अखिलेश के ‘सरप्राइज’ दांव से फंसा राज्यसभा की 10वीं सीट का गणित, क्या आठवां उम्मीदवार उतार पाएगी BJP?

धनराज नाथवानी के नामांकन के बाद तेज हुई क्रॉस वोटिंग की चर्चा, सपा को तीसरी और भाजपा को आठवीं सीट के लिए जुटाने होंगे अतिरिक्त विधायक

यूपी की 10 राज्यसभा सीटों में सात पर भाजपा और दो पर सपा की जीत आसान मानी जा रही है। असली मुकाबला 10वीं सीट पर है, जहां धनराज नाथवानी को उतारकर अखिलेश यादव ने सियासी लड़ाई दिलचस्प बना दी है। अब भाजपा के आठवें और सपा के तीसरे उम्मीदवार को लेकर नजरें टिकी हैं।

धनराज नाथवानी के नामांकन से बदला 10वीं सीट का मुकाबला, अब बागी विधायकों और सहयोगी दलों के वोट तय करेंगे किसका दांव पड़ेगा भारी

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धनराज नाथवानी को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद यूपी की 10वीं राज्यसभा सीट पर भाजपा और सपा का चुनावी गणित दिलचस्प हो गया है।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | उत्तर प्रदेश डेस्क | 30 सितंबर 2026

खबर में खास

  • यूपी की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान
  • सात सीटों पर भाजपा और दो पर सपा की स्थिति मजबूत
  • 10वीं सीट पर भाजपा-सपा के बीच हो सकता है सीधा मुकाबला
  • सपा ने रामगोपाल यादव और धनराज नाथवानी का कराया नामांकन
  • अतिरिक्त विधायकों और संभावित क्रॉस वोटिंग पर टिका चुनावी गणित
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के चुनाव में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उद्योगपति धनराज परिमल नाथवानी को उम्मीदवार बनाकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। सपा ने रामगोपाल यादव के साथ धनराज नाथवानी का नामांकन करा दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पार्टी तीसरा प्रत्याशी भी मैदान में उतारेगी और उसके जवाब में भाजपा अपना आठवां उम्मीदवार उतारने का फैसला करेगी?
विधानसभा की मौजूदा संख्या के आधार पर भाजपा की सात और समाजवादी पार्टी की दो सीटों पर जीत अपेक्षाकृत आसान मानी जा रही है। ऐसे में असली सियासी संघर्ष 10वीं सीट को लेकर हो सकता है। इस सीट पर जीत के लिए दोनों पक्षों को अपने निर्धारित समर्थन से बाहर के विधायकों का साथ जुटाना पड़ेगा।

धनराज नाथवानी के नाम पर क्यों बढ़ी चर्चा?

धनराज नाथवानी रिलायंस इंडस्ट्रीज में वरिष्ठ पद पर कार्यरत हैं और गुजरात से उनका मजबूत संबंध है। उनके पिता परिमल नाथवानी झारखंड से भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा पहुंचे हैं। ऐसे में अखिलेश यादव द्वारा धनराज को यूपी से सपा उम्मीदवार बनाए जाने को सामान्य राजनीतिक चयन से अलग देखा जा रहा है।
धनराज नाथवानी और रामगोपाल यादव नामांकन दाखिल कर चुके हैं। सपा ने अभी तीसरे उम्मीदवार के नाम की औपचारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन तीसरा प्रत्याशी उतारे जाने की संभावना ने भाजपा की रणनीति पर भी सवाल खड़ा कर दिया है। 

सपा को तीसरी सीट के लिए चाहिए अतिरिक्त समर्थन

रिपोर्ट के मुताबिक, एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए करीब 38 विधायकों के वोट की आवश्यकता पड़ सकती है। सपा अपने उपलब्ध विधायकों और कांग्रेस के समर्थन से दो सीटें निकालने की स्थिति में है, लेकिन तीसरी सीट के लिए उसे लगभग 14 अतिरिक्त वोट जुटाने पड़ सकते हैं।
ऐसे में सपा की नजर अपने बागी या नाराज विधायकों को वापस साथ लाने के अलावा भाजपा के सहयोगी दलों के विधायकों पर भी रह सकती है। सुभासपा और आरएलडी के कुछ विधायक पहले सपा से जुड़े रहे हैं। हालांकि क्रॉस वोटिंग से संबंधित कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है और अंतिम स्थिति मतदान के समय ही स्पष्ट होगी।

भाजपा की आठवीं सीट का क्या है समीकरण?

भाजपा को सात सीटें जीतने के बाद आठवीं सीट के लिए अतिरिक्त विधायकों की जरूरत होगी। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सपा के तीन बागी विधायकों और राजा भैया की जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के दो विधायकों का समर्थन मिलने के बाद भी भाजपा को कुछ और वोट जुटाने पड़ सकते हैं।
यही कारण है कि भाजपा की ओर से आठवां उम्मीदवार उतारने का फैसला बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अगर दोनों दल अतिरिक्त उम्मीदवार मैदान में उतारते हैं तो मतदान तय होगा और यूपी में क्रॉस वोटिंग की संभावना भी बढ़ जाएगी। फिलहाल भाजपा ने अपने प्रत्याशियों की पूरी सूची सार्वजनिक नहीं की है।

2027 से पहले विधायकों की निष्ठा का परीक्षण

यह राज्यसभा चुनाव केवल एक संसदीय सीट की लड़ाई तक सीमित नहीं रहेगा। विधानसभा चुनाव 2027 से पहले इसके जरिए भाजपा और सपा दोनों को अपने विधायकों तथा सहयोगी दलों की वास्तविक ताकत का पता चलेगा।
पिछले राज्यसभा चुनाव में भी क्रॉस वोटिंग ने सपा का गणित बिगाड़ दिया था। इस बार अखिलेश यादव पहले से अधिक सतर्क दिखाई दे रहे हैं। दूसरी तरफ भाजपा को तय करना है कि वह सुरक्षित सीटों तक सीमित रहेगी या आठवां उम्मीदवार उतारकर मुकाबले को आर-पार की लड़ाई बनाएगी।

धनराज नाथवानी का नाम केवल एक उम्मीदवार की घोषणा नहीं, बल्कि 10वीं राज्यसभा सीट के लिए अखिलेश यादव का बड़ा सियासी दांव माना जा रहा है। अब फैसला भाजपा के आठवें और सपा के संभावित तीसरे उम्मीदवार पर टिका है—अगर दोनों मैदान में आए तो 16 अक्टूबर का मतदान UP Election 2027 से पहले विधायकों की निष्ठा की सबसे बड़ी परीक्षा बन सकता है।

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