UP News: मंत्री ओपी राजभर के सामने रामलीला मंच पर BJP नेता पर हमला, महामंडलेश्वर घायल; 3 नामजद समेत कई पर FIR

बलिया के रसड़ा में रामलीला के दौरान भाजपा नेता और श्रीनाथ बाबा मठ के महामंडलेश्वर कौशलेंद्र गिरि पर हमला हुआ। कार्यक्रम में मंत्री ओपी राजभर भी मौजूद थे। पुलिस ने 3 नामजद समेत अन्य पर FIR दर्ज की है।

बलिया के रसड़ा में रामलीला देखते समय BJP नेता महामंडलेश्वर कौशलेंद्र गिरि पर कथित हमला हुआ। मंत्री ओपी राजभर भी कार्यक्रम में मौजूद थे। तीन नामजद सहित अन्य आरोपियों पर FIR दर्ज कर पुलिस जाँच कर रही है।

खबर में खास

  • मंगलवार शाम श्रीनाथ बाबा मठ के रामलीला आयोजन में हमला हुआ।
  • महामंडलेश्वर कौशलेंद्र गिरि घायल हुए; उनके सहयोगी से भी मारपीट का आरोप।

  • पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर आयोजन में मौजूद थे।

  • तीन नामजद और कुछ अज्ञात आरोपियों पर हत्या के प्रयास समेत अन्य धाराओं में FIR।

  • पुलिस ने रामलीला कमेटी के सदस्यों के पुराने विवाद की जानकारी दी।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | बलिया | 21 अक्टूबर 2026
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भाजपा युवा मोर्चा की नई राष्ट्रीय टीम में उत्तर प्रदेश के तीन नेताओं को प्रमुख पद दिए गए। (AI सांकेतिक ग्राफिक)
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में रामलीला के दौरान भाजपा से जुड़े एक धार्मिक नेता पर कथित हमले की घटना ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में सवाल खड़े कर दिए हैं। रसड़ा कस्बे स्थित श्रीनाथ बाबा मठ में मंगलवार शाम आयोजित रामलीला के दौरान कुछ हथियारबंद लोग कथित तौर पर मंच पर चढ़ गए और मठ के महामंडलेश्वर कौशलेंद्र गिरि पर हमला कर दिया। घटना के समय उत्तर प्रदेश सरकार के पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर भी कार्यक्रम में मौजूद थे।
इस हमले में कौशलेंद्र गिरि घायल हुए और उन्हें अस्पताल ले जाया गया। उनकी शिकायत पर पुलिस ने तीन नामजद और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या के प्रयास, मारपीट और बलवा करने जैसी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है
मंत्री ओम प्रकाश राजभर की मौजूदगी में कैसे हुआ हमला?
पुलिस के मुताबिक, घटना 20 अक्टूबर की शाम रसड़ा स्थित श्रीनाथ बाबा मठ परिसर में हुई। यहाँ महामंडलेश्वर कौशलेंद्र गिरि पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर के साथ रामलीला देख रहे थे।
प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि इसी दौरान हथियारों से लैस कुछ लोग मंच पर चढ़ आए और कौशलेंद्र गिरि को जान से मारने के इरादे से हमला किया।
मौके पर मौजूद उनके सहयोगी रूपेश तिवारी ने हस्तक्षेप किया तो आरोपियों ने उनके साथ भी मारपीट की। अफरा-तफरी का फायदा उठाकर आरोपी वहाँ से फरार हो गए।
हालाँकि, यह स्पष्ट रखना जरूरी है कि हमले का निशाना ओम प्रकाश राजभर थे, ऐसी पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की जानकारी में कौशलेंद्र गिरि पर हमले का आरोप दर्ज है।

किन तीन लोगों के खिलाफ दर्ज हुई FIR?

रसड़ा कोतवाली में दर्ज मुकदमे में सतीश सिंह, संजीत गुप्ता और मोनू जायसवाल को नामजद किया गया है। इनके अलावा कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है।
समाचार एजेंसी भाषा की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय न्याय संहिता की धारा 109(1), 115(2), 191(2) और 191(3) के अंतर्गत आरोप दर्ज किए गए हैं।
ये धाराएँ हत्या के प्रयास, चोट पहुँचाने और घातक हथियारों के साथ बलवा जैसे आरोपों से संबंधित हैं। मुकदमा दर्ज होने का अर्थ आरोप सिद्ध होना नहीं है।
घायल महामंडलेश्वर कौन हैं?
महामंडलेश्वर कौशलेंद्र गिरि रसड़ा के श्रीनाथ बाबा मठ से जुड़े धार्मिक नेता हैं। स्थानीय भाजपा जिलाध्यक्ष संजय मिश्रा ने भी उन्हें भाजपा से जुड़ा नेता बताया है।
कौशलेंद्र गिरि लंबे समय से श्रीनाथ बाबा मठ के धार्मिक आयोजनों और स्थानीय गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। इस वर्ष भी उन्होंने रामलीला आयोजन की तैयारियों में भूमिका निभाई थी।
13 अक्टूबर को रसड़ा रामलीला मैदान के नवनिर्मित मंच के उद्घाटन में उनकी मौजूदगी की स्थानीय समाचार रिपोर्ट उपलब्ध है।
क्या रामलीला कमेटी का पुराना विवाद है वजह?
बलिया के पुलिस अधीक्षक डॉ. इराज राजा ने बताया कि रामलीला कमेटी के कुछ सदस्यों के बीच पहले से विवाद चल रहा था।
यह पुलिस की ओर से सामने आई महत्वपूर्ण जानकारी है। हालांकि अभी जाँच से यह अंतिम रूप में स्थापित नहीं हुआ है कि मंगलवार का हमला उसी पुराने विवाद के कारण किया गया।
दिलचस्प बात यह है कि जुलाई 2025 में भी रसड़ा के रामलीला मैदान में महामंडलेश्वर कौशलेंद्र गिरि और स्थानीय नगर पालिका नेतृत्व से जुड़े लोगों के बीच मारपीट का मामला सामने आया था। उस समय भी पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था। लेकिन 2025 की उस घटना और 2026 के वर्तमान हमले में सीधे संबंध का कोई प्रमाण अभी उपलब्ध नहीं है
पुलिस क्या कार्रवाई कर रही है?
रसड़ा के क्षेत्राधिकारी रजनीश कुमार के अनुसार, आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।
पुलिस घटना से जुड़े लोगों की पहचान और आरोपों की जाँच कर रही है। समाचार रिपोर्ट के समय तक तीनों नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी।
यह भी स्पष्ट नहीं हुआ है कि हमले में किन हथियारों का इस्तेमाल हुआ। प्राथमिकी में हथियारबंद लोगों के मंच पर चढ़ने का आरोप दर्ज है, लेकिन गोली चलने की पुष्टि नहीं हुई है।

योगी सरकार के लिए क्यों महत्वपूर्ण है मामला?

उत्तर प्रदेश में रामलीला जैसे धार्मिक और सार्वजनिक आयोजनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। ऐसे कार्यक्रम में राज्य सरकार के एक मंत्री की मौजूदगी के दौरान भाजपा नेता पर हमला होने का आरोप सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाता है।
हालांकि, इस घटना को किसी राजनीतिक दल की साजिश या सरकार के खिलाफ संगठित हमले के रूप में प्रस्तुत करने का प्रमाण नहीं मिला है।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल है कि आयोजन स्थल की सुरक्षा में क्या व्यवस्था थी, आरोपियों को मंच तक पहुँचने का मौका कैसे मिला और पुलिस जाँच में विवाद की वास्तविक वजह क्या सामने आती है।
प्रत्यक्षदर्शी का सवाल: जब किसी सार्वजनिक आयोजन में प्रदेश सरकार के मंत्री मौजूद हों, तब मंच पर हिंसा की घटना रोकने और शामिल लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होनी चाहिए?

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