Lakhimpur Kheri Case: आशीष मिश्रा को दिवाली पर घर जाने की सुप्रीम कोर्ट से इजाजत, 131 में से 90 गवाहों के बयान दर्ज

2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा को सुप्रीम कोर्ट से सीमित यात्रा की अनुमति मिली। अदालत ने मुकदमे की सुनवाई समय पर पूरी करने पर भी जोर दिया।

Lakhimpur Kheri Case: सुप्रीम कोर्ट ने आशीष मिश्रा को दिवाली पर परिवार से मिलने की अनुमति दी। जानिए जमानत की शर्तें, 90 गवाहों के बयान और मुकदमे का नया अपडेट।

लखीमपुर खीरी हिंसा केस में आशीष मिश्रा को सुप्रीम कोर्ट से राहत, दिवाली पर परिवार से मिलने की अनुमति

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26 अक्टूबर को कानपुर के बिठूर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश यादव से घुसपैठियों को लेकर सवाल पूछा।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली/लखीमपुर खीरी | 26 अक्टूबर 2026
उत्तर प्रदेश के चर्चित लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से नया आदेश सामने आया है। अदालत ने पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे और मामले के आरोपी आशीष मिश्रा को दिवाली के अवसर पर परिवार तथा करीबी रिश्तेदारों से मिलने के लिए सीमित अवधि की यात्रा की अनुमति दी है।
आशीष मिश्रा पहले से जमानत पर हैं। उनकी आवाजाही पर अदालत की शर्तें लागू हैं। नई अनुमति इन्हीं शर्तों के अधीन दी गई है। इस आदेश से न तो आपराधिक मुकदमा समाप्त हुआ है और न ही उन्हें आरोपों से बरी किया गया है।
खबर में खास
  • सुप्रीम कोर्ट ने 26 अक्टूबर को आशीष मिश्रा की यात्रा संबंधी अर्जी स्वीकार की।
  • दिवाली पर परिवार से मिलने की अनुमति पुरानी जमानत शर्तों के अधीन है।
  • मुकदमे में कुल 131 गवाह हैं, जिनमें 90 की गवाही हो चुकी है।

  • सुनवाई कर रहे न्यायिक अधिकारी का तबादला हुआ है।

  • विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति की जानकारी अदालत को दी गई।

  • हत्या और अन्य आरोपों से जुड़ा मुकदमा अभी लंबित है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया?

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सोमवार को आशीष मिश्रा की याचिका पर सुनवाई की।
उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने दिवाली पर परिवार से मिलने के लिए यात्रा की अनुमति मांगी।
अदालत ने अनुरोध स्वीकार करते हुए पहले से लागू जमानत शर्तों का पालन करने को कहा।
लाइव लॉ और समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट में लखीमपुर खीरी जाने की अनुमति का उल्लेख है। कुछ अन्य न्यायिक रिपोर्टों में लखनऊ जिले का उल्लेख मिलता है। इसलिए यात्रा के स्थान की अंतिम पुष्टि के लिए लिखित न्यायिक आदेश देखना जरूरी है।
131 में से 90 गवाहों की गवाही पूरी
सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अदालत को मुकदमे की प्रगति बताई गई।
सरकारी पक्ष के अनुसार, कुल 131 गवाहों में से 90 की गवाही हो चुकी है, जबकि 41 गवाह अभी बाकी हैं।
अदालत को विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति की जानकारी भी दी गई।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि मुकदमे की सुनवाई समय पर पूरी होनी चाहिए। साथ ही यह भी सुनिश्चित होना चाहिए कि जल्दबाजी में महत्वपूर्ण गवाही, जिरह या साक्ष्य छूट न जाएँ।
मुकदमा सुनने वाले जज का तबादला क्यों चर्चा में?
लखीमपुर खीरी हिंसा मामले की सुनवाई कर रहे न्यायिक अधिकारी के कामकाज को लेकर पीड़ित पक्ष ने पहले आपत्तियाँ उठाई थीं।
पीड़ितों की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने न्यायिक अधिकारी के तबादले पर संतोष जताया।
दूसरी ओर, आशीष मिश्रा के वकील ने कहा कि तबादला नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा था।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह किसी व्यक्ति के खिलाफ अपने आप प्रतिकूल निष्कर्ष नहीं निकाल रहा है। न्यायिक अधिकारी का तबादला अपने आप आरोप सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है।

3 अक्टूबर 2021 को क्या हुआ था?

यह मामला उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया में 3 अक्टूबर 2021 को हुई हिंसा से जुड़ा है।
उस दिन केंद्र के तत्कालीन कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसानों के बीच वाहनों के पहुँचने से चार किसानों की मौत हुई थी।
इसके बाद भड़की हिंसा में दो भाजपा कार्यकर्ताओं, एक वाहन चालक और एक पत्रकार की भी जान गई थी। इस तरह कुल आठ लोगों की मौत हुई थी।
आशीष मिश्रा इस मामले में आरोपी हैं। उनके खिलाफ हत्या और आपराधिक साजिश सहित अन्य आरोपों पर मुकदमा चल रहा है। अदालत ने अभी उनके दोषी या निर्दोष होने पर अंतिम फैसला नहीं सुनाया है
क्या आशीष मिश्रा की जमानत की शर्तें खत्म हो गईं?
नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने केवल यात्रा संबंधी सीमित अनुमति दी है।
पहले लागू की गई शर्तें बनी रहेंगी। इनमें गवाहों को प्रभावित न करना और न्यायिक निर्देशों का पालन करना शामिल है।
कई ताजा रिपोर्टों में वापसी की तारीख 16 नवंबर 2026 बताई गई है। हालाँकि पीटीआई आधारित कुछ खबरों में 16 अक्टूबर छपा है, जो आदेश की तारीख से पहले है। ऐसे में लिखित आदेश से तारीख सत्यापित करना जरूरी है।
अब सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट मुकदमे की प्रगति की निगरानी कर रहा है। अदालत ने अभियोजन पक्ष को निर्देश दिया है कि शेष गवाहों की उपस्थिति और सुनवाई की प्रक्रिया पर ध्यान दिया जाए।
अब मुकदमे में बाकी 41 गवाहों की गवाही, जिरह और न्यायिक कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल 26 अक्टूबर के आदेश का अर्थ केवल इतना है कि आशीष मिश्रा को निर्धारित शर्तों के साथ दिवाली पर परिवार से मिलने की अनुमति दी गई है। लखीमपुर खीरी हिंसा मामले का मुकदमा अभी जारी है।
 

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