SC से NSA रद्द होते ही जेल से बाहर आया संभल हिंसा का आरोपी मुल्ला अफरोज, बोला—शारिक साठा से मेरा कोई संबंध नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने मुल्ला अफरोज की NSA के तहत हिरासत रद्द करते हुए यूपी सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। रिहाई के बाद अफरोज ने पुलिस के आरोपों से इनकार किया है।
संभल हिंसा मामले में आरोपी मुल्ला अफरोज NSA की कार्रवाई रद्द होने के बाद मुरादाबाद जेल से रिहा हो गया। अफरोज ने दुबई में बैठे गैंगस्टर शारिक साठा से किसी भी तरह के संबंध से इनकार किया है।
सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिलने के बाद जेल से बाहर आया मुल्ला अफरोज, शारिक साठा से संबंध के आरोपों को नकारा; लेकिन हिंसा का आपराधिक मामला अभी खत्म नहीं
सुप्रीम कोर्ट से NSA की कार्रवाई रद्द होने के बाद मुरादाबाद जेल से रिहा हुआ मुल्ला अफरोज।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | उत्तर प्रदेश डेस्क | 1 अक्टूबर 2026
खबर में खास
NSA रद्द होने के बाद मुल्ला अफरोज जेल से रिहा
सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार पर लगाया ₹10 लाख का जुर्माना
अफरोज ने शारिक साठा से संबंध होने से किया इनकार
संभल हिंसा से जुड़े आपराधिक आरोपों पर अभी अंतिम फैसला नहीं
पुलिस हिरासत के कथित बयान पर कोर्ट ने उठाए सवाल
संभल: शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई हिंसा के मामले में आरोपी मुल्ला अफरोज को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी NSA की कार्रवाई रद्द होने के बाद मुरादाबाद जेल से रिहा कर दिया गया है। जेल से बाहर आने के बाद अफरोज ने दावा किया कि उसका दुबई में बैठे गैंगस्टर शारिक साठा से कोई संबंध नहीं है।
अफरोज ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि उसे अदालत से उम्मीद से अधिक न्याय मिला है। हालांकि, उसका यह बयान उसका अपना पक्ष है और पुलिस ने पहले उस पर हिंसा की साजिश तथा शारिक साठा से संबंध रखने समेत कई गंभीर आरोप लगाए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों रद्द की NSA की कार्रवाई?
सुप्रीम कोर्ट ने 29 सितंबर को मुल्ला अफरोज की NSA के तहत की गई निवारक हिरासत रद्द कर दी थी। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने कहा कि हिरासत को सही ठहराने के लिए पेश सामग्री कानून की कसौटी पर पर्याप्त नहीं थी।
अदालत ने पुलिस हिरासत में दिए गए कथित कबूलनामे, उपलब्ध नहीं कराई गई CCTV फुटेज और अस्पष्ट फोन संदेशों के आधार पर NSA लगाने पर सवाल उठाए। कोर्ट ने यूपी सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।
जमानत के बाद भी NSA के कारण था जेल में
मुल्ला अफरोज को 17 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया गया था। संबंधित आपराधिक मामलों में जमानत मिलने के बावजूद अक्टूबर 2025 में उसके खिलाफ NSA के तहत कार्रवाई की गई, जिसके कारण वह जेल से बाहर नहीं आ सका।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में संकेत दिया कि जमानत के आदेश को निवारक हिरासत के माध्यम से निष्प्रभावी नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति का आपराधिक रिकॉर्ड अपने आप में NSA के तहत हिरासत को सही साबित नहीं करता।
क्या आरोपों से बरी हो गया मुल्ला अफरोज?
NSA की कार्रवाई रद्द होने का अर्थ यह नहीं है कि मुल्ला अफरोज संभल हिंसा से जुड़े सभी आपराधिक आरोपों से बरी हो गया है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला उसकी निवारक हिरासत की वैधता से संबंधित है। हिंसा से जुड़े मुकदमों में आरोपों और सबूतों पर अंतिम निर्णय संबंधित अदालतों में कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होगा।
24 नवंबर 2024 को संभल की शाही जामा मस्जिद के अदालती सर्वे के दौरान हिंसा भड़क गई थी। इस घटना में चार लोगों की मौत हुई थी और कई पुलिसकर्मी तथा स्थानीय लोग घायल हुए थे। पुलिस ने अफरोज पर हिंसा में भूमिका निभाने और गैंगस्टर शारिक साठा से संबंध रखने के आरोप लगाए थे, जिनसे उसने अब इनकार किया है।
मुल्ला अफरोज की रिहाई ने संभल हिंसा मामले को फिर राजनीतिक और कानूनी बहस के केंद्र में ला दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने NSA की कार्रवाई रद्द कर दी है, लेकिन हिंसा से जुड़े मूल आरोपों का अंतिम फैसला अभी बाकी है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि पुलिस उसके ताजा बयान पर क्या प्रतिक्रिया देती है और आगे अदालत में कौन से साक्ष्य प्रस्तुत किए जाते हैं।