए गए दावे दीपांशु का पक्ष हैं। इन्हें NSUI की ओर से स्वीकार किया गया स्थापित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
निर्दलीय मैदान में उतरे और जीत गए
टिकट नहीं मिलने के बाद दीपांशु ने चुनाव से हटने के बजाय निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर Vice-President पद के लिए नामांकन किया।
उनका मुकाबला ABVP और NSUI जैसे स्थापित छात्र संगठनों के उम्मीदवारों से था।
फाइनल नतीजे में दीपांशु को 30,615 वोट मिले। ABVP के इशू मौर्य 16,910 वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहे।
दीपांशु की जीत इसलिए भी उल्लेखनीय रही क्योंकि DUSU का केंद्रीय पैनल आमतौर पर बड़े छात्र संगठनों के उम्मीदवारों के बीच मुकाबले के लिए जाना जाता है।
नंगे पैर क्यों कर रहे थे प्रचार?
दीपांशु के चुनाव प्रचार की सबसे अलग तस्वीर उनके नंगे पैर कैंपस में घूमने की रही।
उन्होंने छात्र आवास, हॉस्टल और PG में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को अपने अभियान का प्रमुख हिस्सा बनाया।
रिपोर्टों के मुताबिक सत्य निकेतन में PG बिल्डिंग गिरने की घटना के बाद उन्होंने विरोध के तौर पर जूते-चप्पल नहीं पहनने का संकल्प लिया और चुनाव प्रचार के दौरान भी नंगे पैर छात्रों के बीच जाते रहे।
सत्य निकेतन हादसे को बनाया छात्र सुरक्षा का मुद्दा
सितंबर में सत्य निकेतन में PG बिल्डिंग गिरने की घटना ने दिल्ली विश्वविद्यालय के आसपास रहने वाले छात्रों की सुरक्षा और accommodation को लेकर सवाल खड़े किए थे।
इसी के बाद दीपांशु ने छात्र सुरक्षा, हॉस्टल और PG accommodation जैसे मुद्दों को अपने अभियान में प्रमुखता दी।
चुनाव जीतने के बाद भी उन्होंने हॉस्टल और छात्रों के रहने की व्यवस्था को अपनी प्राथमिकताओं में बताया है।
DUSU में बाकी तीन पद ABVP ने जीते
दीपांशु की जीत ऐसे चुनाव में हुई है जिसमें बाकी तीन केंद्रीय पद ABVP के खाते में गए हैं।
ABVP के यश डबास अध्यक्ष, रिया छावड़ी सचिव और लक्ष्य राज सिंह संयुक्त सचिव चुने गए। इस तरह चार सदस्यीय केंद्रीय पैनल में तीन प्रतिनिधि ABVP और एक निर्दलीय प्रतिनिधि है।
दीपांशु शौकीन की जीत DUSU 2026 के नतीजों में इसलिए अलग कहानी बन गई है क्योंकि उन्होंने बड़े छात्र संगठनों के उम्मीदवारों के बीच निर्दलीय चुनाव लड़ते हुए Vice-President पद हासिल किया।