जाति प्रमाण पत्र के लिए ₹50 हजार? ऑडियो लेकर DM के पास पहुंचा युवक, लेखपाल सस्पेंड
बलिया के सुल्तानपुर गांव का मामला; शिकायतकर्ता ने दो मोबाइल ऑडियो रिकॉर्डिंग सौंपीं, शुरुआती जांच में आवाज की पहचान स्पष्ट नहीं—विभागीय जांच से तय होगी आरोपों की सच्चाई
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उत्तर प्रदेश के बलिया में जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए प्रति आवेदन ₹50 हजार मांगने के आरोप के बाद एक क्षेत्रीय लेखपाल को निलंबित कर दिया गया है। शिकायतकर्ता सुरेंद्र प्रसाद तुरैहा ने जिलाधिकारी से शिकायत करते हुए दो ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सौंपी थीं। प्राथमिक जांच में रिकॉर्डिंग में बोलने वाले व्यक्ति की पहचान स्पष्ट नहीं हुई, लेकिन शिकायतकर्ता ने आवाज लेखपाल संदीप सिंह की बताई है। अब विभागीय जांच शुरू की गई है।
दो ऑडियो के बाद एक्शन, अब विभागीय जांच खोलेगी पूरा मामला
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | उत्तर प्रदेश डेस्क | 6 अक्टूबर 2026
खबर में खास
- मामला उत्तर प्रदेश के बलिया जिले का
- जाति प्रमाण पत्र के लिए ₹50 हजार प्रति आवेदन मांगने का आरोप
- शिकायतकर्ता सुरेंद्र प्रसाद तुरैहा
- आरोप तहसील सदर के सुल्तानपुर गांव के क्षेत्रीय लेखपाल पर
- शिकायत के साथ दो ऑडियो रिकॉर्डिंग भी दी गईं
- रिकॉर्डिंग की तारीख 8 अप्रैल और 17 सितंबर 2026 बताई गई
- शुरुआती जांच में आवाज की पहचान स्पष्ट नहीं हो सकी
- शिकायतकर्ता का दावा—आवाज लेखपाल संदीप सिंह की
- ऑडियो में कथित तौर पर अधिकारियों को हिस्सा देने की भी बात
- जिलाधिकारी के निर्देश पर लेखपाल तत्काल प्रभाव से निलंबित
- विभागीय जांच शुरू
- निलंबन के दौरान भूलेख कार्यालय से संबद्ध
- मुख्यालय छोड़ने के लिए सक्षम अधिकारी की अनुमति जरूरी
- DM ने दूसरे अधिकारियों-कर्मचारियों को भी भ्रष्टाचार पर सख्त चेतावनी दी
जाति प्रमाण पत्र के लिए ₹50 हजार मांगने का आरोप
बलिया: उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में जाति प्रमाण पत्र बनवाने के नाम पर ₹50 हजार की कथित रिश्वत मांगने का मामला सामने आया है। शिकायत जिलाधिकारी तक पहुंचने के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए तहसील सदर के राजस्व ग्राम सुल्तानपुर के क्षेत्रीय लेखपाल संदीप सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
लेखपाल के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू की गई है। अब जांच में यह तय किया जाएगा कि शिकायत में लगाए गए आरोप और सौंपी गई ऑडियो रिकॉर्डिंग कितनी सही हैं।
शिकायत किसने की?
यह मामला सुल्तानपुर निवासी सुरेंद्र प्रसाद तुरैहा की शिकायत से सामने आया।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि तुरैहा जाति का जाति प्रमाण पत्र जारी कराने के लिए क्षेत्रीय लेखपाल और अन्य राजस्व कर्मचारियों की ओर से प्रति आवेदन ₹50 हजार की मांग की गई। Purvanchal24
शिकायत सिर्फ मौखिक नहीं थी। प्रशासन को मोबाइल पर हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग भी उपलब्ध कराई गई।
दो Audio Recording बनीं जांच का बड़ा आधार
शिकायतकर्ता ने अधिकारियों को दो अलग-अलग ऑडियो रिकॉर्डिंग सौंपीं।
इनकी तारीख क्रमशः:
8 अप्रैल 2026
17 सितंबर 2026
बताई गई है। Jagran
इन रिकॉर्डिंग्स का प्राथमिक स्तर पर परीक्षण किया गया, लेकिन इस शुरुआती जांच में बातचीत करने वाले व्यक्ति की पहचान स्पष्ट रूप से स्थापित नहीं हो सकी।
शिकायतकर्ता ने किसकी आवाज बताई?
भले ही शुरुआती परीक्षण में आवाज की पहचान साफ नहीं हो सकी, लेकिन शिकायतकर्ता ने दावा किया कि रिकॉर्डिंग में सुनाई दे रही आवाज क्षेत्रीय लेखपाल संदीप सिंह की है। Purvanchal24
यही कारण है कि खबर में यह नहीं लिखा जाना चाहिए कि ऑडियो में लेखपाल की आवाज “साबित” हो गई है।
फिलहाल यह शिकायतकर्ता का दावा है और विभागीय जांच बाकी है।
Audio में अधिकारियों को हिस्सा देने की भी कथित बात
प्राथमिक रिपोर्ट में ऑडियो की बातचीत को लेकर एक और गंभीर दावा सामने आया।
बताया गया कि रिकॉर्डिंग में कथित तौर पर जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए ₹50 हजार प्रति आवेदन की रकम मांगने और उस रकम का एक हिस्सा अधिकारियों को दिए जाने की बात भी सुनाई देती है। Jagran
हालांकि यह बातचीत किसकी है और आरोपों में कितनी सच्चाई है, इसका अंतिम निष्कर्ष विभागीय जांच के बाद ही सामने आएगा।
पैसे के बाद Online Apply कराने की कथित बातचीत
रिपोर्ट के मुताबिक ऑडियो रिकॉर्डिंग में कथित रूप से यह भी कहा गया कि पहले पैसे दिए जाएं, उसके बाद ऑनलाइन आवेदन कराया जाए और अगले दिन उसे बांसडीह कचहरी पहुंचाया जाए। Jagran
यह दावा भी जांच का हिस्सा होगा।
इसी वजह से प्रशासन ने पूरे मामले को सिर्फ सामान्य शिकायत न मानकर गंभीर भ्रष्टाचार और अवैध धन उगाही से जुड़ा मामला माना है।
पहले के आवेदन क्यों हुए थे निरस्त?
इस मामले में एक अहम दूसरा पक्ष भी सामने आया है।
तहसील स्तर की रिपोर्ट के मुताबिक शिकायतकर्ता की ओर से पहले भी जाति प्रमाण पत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन किए गए थे।
लेकिन जरूरी साक्ष्य और दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण उन आवेदनों को नियमानुसार रिपोर्ट के साथ निस्तारित या निरस्त कर दिया गया था। Jagran
इसलिए जांच में यह भी देखा जाएगा कि प्रमाण पत्र न बनने की वजह सिर्फ दस्तावेजों की कमी थी या उसके बाद वास्तव में पैसे की मांग की गई।
तहसीलदार की रिपोर्ट के बाद हुआ एक्शन
मामले की शिकायत मिलने के बाद तहसील सदर स्तर पर जांच कर रिपोर्ट तैयार की गई।
सोमवार को यह रिपोर्ट अधिकारियों के सामने रखी गई। रिपोर्ट में आरोपों को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच के लिए संबंधित लेखपाल को निलंबित करने और विभागीय जांच कराने की संस्तुति की गई।
इसके बाद जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह के निर्देश पर लेखपाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
निलंबन के बाद कहां रहेंगे लेखपाल?
निलंबन के दौरान संदीप सिंह को तहसील बलिया के भूलेख कार्यालय से संबद्ध किया गया है।
आदेश के मुताबिक वह सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे।
मामले की विभागीय जांच के लिए जांच अधिकारी नियुक्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
क्या रिश्वत मांगना साबित हो गया?
अभी नहीं।
इस खबर में यह सबसे जरूरी तथ्य है।
लेखपाल को आरोप और प्राथमिक रिपोर्ट के आधार पर निलंबित किया गया है, लेकिन विभागीय जांच पूरी नहीं हुई है।
खास तौर पर ऑडियो रिकॉर्डिंग में बोलने वाले व्यक्ति की पहचान शुरुआती जांच में स्पष्ट नहीं हुई। इसलिए अभी यह लिखना गलत होगा कि लेखपाल ने ₹50 हजार रिश्वत मांगी थी और आरोप साबित हो गया है।
सही भाषा है:
“₹50 हजार मांगने का आरोप”
और
“शिकायत के बाद लेखपाल निलंबित”
DM ने कर्मचारियों को दी चेतावनी
कार्रवाई के बाद जिले के अधिकारियों और कर्मचारियों को भी स्पष्ट संदेश दिया गया है।
जिलाधिकारी ने चेतावनी दी कि सरकारी कार्यों के बदले अवैध धन की मांग या भ्रष्टाचार में संलिप्तता की शिकायत मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। Jagran
अधिकारियों-कर्मचारियों को सरकारी काम पारदर्शिता के साथ करने के निर्देश दिए गए हैं।
जाति प्रमाण पत्र के लिए रिश्वत मांगे तो कहां शिकायत करें?
इस खबर को reader के लिए उपयोगी बनाने वाला यह point जरूर रखें।
उत्तर प्रदेश सरकार का Anti-Corruption Portal सरकारी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत ऑनलाइन दर्ज करने की सुविधा देता है। शिकायत के बाद कार्रवाई की स्थिति भी देखी जा सकती है। Jan Sunwai
इसके अलावा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर भी शिकायत की जा सकती है। बलिया जिला प्रशासन की आधिकारिक हेल्पलाइन सूची में CM Helpline 1076 दर्ज है। Ballia District
अगर कोई सरकारी कर्मचारी रिश्वत मांगे तो शिकायत करते समय तारीख, स्थान, कर्मचारी का नाम/पद, आवेदन संख्या और उपलब्ध दस्तावेज या रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखना उपयोगी हो सकता है।
अब आगे क्या होगा?
अब सबसे अहम विभागीय जांच होगी।
जांच में:
ऑडियो की सत्यता
आवाज की पहचान
₹50 हजार मांगने के आरोप
दूसरे राजस्व कर्मचारियों की संभावित भूमिका
पुराने जाति प्रमाण पत्र आवेदनों का रिकॉर्ड
जैसे पहलुओं की जांच की जा सकती है।
इसके बाद ही यह साफ होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोप कितने सही हैं और आगे किसी अतिरिक्त विभागीय या कानूनी कार्रवाई की जरूरत बनती है या नहीं।
बलिया का यह मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि आरोप एक ऐसे सरकारी प्रमाण पत्र से जुड़ा है जिसकी जरूरत आम नागरिक को शिक्षा, नौकरी और सरकारी योजनाओं समेत कई कामों में पड़ती है। फिलहाल ₹50 हजार की मांग का आरोप जांच में है और लेखपाल को निलंबित किया जा चुका है। अब असली तस्वीर ऑडियो की जांच और विभागीय कार्रवाई पूरी होने के बाद सामने आएगी।
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