‘27 में कृष्ण आएंगे’ और ‘दोगलों से सावधान’: लखनऊ में BJP-सपा-BSP के पोस्टरों पर सियासत

भाजपा दफ्तर के बाहर मोदी-योगी को राम-कृष्ण के रूप में दिखाया गया, सपा कार्यालय के सामने अखिलेश का पोस्टर लगा। मायावती के समर्थन में लाल टोपी पर कटाक्ष।

लखनऊ में BJP मुख्यालय के बाहर मोदी-योगी, सपा कार्यालय के सामने अखिलेश और मायावती के समर्थन में लगे पोस्टरों पर राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है। जानिए पूरा मामला।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | लखनऊ | 5 नवंबर 2026
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लखनऊ में 5 नवंबर को भाजपा, सपा और मायावती के समर्थन में लगे अलग-अलग पोस्टर राजनीतिक चर्चा में रहे।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राजधानी लखनऊ में पोस्टरों के जरिए नया राजनीतिक विवाद सामने आया है। भाजपा मुख्यालय के बाहर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भगवान राम और श्रीकृष्ण के रूप में दिखाने वाला पोस्टर लगाया गया है। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी कार्यालय के बाहर अखिलेश यादव की तस्वीर के साथ ‘27 में कृष्ण आएंगे’ लिखा गया है। इसी बीच मायावती के समर्थन में लगे पोस्टर पर लाल टोपी के साथ ‘दोगलों से सावधान’ का संदेश भी चर्चा में है।

खबर में खास

  • भाजपा कार्यालय के बाहर मोदी और योगी को राम-कृष्ण के रूप में दिखाया गया।
  • सपा दफ्तर के सामने ‘27 में कृष्ण आएंगे’ वाली होर्डिंग लगी।
  • मायावती के समर्थन वाले पोस्टर में लाल टोपी पर कटाक्ष।
  • तीनों पोस्टर 5 नवंबर को यूपी की राजनीतिक चर्चा में आए।
  • पोस्टरों को पार्टी नेतृत्व का आधिकारिक चुनावी नारा घोषित नहीं किया गया है।

भाजपा मुख्यालय के बाहर मोदी-योगी वाला पोस्टर

लखनऊ में भाजपा मुख्यालय के बाहर एक पोस्टर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भगवान राम और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भगवान श्रीकृष्ण के रूप में दर्शाया गया है।
पोस्टर में वर्ष 2027 में श्रीकृष्ण को लाने का राजनीतिक नारा लिखा गया है।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, यह पोस्टर भाजपा कार्यकर्ता रणजीत सिंह ने लगवाया है।
हालांकि, किसी कार्यकर्ता द्वारा लगवाए गए पोस्टर को भाजपा नेतृत्व का आधिकारिक चुनावी नारा मानना सही नहीं होगा।

सपा कार्यालय के बाहर अखिलेश और श्रीकृष्ण

समाजवादी पार्टी कार्यालय के बाहर भी भगवान श्रीकृष्ण के नाम पर राजनीतिक होर्डिंग लगाई गई है।
इसमें सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और भगवान श्रीकृष्ण की तस्वीरों के साथ ‘27 में कृष्ण आएंगे’ लिखा गया है।
इसके अलावा एक अन्य पोस्टर में कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान का विरोध किया गया है।
धीरेंद्र शास्त्री ने मध्य प्रदेश में रामकथा के दौरान भगवान राम और श्रीकृष्ण की तुलना की थी। उनके बयान पर विवाद होने के बाद उन्होंने स्पष्टीकरण देकर माफी मांगी थी।
अखिलेश यादव ने भी उनकी टिप्पणी पर आपत्ति जताई थी। अब उसी विवाद के बीच सपा कार्यालय के बाहर नए पोस्टर सामने आए हैं।

मायावती के समर्थन में ‘दोगलों से सावधान’

इन दोनों पोस्टरों के बीच लखनऊ में मायावती की तस्वीर और बसपा के नाम वाले बैनर भी लगाए गए हैं।
इनमें लाल टोपी के साथ ‘दोगलों से सावधान’ लिखा गया है। लाल टोपी को सामान्यतः समाजवादी पार्टी के राजनीतिक पहनावे से जोड़ा जाता है।
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि पोस्टर किस व्यक्ति या संगठन ने लगवाए। बसपा नेतृत्व की ओर से इस विशेष पोस्टर को आधिकारिक रूप से जारी किए जाने की पुष्टि भी नहीं हुई है।

मायावती की बैठक वाले दिन क्यों चर्चा?

गुरुवार को ही बसपा प्रमुख मायावती ने लखनऊ के माल एवेन्यू स्थित पार्टी मुख्यालय पर संगठनात्मक समीक्षा बैठक बुलाई है।
इसमें प्रदेश के सभी 75 जिलों के जिलाध्यक्षों और वरिष्ठ पदाधिकारियों को बुलाया गया। बैठक का उद्देश्य विधानसभा चुनाव से पहले संगठन की स्थिति, संभावित उम्मीदवारों और जनसंपर्क की तैयारियों की समीक्षा करना है।
इसी दिन मायावती के समर्थन में सपा पर कटाक्ष वाले पोस्टर दिखाई देने से दोनों घटनाक्रमों को राजनीतिक चर्चा में जोड़ा जा रहा है। लेकिन बैठक और पोस्टरों के बीच किसी आधिकारिक समन्वय की पुष्टि नहीं हुई है।

क्या पोस्टर ही पार्टियों की चुनावी रणनीति हैं?

लखनऊ में सामने आए इन पोस्टरों से अलग-अलग राजनीतिक समर्थकों के संदेश स्पष्ट होते हैं।
भाजपा कार्यकर्ता ने धार्मिक प्रतीकों के माध्यम से मोदी-योगी का चित्रण किया है। सपा से जुड़े पोस्टरों में अखिलेश और श्रीकृष्ण का उल्लेख है, जबकि मायावती के समर्थन वाले पोस्टर में सपा पर कटाक्ष किया गया है।
सबसे महत्वपूर्ण अंतर यह है कि कार्यकर्ताओं और समर्थकों के पोस्टरों को पार्टी के आधिकारिक फैसले या चुनावी घोषणापत्र के बराबर नहीं माना जा सकता।
2027 के चुनाव से पहले राजनीतिक बयानबाजी और प्रतीकों का इस्तेमाल चर्चा में है। अब देखना होगा कि इन पोस्टरों पर संबंधित दलों के नेतृत्व की कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने आती है या नहीं।

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