SIR पर सुप्रीम कोर्ट में राहुल-ओवैसी की याचिकाएं, दिल्ली मेट्रो ने मांगी माफी; पुलिस ने क्या कहा?

SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष की याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं। दिल्ली मेट्रो ने 45 स्टेशनों पर पाबंदी को लेकर माफी मांगी, जबकि पुलिस ने अपनी कार्रवाई का बचाव किया है।

SIR Supreme Court Hearing: राहुल गांधी और ओवैसी की याचिकाएं सुनवाई के लिए सूचीबद्ध। दिल्ली मेट्रो की माफी, पुलिस का जवाब और CJP के अगले प्रदर्शन की जानकारी।

SIR पर सुप्रीम कोर्ट में बड़ा दिन, राहुल गांधी-ओवैसी की याचिकाएं सूचीबद्ध; दिल्ली पुलिस और मेट्रो से भी जवाब

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SIR और चुनाव आयोग से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की तैयारी, दिल्ली पुलिस और मेट्रो ने अपना पक्ष रखा।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली | 15 अक्टूबर 2026

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच गुरुवार, 15 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में कई महत्वपूर्ण मामले सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं। इनमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और अन्य विपक्षी नेताओं की याचिकाएं शामिल हैं। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी SIR को चुनौती दी है।
इसी बीच दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के दौरान मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदियां लगाने और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के मामलों में भी नए घटनाक्रम सामने आए हैं। दिल्ली मेट्रो ने सुप्रीम कोर्ट में बिना शर्त माफी मांगी है, जबकि दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अपनी कार्रवाई का बचाव किया है।

खबर में खास

  • राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं की SIR संबंधी याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में सूचीबद्ध।
  • असदुद्दीन ओवैसी ने भी मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया को चुनौती दी।

  • दिल्ली मेट्रो ने 45 स्टेशनों पर पाबंदियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट से माफी मांगी।

  • CJP ने 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस में तिरंगा प्रदर्शन करने की घोषणा की।

राहुल गांधी और ओवैसी की याचिकाओं में क्या मांग की गई है?

राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए हैं।
याचिका में मतदाता सूची से नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया की स्वतंत्र जाँच कराने की मांग की गई है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि SIR के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं।
याचिकाकर्ताओं ने चुनाव आयोग के संबंधित रिकॉर्ड अदालत के सामने रखने और विवादित निर्णयों की स्वतंत्र समीक्षा कराने का अनुरोध किया है।
दूसरी ओर, असदुद्दीन ओवैसी ने SIR लागू करने की प्रक्रिया को अलग याचिका के माध्यम से चुनौती दी है।
इन मामलों को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ के सामने सूचीबद्ध किया गया है।

दिल्ली मेट्रो ने सुप्रीम कोर्ट से माफी क्यों मांगी?

10 अक्टूबर को दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान मेट्रो स्टेशनों पर लगाई गई पाबंदियों को लेकर दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है।
DMRC की अध्यक्ष डी. तारा ने निगम की ओर से बिना शर्त माफी मांगी। हालांकि, निगम ने स्पष्ट किया कि उस दिन पूरी मेट्रो सेवा बंद नहीं की गई थी।
DMRC के अनुसार, दिल्ली मेट्रो के कुल 303 स्टेशनों में से 45 पर प्रवेश और निकास प्रतिबंधित था, जबकि 258 स्टेशन संचालित रहे।
इस दौरान 271 ट्रेनों ने कुल 4,157 फेरे लगाए। प्रमुख इंटरचेंज स्टेशनों पर लाइन बदलने की सुविधा भी जारी रही।
DMRC ने बताया कि 10 अक्टूबर को लगभग 32 लाख यात्रियों ने मेट्रो से सफर किया, जबकि सामान्य दूसरे शनिवार को यह संख्या करीब 58 लाख रहती है।

प्रदर्शनकारियों की हिरासत पर दिल्ली पुलिस ने क्या कहा?

दिल्ली पुलिस ने भी सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया है। पुलिस का कहना है कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा बनाए रखने के लिए आवश्यक प्रतिबंध लगाए गए थे।
पुलिस ने दावा किया कि संबंधित प्रतिबंधात्मक आदेशों के दायरे और कानून में निर्धारित शक्तियों के अनुसार ही कार्रवाई की गई।
पुलिस के अनुसार, प्रतिबंधित क्षेत्र से बाहर दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। बैरिकेडिंग और आवागमन से संबंधित व्यवस्थाओं की समीक्षा भी की जा रही है।
हालांकि, प्रदर्शनकारी संगठनों ने पुलिस पर शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को बाधित करने और अनावश्यक हिरासत के आरोप लगाए हैं।
इन आरोपों और पुलिस के जवाब का कानूनी परीक्षण अदालत में होना बाकी है।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की पाबंदी का मामला कहां पहुंचा?

दिल्ली पुलिस ने 11 अक्टूबर को जंतर-मंतर को निर्धारित विरोध प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया था।
इसके स्थान पर रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के CBD ग्राउंड को वैकल्पिक प्रदर्शन स्थल बनाया गया है।
इस फैसले को भी कानूनी चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि विरोध प्रदर्शन के लिए दूरस्थ स्थान निर्धारित करने से नागरिकों के शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर असर पड़ सकता है।
वहीं प्रशासन सार्वजनिक व्यवस्था और यातायात को ध्यान में रखते हुए प्रतिबंधों को जरूरी बता रहा है।

CJP ने 16 अक्टूबर को किस प्रदर्शन की घोषणा की?

जंतर-मंतर विवाद के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में तिरंगा प्रदर्शन आयोजित करने की घोषणा की है।
यह आह्वान संगठन के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के विरोध में किया गया है।
दीपके का कहना है कि शांतिपूर्ण तरीके से तिरंगा लेकर विरोध जताना अपराध नहीं है। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई का विरोध किया है।
हालांकि, प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति और उससे संबंधित कानूनी स्थिति पर अंतिम प्रशासनिक निर्णय की पुष्टि आवश्यक है।
फिलहाल SIR विवाद, दिल्ली में विरोध प्रदर्शन की पाबंदियां और पुलिस कार्रवाई के मामले अदालतों के सामने हैं। अब महत्वपूर्ण होगा कि सुप्रीम कोर्ट मतदाता सूची से जुड़ी याचिकाओं और प्रदर्शन संबंधी प्रतिबंधों पर आगे क्या निर्देश जारी करता है

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