रामपुर से ओवैसी का बड़ा हमला, बोले- अब नेहरू, गांधी या यादव को नेता नहीं बनाएंगे

UP Election 2027 से पहले AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने रामपुर में मुस्लिम राजनीतिक नेतृत्व का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि मुस्लिम युवाओं को खुद MLA-MP बनने के लिए आगे आना चाहिए।

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने रामपुर की सभा में सपा, कांग्रेस और पारंपरिक राजनीतिक नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी पार्टी मुस्लिम युवाओं को नेतृत्व का मंच देगी। उन्होंने दावा किया कि अब समुदाय को केवल वोट बैंक या समर्थक की भूमिका तक सीमित नहीं रहना चाहिए।

रामपुर से ओवैसी का बड़ा हमला, बोले- अब नेहरू, गांधी या यादव को नेता नहीं बनाएंगे

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रामपुर की जनसभा में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाते हुए सपा और कांग्रेस के नेतृत्व पर सवाल खड़े किए।

 

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | रामपुर | 19 अक्टूबर 2026

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने रामपुर से समाजवादी पार्टी और कांग्रेस समेत पारंपरिक राजनीतिक नेतृत्व पर बड़ा हमला बोला है।
रामपुर में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी किसी नेहरू, गांधी या यादव परिवार को अपना राजनीतिक नेता बनाने के बजाय मुस्लिम युवाओं, महिलाओं और दूसरे वंचित वर्गों से नेतृत्व तैयार करना चाहती है। 
ओवैसी ने कहा कि मुस्लिम युवाओं में भी MLA और MP बनने की उतनी ही क्षमता है जितनी दूसरे समुदायों के लोगों में है, लेकिन उन्हें पर्याप्त राजनीतिक मंच नहीं मिलता। उन्होंने दावा किया कि AIMIM ऐसे युवाओं को आगे आने का अवसर देगी। 

खबर में खास

  • रामपुर में ओवैसी ने सपा और कांग्रेस पर साधा निशाना।
  • कहा—मुस्लिम युवाओं को खुद राजनीतिक नेतृत्व करना चाहिए।
  • “नेहरू, गांधी या यादव को नेता नहीं बनाएंगे” वाला बयान दिया।
  • AIMIM ने UP Election 2027 से पहले संगठन मजबूत करने का संकेत दिया।
  • Owaisi ने मुस्लिम समाज को सिर्फ vote bank मानने की राजनीति पर सवाल उठाए।

“अब्दुल अब दरी नहीं बिछाएगा”

ओवैसी ने अपने संबोधन में तीखे राजनीतिक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि मुस्लिम समाज को केवल सभाओं में भीड़ जुटाने या नेताओं के लिए “दरी बिछाने” तक सीमित नहीं रहना चाहिए।
उनका संदेश था कि मुस्लिम युवाओं को खुद राजनीतिक नेतृत्व की भूमिका में आना चाहिए और MLA तथा MP बनने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। यह Owaisi का राजनीतिक आह्वान था, कोई चुनावी परिणाम या प्रतिनिधित्व का पूर्वानुमान नहीं। 

अखिलेश यादव पर क्यों साधा निशाना?

ओवैसी लंबे समय से समाजवादी पार्टी पर आरोप लगाते रहे हैं कि पार्टी मुस्लिम मतदाताओं का समर्थन तो चाहती है, लेकिन उन्हें पर्याप्त राजनीतिक नेतृत्व और प्रतिनिधित्व नहीं देती।
रामपुर की सभा में भी उन्होंने इसी मुद्दे को आगे बढ़ाया। उन्होंने सीधे तौर पर यादव परिवार के नेतृत्व का जिक्र करते हुए SP की राजनीति पर सवाल उठाया। Jansatta
इससे पहले भी AIMIM और SP के बीच UP Election 2027 को लेकर गठबंधन और मुस्लिम वोटों की राजनीति पर मतभेद सामने आ चुके हैं। आपकी वेबसाइट पर भी सितंबर में Owaisi–Akhilesh टकराव और मुस्लिम नेतृत्व के मुद्दे पर अलग खबरें प्रकाशित हो चुकी हैं। Pratyakshdarshi Samachar

Congress पर भी Owaisi का निशाना

Owaisi का हमला केवल Samajwadi Party तक सीमित नहीं रहा।
उन्होंने नेहरू और गांधी परिवार का नाम लेकर कांग्रेस की पारंपरिक राजनीति पर भी सवाल उठाया। उनका कहना था कि AIMIM ऐसे परिवारों के बजाय स्थानीय स्तर से नए नेताओं को आगे बढ़ाना चाहती है। 

रामपुर को क्यों चुना Owaisi ने?

रामपुर उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से महत्वपूर्ण सीट और क्षेत्र रहा है। AIMIM यहां मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपनी राजनीतिक मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
Owaisi ने अपने संबोधन में रामपुर की शिक्षा, विकास और सामाजिक परिस्थितियों का भी जिक्र किया तथा दावा किया कि क्षेत्र को पर्याप्त राजनीतिक और विकास संबंधी प्रतिनिधित्व नहीं मिला। 

UP Election 2027 से पहले AIMIM की तैयारी

UP Election 2027 नजदीक आने के साथ AIMIM उत्तर प्रदेश में अपनी संगठनात्मक मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

पार्टी लगभग 200 सीटों तक चुनावी तैयारी पर नजर रख रही है, हालांकि अंतिम उम्मीदवारों और सीटों की आधिकारिक सूची अभी सामने नहीं आई है। 

Owaisi ने समर्थकों से बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने और नए राजनीतिक नेतृत्व को आगे बढ़ाने की अपील की है।

क्या SP के मुस्लिम वोट बैंक पर असर पड़ेगा?

Owaisi के ताजा बयान से उत्तर प्रदेश में मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर बहस फिर तेज हो सकती है।
हालांकि इससे 2027 के चुनाव में किस पार्टी को कितना राजनीतिक लाभ या नुकसान होगा, इसका अभी अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि AIMIM इस मुद्दे को अपने चुनावी अभियान के प्रमुख राजनीतिक विषयों में शामिल कर रही है।

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