राम आसरे कुशवाहा के सपा में आते ही केशव मौर्य ने याद दिलाया 2022, अखिलेश यादव पर कसा तंज; क्या कहा?

राम आसरे कुशवाहा के BJP छोड़कर सपा में लौटने के बाद डिप्टी CM केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने 2022 चुनाव से पहले सपा में शामिल हुए कई OBC नेताओं का जिक्र करते हुए पुरानी रणनीति की याद दिलाई।

पूर्व मंत्री राम आसरे कुशवाहा के BJP छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल होने के बाद यूपी के डिप्टी CM केशव प्रसाद मौर्य ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर निशाना साधा है। मौर्य ने 2022 विधानसभा चुनाव से पहले स्वामी प्रसाद मौर्य, दारा सिंह चौहान और धर्म सिंह सैनी जैसे नेताओं के सपा में जाने की याद दिलाई। उनका कहना है कि उस समय भी जातीय समीकरण बनाने की कोशिश हुई थी। राम आसरे कुशवाहा छह बार मंत्री रह चुके हैं और करीब 13 साल बाद सपा में वापस आए हैं।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | लखनऊ | 18 सितंबर 2026

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राम आसरे कुशवाहा की सपा में वापसी के बाद केशव प्रसाद मौर्य ने 2022 चुनाव का जिक्र कर अखिलेश यादव पर निशाना साधा।

खबर में खास

  • राम आसरे कुशवाहा ने BJP छोड़कर ज्वाइन की सपा
  • करीब 13 साल बाद हुई समाजवादी पार्टी में वापसी
  • केशव मौर्य ने अखिलेश को याद दिलाया 2022 का चुनाव
  • स्वामी प्रसाद, दारा सिंह चौहान और धर्म सिंह सैनी का किया जिक्र
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले नेताओं के दल बदलने के साथ सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है।
छह बार मंत्री रह चुके राम आसरे कुशवाहा के BJP छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल होने के एक दिन बाद डिप्टी CM केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव पर निशाना साधा है।

केशव मौर्य ने क्यों याद दिलाया 2022?

केशव प्रसाद मौर्य ने सोशल मीडिया के जरिए अखिलेश यादव की 2022 विधानसभा चुनाव से पहले अपनाई गई रणनीति का जिक्र किया।
उनका इशारा उन नेताओं की तरफ था जो 2022 चुनाव से पहले BJP छोड़कर समाजवादी पार्टी के साथ आए थे।
इनमें स्वामी प्रसाद मौर्य, दारा सिंह चौहान और धर्म सिंह सैनी जैसे OBC नेताओं के नाम शामिल थे। उस समय ओम प्रकाश राजभर की सुभासपा और जयंत चौधरी की RLD भी सपा के साथ थी।
मौर्य का तर्क है कि अलग-अलग जातीय और राजनीतिक समीकरण बनाने के बावजूद 2022 में समाजवादी पार्टी सत्ता में नहीं आ सकी। यह BJP नेता का राजनीतिक आकलन है, चुनावी नतीजों का भविष्यवाणी-सूचक निष्कर्ष नहीं।

एक दिन पहले सपा में लौटे राम आसरे कुशवाहा

राम आसरे कुशवाहा ने 17 सितंबर को BJP छोड़कर समाजवादी पार्टी की सदस्यता ली थी।
उनकी सपा में करीब 13 साल बाद वापसी हुई है। वह पहले समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव भी रह चुके हैं। 2013 में उन्हें इस पद से हटा दिया गया था और बाद में उन्होंने BJP का दामन थाम लिया था।
सपा में वापसी के बाद कुशवाहा ने मुलायम सिंह यादव को याद किया और अपने समर्थकों से अखिलेश यादव के नेतृत्व में पार्टी के लिए काम करने की अपील की।

कौन हैं राम आसरे कुशवाहा?

राम आसरे कुशवाहा की राजनीतिक पहचान मुख्य रूप से OBC नेता के तौर पर रही है।
उन्होंने अपना राजनीतिक सफर BSP से शुरू किया था और 1996 में कानपुर के सरसौल क्षेत्र से विधायक चुने गए थे। बाद में वह समाजवादी पार्टी में आए और अलग-अलग सरकारों में जिम्मेदारियां संभालीं। रिपोर्टों के मुताबिक वह उत्तर प्रदेश सरकार में छह बार मंत्री रहे हैं।

कानपुर-बुंदेलखंड पर क्यों हो रही चर्चा?

राम आसरे कुशवाहा कानपुर क्षेत्र से आते हैं और कुशवाहा समुदाय के पुराने राजनीतिक चेहरों में गिने जाते हैं।
इसी वजह से उनकी सपा में वापसी को 2027 से पहले गैर-यादव OBC समीकरण के संदर्भ में देखा जा रहा है। सपा अपनी PDA रणनीति के तहत पिछड़े वर्ग के अलग-अलग सामाजिक समूहों तक पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
हालांकि राम आसरे कुशवाहा की वापसी से 2027 के चुनाव में मतदाताओं के व्यवहार पर कितना असर पड़ेगा, इसका अभी तथ्यात्मक आकलन नहीं किया जा सकता।

2022 में क्या हुआ था?

2022 विधानसभा चुनाव से पहले भी उत्तर प्रदेश में बड़े स्तर पर राजनीतिक दल-बदल हुआ था।
स्वामी प्रसाद मौर्य, दारा सिंह चौहान और धर्म सिंह सैनी जैसे नेता BJP छोड़कर सपा खेमे में पहुंचे थे। सपा ने RLD और सुभासपा समेत कई दलों के साथ चुनावी गठजोड़ भी किया था।
अब राम आसरे कुशवाहा की सपा में वापसी के बाद केशव प्रसाद मौर्य ने उसी चुनाव का जिक्र कर अखिलेश यादव की मौजूदा रणनीति पर सवाल उठाया है।
2027 से पहले OBC नेताओं को लेकर BJP और सपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी आगे भी प्रमुख मुद्दा रह सकती है, लेकिन किसी एक नेता के दल बदलने का चुनावी प्रभाव अभी तय नहीं माना जा सकता।

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