आकाश की वापसी, ईशान का क्या? मायावती ने फिर बदला BSP का समीकरण; नंबर-2 पर नया सवाल
3 सितंबर को राष्ट्रीय संयोजक पद से हटे, 10 सितंबर को पार्टी से बाहर हुए आकाश; 23 सितंबर को ईशान को मिली वही बड़ी जिम्मेदारी, माफी के बाद 5 अक्टूबर को फिर बदला मायावती का फैसला
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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले BSP में नेतृत्व का समीकरण एक बार फिर बदल गया है। मायावती ने करीब एक महीने पहले आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाकर पार्टी से अलग कर दिया था और बाद में छोटे भाई ईशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया। अब आकाश की माफी के बाद उन्हें फिर पार्टी में शामिल कर वही जिम्मेदारी दे दी गई है। ऐसे में सवाल है कि BSP में मायावती के बाद संगठन का सबसे प्रभावशाली चेहरा कौन है और ईशान आनंद की आगे क्या भूमिका होगी?
एक महीने में तीन मोड़, BSP में फिर बदला नेतृत्व का समीकरण
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | उत्तर प्रदेश डेस्क | 6 अक्टूबर 2026
खबर में खास
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3 सितंबर को आकाश आनंद राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाए गए
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10 सितंबर को उन्हें पार्टी से अलग कर दिया गया
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मायावती ने राजनीतिक परिपक्वता और निजी प्रभाव को लेकर सवाल उठाए थे
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आकाश की जगह छोटे भाई ईशान आनंद को आगे बढ़ाया गया
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20 सितंबर को मायावती ने कहा था कि आनंद कुमार के परिवार से अब ईशान को आगे बढ़ाया जाएगा
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23 सितंबर को ईशान बने BSP के राष्ट्रीय संयोजक
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आकाश और उनकी बहन दीपिका को जिम्मेदारी न देने की बात भी कही गई थी
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2 अक्टूबर को आकाश ने मायावती से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी
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आकाश ने कहा BSP उनका परिवार और मायावती उनकी राजनीतिक गुरु हैं
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ससुर अशोक सिद्धार्थ को लेकर मायावती के फैसले का भी समर्थन किया
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5 अक्टूबर को मायावती ने आकाश की फिर वापसी कराई
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आकाश को दोबारा राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया
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ईशान की आगे की औपचारिक भूमिका पर अभी पूरी स्पष्टता नहीं
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BSP में “नंबर-2” कोई औपचारिक पद नहीं, लेकिन राष्ट्रीय संयोजक का पद बेहद अहम
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पूरा बदलाव UP विधानसभा चुनाव 2027 से कुछ महीने पहले हुआ है
आकाश वापस आए तो फिर शुरू हुआ वही सवाल
लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले बहुजन समाज पार्टी में नेतृत्व का समीकरण एक बार फिर बदल गया है। पिछले करीब एक महीने में BSP प्रमुख मायावती ने अपने दो भतीजों आकाश आनंद और ईशान आनंद को लेकर कई बड़े फैसले किए।
पहले आकाश आनंद को पार्टी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से हटाया गया, फिर उन्हें पार्टी से अलग किया गया। इसके बाद छोटे भाई ईशान आनंद को तेजी से आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया।
अब कुछ ही दिनों के भीतर तस्वीर फिर बदल गई है।
मायावती ने आकाश आनंद को दोबारा BSP में शामिल कर राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी वापस दे दी है। The Print
इसके बाद सबसे बड़ा सवाल यही है—अब ईशान आनंद की भूमिका क्या होगी और BSP में मायावती के बाद सबसे अहम संगठनात्मक चेहरा कौन है?
3 सितंबर को आकाश से छिनी थी बड़ी जिम्मेदारी
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 3 सितंबर 2026 को हुई।
मायावती ने आकाश आनंद को BSP के राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी से हटा दिया। उस समय उन्होंने आकाश की राजनीतिक परिपक्वता और उनकी कार्यशैली को लेकर सवाल उठाए थे। AajTak
आकाश के लिए यह पहली बार नहीं था जब उन्हें बड़ी जिम्मेदारी मिलने के बाद पद से हटाया गया हो।
2024 लोकसभा चुनाव के दौरान भी वह BSP के प्रमुख प्रचार चेहरों में शामिल थे, लेकिन एक चुनावी भाषण के बाद मायावती ने उन्हें अहम जिम्मेदारियों से हटा दिया था। बाद में उन्हें फिर वापस लाया गया। हालिया वापसी को मिलाकर आकाश कई बार पद से हटाए और दोबारा वापस लाए जा चुके हैं।
10 सितंबर को पार्टी से भी बाहर
राष्ट्रीय संयोजक का पद जाने के करीब एक सप्ताह बाद मामला और बढ़ गया।
10 सितंबर को आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह अलग करने का फैसला किया गया।
मायावती ने उस समय निजी और पारिवारिक हितों को पार्टी और आंदोलन से ऊपर रखने जैसी आपत्तियां जताई थीं।
इसके बाद ऐसा लगा कि इस बार आकाश आनंद की BSP में वापसी का रास्ता लंबे समय के लिए बंद हो गया है।
लेकिन कहानी यहीं नहीं रुकी।
आकाश बाहर हुए तो ईशान की तेजी से हुई एंट्री
आकाश आनंद के हटने के बाद उनके छोटे भाई ईशान आनंद को BSP में आगे बढ़ाया गया।
शुरुआत में उन्हें पार्टी संगठन के कई राज्यों की समीक्षा से जुड़ी जिम्मेदारी दी गई। BSP की संगठनात्मक व्यवस्था में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को छोड़कर दूसरे राज्यों में पार्टी के काम की समीक्षा जैसी जिम्मेदारियां उनके पास आईं।
ईशान के सक्रिय होने से यह चर्चा तेज हुई कि मायावती अब अगली पीढ़ी में आकाश की जगह छोटे भाई को तैयार कर रही हैं।
20 सितंबर को मायावती ने क्या कहा था?
इसके बाद 20 सितंबर को मायावती ने परिवार के सदस्यों की BSP में भूमिका को लेकर अपना रुख और स्पष्ट किया।
उन्होंने संकेत दिया कि आकाश आनंद और उनकी बहन दीपिका आनंद को आगे पार्टी में जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी और उनके भाई आनंद कुमार के परिवार से ईशान आनंद को आगे बढ़ाया जाएगा। AajTak
उस समय मायावती ने आकाश के राजनीतिक व्यवहार पर भी सवाल उठाए और उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव का मुद्दा उठाया था।
इस बयान के बाद ऐसा लगने लगा कि ईशान BSP की अगली पीढ़ी में सबसे महत्वपूर्ण चेहरा बनने वाले हैं।
23 सितंबर को ईशान बने राष्ट्रीय संयोजक
सिर्फ तीन दिन बाद इस संकेत को औपचारिक जिम्मेदारी में बदल दिया गया।
23 सितंबर 2026 को ईशान आनंद को BSP का राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त किया गया।
लखनऊ में हुई पार्टी की राष्ट्रीय बैठक में उनके नाम की घोषणा हुई। ईशान ने जिम्मेदारी मिलने के बाद पूरी निष्ठा और ईमानदारी से काम करने की बात कही।
आकाश के पास पहले यही महत्वपूर्ण पद था।
इसलिए ईशान की नियुक्ति के बाद स्वाभाविक तौर पर राजनीतिक चर्चा शुरू हुई कि BSP की नई पीढ़ी के नेतृत्व में अब आकाश की जगह ईशान का कद बढ़ गया है।
कौन हैं ईशान आनंद?
ईशान आनंद, मायावती के भाई और BSP के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आनंद कुमार के छोटे बेटे हैं। वह आकाश आनंद के छोटे भाई हैं।
ईशान की शुरुआती पढ़ाई दिल्ली-NCR में हुई। इसके बाद उन्होंने ब्रिटेन में कानून की पढ़ाई की। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्होंने University of Westminster से legal studies की और आगे LLM की पढ़ाई की।
राजनीति में उनकी सक्रिय भूमिका आकाश की तुलना में काफी नई है।
राष्ट्रीय संयोजक बनने से पहले उनके पास चुनावी राजनीति का लंबा अनुभव नहीं था। यही कारण है कि उनका अचानक संगठन के इतने बड़े पद तक पहुंचना चर्चा का विषय बना।
फिर अचानक आकाश ने तोड़ी चुप्पी
इस बीच पार्टी से बाहर चल रहे आकाश आनंद ने 2 अक्टूबर को सार्वजनिक रूप से अपनी चुप्पी तोड़ी।
उन्होंने मायावती को “बुआ मां” और अपनी राजनीतिक गुरु बताते हुए उनसे एक और मौका मांगा।
आकाश ने साफ कहा कि वह किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी में जाने की तैयारी नहीं कर रहे और BSP उनके लिए सिर्फ एक राजनीतिक दल नहीं बल्कि उनका परिवार है।
उन्होंने यह भी कहा कि पिछले घटनाक्रम से उन्हें सीख मिली है और वह मायावती के नेतृत्व में ही काम करना चाहते हैं।
अशोक सिद्धार्थ पर भी आकाश ने बदला रुख
आकाश की वापसी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ से जुड़ा था।
मायावती पहले आकाश के फैसलों पर अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव को लेकर नाराजगी जाहिर कर चुकी थीं।
आकाश ने अपनी माफी में मायावती के उस फैसले का समर्थन किया जिसमें अशोक सिद्धार्थ के खिलाफ पार्टी ने कार्रवाई की थी। उन्होंने कहा कि पार्टी और आंदोलन व्यक्तिगत संबंधों से ऊपर हैं।
इसके बाद अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने के घटनाक्रम ने भी आकाश की वापसी का रास्ता आसान किया।
सिर्फ तीन दिन में माफी से वापसी तक
आकाश की सार्वजनिक माफी के करीब तीन दिन बाद ही बड़ा फैसला आ गया।
5 अक्टूबर को मायावती ने उन्हें दोबारा BSP में शामिल कर लिया और राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी भी वापस दे दी।
मायावती ने कहा कि काफी सोच-विचार के बाद पार्टी और आंदोलन के हित में आकाश को दोबारा मौका देने का फैसला लिया गया है। Rediff
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अशोक सिद्धार्थ के सक्रिय राजनीति से हटने के बाद परिस्थितियों में बदलाव आया है।
आकाश की वापसी पर परिवार और नेताओं की राय भी ली गई?
मायावती के बयान के मुताबिक आकाश आनंद को वापस लाने के फैसले से पहले पार्टी के भीतर भी राय सामने आई।
उन्होंने कहा कि पार्टी के अधिकतर लोगों की राय थी कि आकाश की माफी स्वीकार कर उन्हें दोबारा काम करने का मौका मिलना चाहिए।
आकाश के पिता आनंद कुमार और छोटे भाई ईशान आनंद ने भी उनकी वापसी पर सहमति जताई थी।
इससे यह भी संकेत मिलता है कि मौजूदा बदलाव को सिर्फ दोनों भाइयों के बीच पद की सीधी प्रतिस्पर्धा के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी।
वापसी के बाद आकाश ने क्या कहा?
जिम्मेदारी वापस मिलने के बाद आकाश आनंद ने मायावती का आभार जताया।
उन्होंने कहा कि इस बार मिली जिम्मेदारी को वह हल्के में नहीं ले सकते और पिछले घटनाक्रम से उन्होंने काफी कुछ सीखा है।
उन्होंने व्यक्तिगत हित छोड़कर पार्टी और आंदोलन के लिए अनुशासन के साथ काम करने की बात कही। Jansatta
यानी फिलहाल आकाश ने मायावती के नेतृत्व को पूरी तरह स्वीकार करते हुए संगठन पर फोकस करने का संदेश दिया है।
अब ईशान आनंद का क्या होगा?
यही इस पूरी खबर का सबसे बड़ा अनुत्तरित सवाल है।
23 सितंबर को ईशान को राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया था। अब 5 अक्टूबर को वही महत्वपूर्ण जिम्मेदारी आकाश आनंद को वापस मिल गई है।
फिलहाल ईशान की नई औपचारिक भूमिका को लेकर कोई उतनी स्पष्ट विस्तृत घोषणा सामने नहीं आई है जितनी आकाश की वापसी पर हुई है। कुछ रिपोर्टों में ईशान की ओर से बिना पद के भी पार्टी के लिए काम करने की इच्छा जताए जाने की बात सामने आई है।
इसलिए अभी यह लिखना सही नहीं होगा कि ईशान BSP से बाहर हो गए या उनकी राजनीतिक भूमिका खत्म हो गई।
तो क्या आकाश आनंद BSP के आधिकारिक नंबर-2 हैं?
यहां एक जरूरी फर्क समझना चाहिए।
“BSP नंबर-2” पार्टी का कोई घोषित संवैधानिक पद नहीं है।
पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती हैं और प्रमुख राजनीतिक एवं संगठनात्मक फैसलों का अंतिम अधिकार उनके पास है।
हालांकि वर्तमान संगठनात्मक स्थिति में आकाश आनंद को फिर राष्ट्रीय संयोजक बनाए जाने से उनका कद नई पीढ़ी के नेताओं में बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। AajTak
इसलिए headline में “नंबर-2 कौन?” सवाल के रूप में इस्तेमाल करना सही है, लेकिन इसे आधिकारिक नियुक्ति की तरह नहीं लिखा जाना चाहिए।
आकाश को पहले उत्तराधिकारी भी बता चुकी हैं मायावती
आकाश आनंद लंबे समय से BSP की अगली पीढ़ी के प्रमुख चेहरों में रहे हैं।
उन्हें पहले राष्ट्रीय स्तर की संगठनात्मक जिम्मेदारियां दी गईं और दिसंबर 2023 में मायावती ने उन्हें अपने राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में भी आगे बढ़ाया था। इसके बाद से उनकी भूमिका कई बार बदली है। India Today
2024 के बाद से आकाश की राजनीतिक यात्रा में जिम्मेदारी मिलना, हटना और वापस आना कई बार हुआ है।
यही वजह है कि इस बार उनकी वापसी के बाद भी सबसे बड़ा सवाल पद मिलने से ज्यादा मायावती का भरोसा लंबे समय तक बनाए रखने का है।
UP 2027 से पहले क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं।
BSP अपने संगठन, उम्मीदवारों और चुनावी तैयारियों को लेकर लगातार बैठकें कर रही है। ऐसे समय पर राष्ट्रीय संयोजक जैसे महत्वपूर्ण पद पर बार-बार बदलाव पार्टी की चुनावी तैयारी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
आकाश आनंद युवा चेहरा हैं और पहले भी BSP के राष्ट्रीय प्रचार अभियानों में सक्रिय रहे हैं।
अब उनकी वापसी के बाद यह देखा जाएगा कि 2027 की तैयारी में उन्हें उम्मीदवार चयन, संगठन, प्रचार और दूसरे राज्यों की जिम्मेदारियों में कितना अधिकार मिलता है।
क्या ईशान और आकाश दोनों साथ काम करेंगे?
मौजूदा घटनाक्रम से यह संभावना खुली है कि दोनों भाई पार्टी में अलग-अलग जिम्मेदारियों के साथ काम करें।
ईशान ने आकाश की वापसी का विरोध सार्वजनिक रूप से नहीं किया है और मायावती के मुताबिक परिवार की सहमति से फैसला लिया गया है।
लेकिन संगठनात्मक तौर पर ईशान को अब कौन-सी जिम्मेदारी दी जाएगी, यह BSP की अगली स्पष्ट घोषणा के बाद ही पूरी तरह साफ होगा।
एक महीने में पूरा घटनाक्रम
3 सितंबर: आकाश राष्ट्रीय संयोजक पद से हटे
10 सितंबर: आकाश पार्टी से अलग किए गए
20 सितंबर: मायावती ने ईशान को आगे बढ़ाने की बात कही
23 सितंबर: ईशान राष्ट्रीय संयोजक बने
2 अक्टूबर: आकाश ने माफी मांगकर वापसी का मौका मांगा
5 अक्टूबर: आकाश की BSP में वापसी, फिर राष्ट्रीय संयोजक बने AajTak
महज एक महीने के इस घटनाक्रम ने BSP की अगली पीढ़ी के नेतृत्व को लेकर सवाल फिर खोल दिए हैं।
BSP में फिलहाल सबसे स्पष्ट तथ्य यह है कि मायावती ने आकाश आनंद को दोबारा राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी सौंप दी है। लेकिन इसे मायावती के बाद अंतिम उत्तराधिकार का फैसला मानना जल्दबाजी होगी। करीब एक महीने में पहले आकाश को हटाना, ईशान को आगे करना और फिर आकाश को वापस लाना दिखाता है कि पार्टी में अगली पीढ़ी की भूमिका अभी मायावती के भरोसे और संगठनात्मक प्रदर्शन से तय हो रही है। UP 2027 से पहले अब निगाह इस बात पर रहेगी कि आकाश को वास्तव में कितनी जिम्मेदारी मिलती है और ईशान आनंद को पार्टी किस भूमिका में रखती है।
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