दिल्ली मार्च में राहुल से पीछे क्यों रहे अखिलेश? SP बोली—2 दिन से 102° बुखार था
CEC विरोधी मार्च में राहुल गांधी से एक कतार पीछे चलने और कम सक्रिय दिखने पर उठे थे सवाल; पार्टी ने गठबंधन में दरार की अटकलें खारिज कीं, अखिलेश ने खुद कहा था—‘स्वास्थ्य साथ नहीं दे रहा’
दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्षी मार्च के दौरान अखिलेश यादव के शांत और राहुल गांधी से पीछे दिखाई देने के बाद SP-कांग्रेस के रिश्तों को लेकर सवाल उठे थे। अब समाजवादी पार्टी ने कहा है कि इसकी वजह राजनीतिक दूरी नहीं बल्कि अखिलेश की खराब सेहत थी। पार्टी प्रवक्ता के मुताबिक उन्हें दो दिनों से 102 डिग्री से ज्यादा बुखार था, फिर भी वह सुबह लखनऊ से दिल्ली पहुंचे और प्रदर्शन में शामिल हुए।
राहुल से दूरी के कयास पर SP ने दी सफाई
SP ने कहा कि अखिलेश यादव खराब सेहत के बावजूद दिल्ली प्रदर्शन में पहुंचे थे।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | उत्तर प्रदेश डेस्क | 7 अक्टूबर 2026
खबर में खास
6 अक्टूबर को दिल्ली में विपक्ष का चुनाव आयोग के खिलाफ मार्च
राहुल गांधी और अखिलेश यादव दोनों प्रदर्शन में मौजूद रहे
अखिलेश राहुल से एक कतार पीछे चलते नजर आए
पहले जैसी राजनीतिक गर्मजोशी न दिखने पर उठे सवाल
UP 2027 की seat-sharing बहस ने अटकलों को और बढ़ाया
SP ने किसी राजनीतिक दूरी से इनकार किया
पार्टी प्रवक्ता का दावा—अखिलेश को दो दिनों से 102° से ज्यादा बुखार
डॉक्टरों ने आराम की सलाह दी थी
इसके बावजूद अखिलेश सुबह 7:30 बजे की फ्लाइट से दिल्ली पहुंचे
करीब 9 बजे दिल्ली पहुंचकर सीधे प्रदर्शन स्थल गए
अखिलेश ने खुद भी कहा—स्वास्थ्य साथ नहीं दे रहा
SP के लोकसभा और राज्यसभा सांसद भी मार्च में शामिल हुए
SP का कहना—कांग्रेस के साथ विपक्षी मुद्दों पर साथ जारी रहेगा
सीट-बंटवारे पर दोनों दलों के बीच अंतिम समझौता अभी घोषित नहीं हुआ है
दिल्ली मार्च की एक तस्वीर से क्यों शुरू हुई सियासी चर्चा?
लखनऊ/नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और SIR के मुद्दे पर 6 अक्टूबर को दिल्ली में हुए विपक्षी प्रदर्शन के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक अलग चर्चा शुरू हो गई।
मार्च में राहुल गांधी और अखिलेश यादव दोनों मौजूद थे, लेकिन कई तस्वीरों और वीडियो में सपा प्रमुख राहुल गांधी से एक कतार पीछे अपने सांसदों के साथ चलते दिखाई दिए।
राहुल गांधी जहां प्रदर्शन के दौरान बैरिकेड पर चढ़े और बाद में प्रियंका गांधी के साथ लंबे समय तक धरने पर बैठे, वहीं अखिलेश अपेक्षाकृत शांत नजर आए। इसी दृश्य के बाद सवाल उठने लगे कि क्या UP 2027 के सीट-बंटवारे को लेकर SP और कांग्रेस में बढ़ी बयानबाजी का असर दोनों नेताओं के रिश्तों पर भी दिखाई दे रहा है।
SP ने कहा—राजनीतिक दूरी नहीं, वजह खराब सेहत थी
अब समाजवादी पार्टी ने इन अटकलों पर सफाई दी है।
पार्टी प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने कहा कि अखिलेश यादव के धीमे और कम सक्रिय दिखने की वजह कांग्रेस से कोई नाराजगी नहीं थी।
उनके मुताबिक अखिलेश को पिछले दो दिनों से 102 डिग्री से ज्यादा बुखार चल रहा था। डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी थी, लेकिन वह इसके बावजूद प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंचे।
यह 102° बुखार की जानकारी पार्टी प्रवक्ता का सार्वजनिक दावा है; इसका कोई स्वतंत्र मेडिकल रिकॉर्ड सार्वजनिक नहीं किया गया है।
सुबह 7:30 बजे लखनऊ से निकले अखिलेश
पार्टी के मुताबिक अखिलेश यादव ने खराब स्वास्थ्य के बावजूद कार्यक्रम रद्द नहीं किया।
वह सुबह करीब 7:30 बजे की फ्लाइट से लखनऊ से दिल्ली के लिए रवाना हुए और करीब 9 बजे दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचने के बाद सीधे विरोध प्रदर्शन स्थल गए।
SP का तर्क है कि अगर कांग्रेस के साथ राजनीतिक दूरी ही वजह होती, तो खराब सेहत के बावजूद अखिलेश को खास तौर पर दिल्ली आने की जरूरत नहीं थी।
अखिलेश ने खुद भी दिया था सेहत का संकेत
अखिलेश यादव ने प्रदर्शन के दौरान अपनी तबीयत का जिक्र खुद भी किया था।
पुलिस की बैरिकेडिंग के बीच उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा:
“स्वास्थ्य साथ नहीं दे रहा है, नहीं तो अभी बैरिकेडिंग तोड़ देते।”
उनका यह बयान 6 अक्टूबर को प्रदर्शन स्थल पर ही सामने आया था।
यानी कम से कम यह बात अखिलेश के अपने बयान से भी पुष्ट होती है कि उस दिन उनकी तबीयत पूरी तरह ठीक नहीं थी।
पिछली बार बैरिकेड फांद चुके थे अखिलेश
अखिलेश के इस बयान का संदर्भ एक पुराने विरोध प्रदर्शन से भी जुड़ा था।
2025 में विपक्ष के चुनाव आयोग की ओर मार्च के दौरान पुलिस ने नेताओं को बैरिकेडिंग लगाकर रोका था। उस समय अखिलेश यादव बैरिकेड पार करते दिखाई दिए थे और उसका वीडियो काफी चर्चा में रहा था।
यही वजह है कि इस बार उनका अपेक्षाकृत शांत रहना ज्यादा नजर आया।
इस बार राहुल गांधी ज्यादा आक्रामक दिखाई दिए
6 अक्टूबर के प्रदर्शन में राहुल गांधी विपक्षी मार्च के प्रमुख चेहरों में रहे।
वह पुलिस बैरिकेड पर चढ़े, तिरंगा लहराया और बाद में प्रियंका गांधी समेत दूसरे सांसदों के साथ धरने पर बैठे। बाद में पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया। The Indian Express
इसके मुकाबले अखिलेश अधिकतर अपने सांसदों के साथ दिखाई दिए।
इसी visual contrast को लेकर “दो लड़कों” की राजनीतिक जोड़ी में दूरी के कयास शुरू हुए थे।
क्या सच में SP-कांग्रेस में सब ठीक है?
यहां दो अलग बातों को अलग रखना जरूरी है।
पहली: दिल्ली प्रदर्शन में अखिलेश के कम सक्रिय दिखने की वजह SP ने उनकी तबीयत बताई है और अखिलेश ने भी खुद खराब स्वास्थ्य का जिक्र किया था।
दूसरी: UP 2027 के सीट-बंटवारे पर SP और कांग्रेस के बीच सार्वजनिक बयानबाजी वास्तव में चल रही है और अंतिम formula अभी तय नहीं हुआ है।
इसलिए सिर्फ मार्च की तस्वीरों से गठबंधन टूटने का निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा, लेकिन सीट-sharing को लेकर दोनों पार्टियों के बीच बातचीत अभी बाकी है।
कांग्रेस की 200 सीटों की बात से क्यों बढ़ी थी चर्चा?
हाल के दिनों में कांग्रेस के कुछ नेताओं ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बड़ी हिस्सेदारी की बात उठाई है।
प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने करीब 200 सीटों की बात की थी और गठबंधन में “बराबर हिस्सेदारी और बराबर सम्मान” की मांग रखी। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम संख्या पार्टी की वरिष्ठ लीडरशिप तय करेगी।
इसके जवाब में SP के कुछ नेताओं ने कांग्रेस को सीटों की मांग सार्वजनिक रूप से मीडिया में रखने के बजाय सीधे अखिलेश यादव से बातचीत करने की सलाह दी।
अखिलेश का सीट-बंटवारे पर क्या रुख है?
अखिलेश यादव सार्वजनिक तौर पर कह चुके हैं कि गठबंधन में चर्चा सिर्फ सीटों की संख्या तक सीमित नहीं होनी चाहिए।
उनका कहना है कि लक्ष्य चुनावी जीत होना चाहिए और सीटों के फैसले में winnability यानी कौन किस सीट पर ज्यादा मजबूत है, इसे महत्व मिलना चाहिए।
इसलिए अभी SP-कांग्रेस के बीच कोई अंतिम seat-sharing agreement घोषित नहीं हुआ है।
क्या SP नेताओं ने मार्च में पूरी ताकत दिखाई?
SP प्रवक्ता ने अपनी सफाई में यह भी कहा कि पार्टी के लोकसभा और राज्यसभा सांसद विरोध मार्च में पूरी तरह शामिल थे।
अखिलेश यादव के साथ SP सांसद पुलिस बैरिकेडिंग तक पहुंचे और कई नेता प्रदर्शन के दौरान सक्रिय दिखाई दिए।
पार्टी इसी आधार पर कह रही है कि दिल्ली प्रदर्शन को कांग्रेस से दूरी के संकेत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
अखिलेश ने प्रदर्शन में क्या कहा?
अखिलेश यादव ने अपने स्वास्थ्य के अलावा चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने आयोग की निष्पक्षता पर आरोप लगाए और उत्तर प्रदेश में Form-7 तथा मतदाता सूची से जुड़े मामलों का जिक्र किया। Live Hindustan
ये अखिलेश यादव के राजनीतिक आरोप हैं। चुनाव आयोग विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे पक्षपात के आरोपों को स्वीकार नहीं करता और अपनी प्रक्रियाओं को कानून के अनुरूप बताता रहा है। Reuters
तो राहुल-अखिलेश रिश्ते पर अभी निष्कर्ष क्या?
फिलहाल उपलब्ध तथ्यों से सिर्फ इतना कहा जा सकता है कि दिल्ली मार्च के दृश्य के बाद दोनों नेताओं के बीच दूरी के कयास लगाए गए।
SP ने इसका कारण अखिलेश की खराब सेहत बताया है और गठबंधन में राजनीतिक दरार के दावे से इनकार किया है।
वहीं दूसरी तरफ 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए सीट-sharing का सवाल अभी भी खुला है। इसलिए आगे दोनों पार्टियों के शीर्ष नेतृत्व की औपचारिक बातचीत ही उनके चुनावी रिश्ते की सही तस्वीर साफ करेगी
दिल्ली प्रदर्शन में अखिलेश यादव के शांत दिखाई देने से SP-कांग्रेस की दूरी को लेकर चर्चा जरूर शुरू हुई, लेकिन समाजवादी पार्टी ने इसे राजनीतिक संकेत मानने से साफ इनकार किया है। पार्टी का कहना है कि अखिलेश 102 डिग्री बुखार के बावजूद लखनऊ से दिल्ली पहुंचे थे, जबकि अखिलेश खुद भी खराब स्वास्थ्य का जिक्र कर चुके हैं। फिलहाल असली राजनीतिक परीक्षा तस्वीरों की नहीं, UP 2027 के सीट-बंटवारे की होगी—जिस पर दोनों पार्टियों के बीच अंतिम समझौता अभी होना बाकी है।