समुद्र में चलते-चलते युद्धपोतों को देगा ईंधन-हथियार: 43,500 टन का स्वदेशी ‘Surya’ लॉन्च, जानें क्यों खास
विशाखापट्टनम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने FSS-1 ‘Surya’ को पानी में उतारा; पांच जहाजों के करीब ₹19,000 करोड़ के कार्यक्रम से Indian Navy की लंबी समुद्री तैनाती और logistics क्षमता बढ़ेगी
भारतीय नौसेना के लिए बनाए जा रहे पहले स्वदेशी Fleet Support Ship FSS-1 ‘Surya’ को विशाखापट्टनम में लॉन्च कर दिया गया है। करीब 43,500 टन का यह विशाल जहाज समुद्र में तैनात युद्धपोतों को ईंधन, पानी, गोला-बारूद और जरूरी सामान पहुंचा सकेगा। इसमें maintenance workshop, multi-role helicopter के लिए deck और self-defence systems भी होंगे। पांच ऐसे जहाजों का कार्यक्रम नौसेना की लंबी दूरी तक लगातार ऑपरेशन करने की क्षमता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। Press Information Bureau
बंदरगाह लौटे बिना लंबे मिशन में मदद करेगा ‘Surya’
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | डिफेंस डेस्क | 6 अक्टूबर 2026
खबर में खास
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Indian Navy का पहला स्वदेशी Fleet Support Ship FSS-1 ‘Surya’ लॉन्च
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जहाज का displacement करीब 43,500 टन
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कुल 5 Fleet Support Ships बनाए जा रहे हैं
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कार्यक्रम का अनुबंध करीब ₹19,000 करोड़ का
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समुद्र में ही युद्धपोतों को fuel, पानी, ammunition और stores दे सकेगा
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जहाज में first-line maintenance workshop भी होगी
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Multi-Role Helicopter के लिए helicopter deck
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Self-defence systems भी लगाए जाएंगे
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पहले जहाज का launch steel cutting के सिर्फ 18 महीने बाद
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पांचवें जहाज FSS-5 की keel भी रखी गई
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Hindustan Shipyard में upgraded Slipway-4 शुरू
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300-tonne Goliath Crane भी शुरू किया गया
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नया infrastructure 45,000 DWT तक के जहाजों के निर्माण में सक्षम
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Fleet Support Ships की delivery mid-2027 से शुरू होने की योजना
समुद्र में Navy की ताकत बढ़ाने आया ‘Surya’
विशाखापट्टनम: भारतीय नौसेना की समुद्र में लंबे समय तक ऑपरेशन चलाने की क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 6 अक्टूबर को विशाखापट्टनम स्थित Hindustan Shipyard Limited में भारतीय नौसेना के पहले Fleet Support Ship FSS-1 ‘Surya’ को लॉन्च किया।
इसी कार्यक्रम में पांचवें Fleet Support Ship यानी FSS-5 की keel भी रखी गई। इसके अलावा जहाज निर्माण के लिए upgraded Slipway-4 और 300 टन क्षमता वाली Goliath Crane का उद्घाटन किया गया।
आखिर Fleet Support Ship होता क्या है?
Fleet Support Ship सामान्य युद्धपोत की तरह दुश्मन पर हमला करने के लिए नहीं बनाया जाता।
इसका सबसे महत्वपूर्ण काम है समुद्र में मौजूद लड़ाकू जहाजों को लगातार रसद पहुंचाना।
युद्धपोत जब लंबी दूरी के मिशन पर होते हैं तो उन्हें ईंधन, पीने और तकनीकी उपयोग के पानी, गोला-बारूद, भोजन और दूसरी जरूरी चीजों की लगातार जरूरत होती है।
अगर हर बार इन चीजों के लिए जहाज को बंदरगाह लौटना पड़े तो मिशन की अवधि और operational reach दोनों कम हो जाती हैं।
‘Surya’ जैसे Fleet Support Ships युद्धपोतों को समुद्र में ही जरूरी सामान देकर उन्हें अधिक समय तक ऑपरेशन में बनाए रखने में मदद करेंगे।
43,500 टन का विशाल जहाज
FSS-1 ‘Surya’ का displacement करीब 43,500 टन है।
यह भारत में बनाए जा रहे बड़े naval support platforms में शामिल है। सरकार के मुताबिक ऐसे जहाज Indian Navy की reach, endurance और operational effectiveness बढ़ाएंगे, खासकर Indian Ocean Region में लंबी तैनाती के दौरान।
सरल भाषा में कहें तो नौसेना के frontline warships को अब लंबे मिशन के दौरान logistics के लिए बार-बार तट पर लौटने की जरूरत कम होगी।
ईंधन ही नहीं, गोला-बारूद भी पहुंचाएगा
Fleet Support Ship सिर्फ tanker नहीं है।
इन जहाजों को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि वे समुद्र में तैनात युद्धपोतों को:
Fuel
पानी
Ammunition
खाद्य और जरूरी stores
सप्लाई कर सकें।
यानी किसी carrier group या युद्धपोतों के बेड़े को समुद्र में लंबी अवधि तक सक्रिय रखने में यह एक floating logistics base की तरह काम कर सकता है।
जहाज पर ही छोटी-मोटी मरम्मत की सुविधा
‘Surya’ की खासियत सिर्फ सामान पहुंचाना नहीं होगी।
Fleet Support Ships में onboard first-line maintenance workshops भी होंगी। इससे समुद्र में तैनाती के दौरान कुछ जरूरी तकनीकी maintenance और repair support जहाज से ही दिया जा सकेगा। Press Information Bureau
यह सुविधा लंबी दूरी के naval operations में महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि हर तकनीकी समस्या के लिए युद्धपोत को बेस पर लौटाने की जरूरत कम की जा सकती है।
हेलिकॉप्टर भी कर सकेंगे ऑपरेशन
Fleet Support Ship पर Multi-Role Helicopter operations के लिए helicopter deck भी होगा।
इसका इस्तेमाल personnel transfer, surveillance, logistics और दूसरी operational जरूरतों के लिए किया जा सकता है। Press Information Bureau
इसके अलावा जहाज को self-defence systems से भी लैस किया जाएगा।
हालांकि self-defence weapons की पूरी configuration अभी सार्वजनिक विवरण में नहीं बताई गई है।
सिर्फ 18 महीने में पानी तक पहुंचा पहला जहाज
FSS-1 कार्यक्रम की एक और खास बात इसकी निर्माण गति है।
पहले जहाज की steel cutting के सिर्फ 18 महीने बाद इसे Bay of Bengal के पानी में उतार दिया गया।
Steel cutting किसी जहाज के वास्तविक निर्माण की शुरुआती औद्योगिक प्रक्रियाओं में से एक होती है।
इससे hull और structural blocks तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होती है।
क्या ‘Surya’ अब Navy में शामिल हो गया?
नहीं, यहां एक जरूरी फर्क है।
6 अक्टूबर को जहाज launch हुआ है।
Launch का मतलब है कि जहाज निर्माण के एक बड़े चरण के बाद पानी में उतारा गया है। इसके बाद भी fitting-out, equipment integration, testing, harbour trials और sea trials जैसे कई चरण बाकी रहते हैं।
इसके बाद ही जहाज को औपचारिक रूप से Navy में commission किया जाता है।
सरकारी कार्यक्रम के अनुसार पांच Fleet Support Ships की delivery mid-2027 से शुरू होनी है।
इसलिए अभी headline में “Navy में शामिल हुआ Surya” लिखना तकनीकी रूप से सही नहीं होगा।
पांच जहाजों का है पूरा कार्यक्रम
Indian Navy ने अगस्त 2023 में Hindustan Shipyard Limited के साथ पांच Fleet Support Ships के acquisition का contract किया था।
इस पूरे कार्यक्रम की कीमत करीब ₹19,000 करोड़ बताई गई है। Press Information Bureau
इन जहाजों का उद्देश्य Navy की blue-water capability बढ़ाना है।
Blue-water Navy का मतलब ऐसी नौसेना से है जो अपने तट से काफी दूर खुले समुद्र और महासागरों में लंबे समय तक प्रभावी ऑपरेशन चला सके।
