Kerala Politics: PSC अध्यक्ष को हटाने की सिफारिश पर सियासी घमासान, पिनराई विजयन ने उठाए सवाल, BJP ने किया समर्थन
केरल के पूर्व राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर ने लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एमआर बैजू और सदस्यों को हटाने की सिफारिश राष्ट्रपति से की। भर्ती में अनियमितताओं के आरोपों को लेकर भाजपा और एलडीएफ आमने-सामने हैं।
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केरल PSC के अध्यक्ष को हटाने की सिफारिश पर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। पिनराई विजयन ने संवैधानिक प्रक्रिया का सवाल उठाया, जबकि भाजपा ने कार्रवाई का समर्थन किया।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | तिरुवनंतपुरम | 26 अक्टूबर 2026
खबर में खास
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पूर्व राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से PSC अध्यक्ष एमआर बैजू को हटाने की सिफारिश की।
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रिपोर्टों के अनुसार, आयोग के अन्य 15 सदस्यों को हटाने की भी सिफारिश की गई है।
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विपक्षी नेता पिनराई विजयन ने कदम की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाया।
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भाजपा ने भर्ती में कथित अनियमितताओं का हवाला देते हुए सिफारिश का समर्थन किया।
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अभी राष्ट्रपति की ओर से पद से हटाए जाने के किसी अंतिम आदेश की पुष्टि नहीं है।
केरल PSC को लेकर क्यों खड़ा हुआ विवाद?
केरल में सरकारी भर्तियों की जिम्मेदारी संभालने वाला लोक सेवा आयोग (PSC) एक बड़े राजनीतिक और संवैधानिक विवाद के केंद्र में आ गया है।
पूर्व राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से आयोग के अध्यक्ष एमआर बैजू और अन्य सदस्यों को हटाने की सिफारिश की है। रिपोर्टों के अनुसार, यह सिफारिश आर्लेकर ने राज्यपाल पद छोड़ने से पहले की थी।
मामला आयोग की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों से जुड़ा है। इस विवाद में अब राज्य की कांग्रेस सरकार, भाजपा और विपक्षी वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) के बीच राजनीतिक टकराव भी तेज हो गया है।
भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी के क्या आरोप हैं?
इस विवाद की पृष्ठभूमि में राज्य योजना बोर्ड से जुड़े एक पद की भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, राज्य की अपराध शाखा ने परीक्षा मूल्यांकन में गंभीर खामियों की जांच शुरू की थी। बाद में अन्य परीक्षाओं में भी संभावित गड़बड़ियों को लेकर जांच का दायरा बढ़ाया गया।
लोक भवन के सूत्रों के अनुसार, भारतीय जनता युवा मोर्चा और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर शिकायतें दी थीं। इसके बाद तत्कालीन राज्यपाल ने आयोग की आंतरिक सतर्कता इकाई की रिपोर्ट और पुलिस जांच की जानकारी का परीक्षण किया।
हालांकि, आयोग के अध्यक्ष या सभी सदस्यों के खिलाफ आरोप न्यायिक रूप से सिद्ध हो चुके हैं, ऐसी पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
पिनराई विजयन ने सिफारिश पर क्या कहा?
केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने पूर्व राज्यपाल की कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई है।
विजयन ने इस कदम को असंवैधानिक और अधिकारों के दुरुपयोग वाला बताया। उनका तर्क है कि संविधान के अनुच्छेद 317 में लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों को हटाने की विशेष प्रक्रिया निर्धारित है।
विजयन के मुताबिक, आयोग के सदस्यों के खिलाफ कदाचार के मामले में सर्वोच्च न्यायालय की जांच और उसकी रिपोर्ट के बिना राष्ट्रपति हटाने का आदेश नहीं दे सकते।
उन्होंने राज्य की कांग्रेस-नेतृत्व वाली सरकार से इस मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग भी की
BJP ने क्यों किया समर्थन?
दूसरी ओर भाजपा ने भर्ती प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को गंभीर मुद्दा बताया है।
केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने पूर्व राज्यपाल की सिफारिश का समर्थन किया। भाजपा का आरोप है कि पिछली वामपंथी सरकार के कार्यकाल से जुड़े भर्ती विवादों पर जवाबदेही तय होनी चाहिए।
यह भाजपा का राजनीतिक आरोप है, न कि आयोग के सभी सदस्यों के दोषी होने का स्थापित निष्कर्ष।
क्या राष्ट्रपति सीधे PSC अध्यक्ष को हटा सकती हैं?
