UP Voter List 2027: यूपी की 403 सीटों पर वोटर लिस्ट की जांच! फॉर्म-6, 7 और 8 को लेकर बड़ा आदेश, अफसरों पर भी होगी कार्रवाई

पीलीभीत और आजमगढ़ में मतदाता सूची की गड़बड़ियों के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने 10 अप्रैल से कंप्यूटर सहायकों द्वारा दर्ज फॉर्मों की जाँच के निर्देश दिए। अब आवेदन की फीडिंग BLO ऐप से होगी।

UP Voter List 2027: उत्तर प्रदेश में 10 अप्रैल के बाद कंप्यूटर सहायकों द्वारा दर्ज मतदाता फॉर्म-6, 7 और 8 की जाँच होगी। जानिए चुनाव आयोग का आदेश, अधिकारियों की जवाबदेही और मतदाताओं पर इसका असर।

UP Voter List 2027: वोटर लिस्ट की गड़बड़ियों पर निर्वाचन विभाग सख्त, 10 अप्रैल के बाद दर्ज फॉर्मों की होगी जांच

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यूपी में 10 अप्रैल के बाद कंप्यूटर सहायकों द्वारा दर्ज फॉर्म-6, 7 और 8 की जाँच के निर्देश दिए गए हैं।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | लखनऊ | 26 अक्टूबर 2026
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर निर्वाचन विभाग ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। पीलीभीत और आजमगढ़ में सामने आई अनियमितताओं के बाद प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने 10 अप्रैल 2026 के बाद कंप्यूटर सहायकों द्वारा दर्ज किए गए फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 की अनिवार्य जाँच के निर्देश दिए हैं।
ये निर्देश 24 अक्टूबर को हुई वर्चुअल बैठक में दिए गए थे, जिनकी विस्तृत जानकारी 26 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्टों में सामने आई है।
खबर में खास
  • उत्तर प्रदेश के सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में संबंधित मतदाता प्रविष्टियों की जाँच।
  • 10 अप्रैल के बाद कंप्यूटर सहायकों द्वारा दर्ज फॉर्म-6, 7 और 8 की समीक्षा।

  • भौतिक आवेदन कंप्यूटर सहायकों से फीड कराने पर रोक।

  • अब BLO ऐप के माध्यम से आवेदन डिजिटाइज किए जाएँगे।

  • अनियमितता पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।

  • 12 नवंबर को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी करने का कार्यक्रम।

यूपी की वोटर लिस्ट की जांच का आदेश क्यों?

पीलीभीत और आजमगढ़ में मतदाता सूची से संबंधित शिकायतों और गड़बड़ियों के मामले सामने आए थे। इसके बाद निर्वाचन अधिकारियों की कार्यप्रणाली और आवेदन दर्ज करने की प्रक्रिया पर सवाल उठे।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने निर्देश दिया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की समाप्ति के बाद कंप्यूटर सहायकों द्वारा दर्ज किए गए आवेदनों की जाँच की जाए।
यह जाँच सभी मतदाताओं के नाम स्वतः हटाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि निर्धारित अवधि में कंप्यूटर सहायकों द्वारा की गई प्रविष्टियों की समीक्षा है।

फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 क्या हैं?

चुनाव आयोग के अनुसार, मतदाता सूची में अलग-अलग कामों के लिए अलग फॉर्म निर्धारित हैं।
  • फॉर्म-6: नए पात्र मतदाता का नाम सूची में दर्ज कराने के लिए।

  • फॉर्म-7: किसी प्रविष्टि पर आपत्ति या नाम हटाने के अनुरोध के लिए।

  • फॉर्म-8: नाम, पता या अन्य निर्धारित विवरण में सुधार या बदलाव के लिए।

इसलिए नए आदेश का संबंध केवल नाम जोड़ने से नहीं, बल्कि नाम हटाने के अनुरोध और विवरण में किए गए बदलावों से भी है।

अब कंप्यूटर सहायकों के काम पर क्या रोक लगी?

निर्वाचन विभाग ने भौतिक रूप से प्राप्त आवेदन कंप्यूटर सहायकों से दर्ज कराने पर रोक लगाई है।
अब बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को ऐसे आवेदनों को BLO ऐप के माध्यम से डिजिटाइज करना होगा। अधिकारियों को मूल आवेदन सुरक्षित रखने और लंबित फॉर्मों का समय से निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश भी मिले हैं।
क्या डीएम और दूसरे अफसरों पर भी होगी कार्रवाई?
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि जाँच में अनियमितता मिलने पर संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO), सहायक ERO और कंप्यूटर सहायक की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 के तहत कार्रवाई का भी उल्लेख किया गया है। जिला निर्वाचन अधिकारियों को अपर्याप्त निगरानी के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। मंडलायुक्तों को मतदाता सूची संबंधी कार्यों की निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
हालांकि, जाँच शुरू करने का आदेश अपने आप किसी अधिकारी का दोष सिद्ध नहीं करता।

आम मतदाताओं को अब क्या करना चाहिए?

मतदाता अपना नाम चुनाव आयोग के आधिकारिक पोर्टल पर जाँच सकते हैं। यदि नाम दर्ज नहीं है या विवरण गलत है तो निर्धारित आवेदन प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
उत्तर प्रदेश में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) के कार्यक्रम के अनुसार 12 नवंबर को ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित होनी है। इसके बाद 11 दिसंबर तक दावे और आपत्तियाँ स्वीकार करने का कार्यक्रम है।
मतदाता अपना नाम निर्वाचन आयोग की मतदाता खोज सेवा पर जाँच सकते हैं।

2027 चुनाव से पहले आगे क्या?

उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर अगले वर्ष चुनाव होने हैं। ऐसे में मतदाता सूची की शुद्धता चुनावी प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
नए आदेश के बाद ध्यान इस बात पर रहेगा कि जाँच में कितनी गलत प्रविष्टियाँ मिलती हैं, उनमें सुधार कैसे किया जाता है और किन मामलों में अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होती है।
फिलहाल निर्वाचन विभाग ने प्रक्रिया की समीक्षा और निगरानी सख्त करने के निर्देश दिए हैं। किसी मतदाता का नाम जाँच के आदेश मात्र से स्वतः निरस्त नहीं होता।

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