UP चुनाव से पहले BSP के वोट बैंक पर आठवले की नजर, आकाश आनंद को RPI में आने का न्योता; बोले- ‘बसपा से अपना हक वापस लेना है’
केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने मुरादाबाद में आकाश आनंद को RPI में आने का न्योता दिया। उन्होंने कहा कि यूपी में BSP से अपना हक वापस लेना है और बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करना होगा। यह बयान BSP के अंदर चल रही उथल-पुथल के बीच आया है।
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मुरादाबाद में केंद्रीय मंत्री और RPI प्रमुख रामदास आठवले ने BSP के दलित वोट बैंक पर खुलकर दांव खेला। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि यूपी में BSP से “अपना हक वापस लेना है” और संगठन को गांव-बूथ तक मजबूत करना होगा। साथ ही उन्होंने मायावती से अलग हुए आकाश आनंद को RPI में आने का निमंत्रण देते हुए कहा कि अगर वे बाबा साहेब के मिशन को आगे बढ़ाना चाहते हैं तो उनकी पार्टी में काम करें। यह बयान 2027 विधानसभा चुनाव से पहले दलित राजनीति में नए समीकरण की ओर इशारा करता है।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | मुरादाबाद | 14 सितंबर 2026
खबर में खास
- रामदास आठवले ने आकाश आनंद को RPI में आने का न्योता दिया
- कहा- यूपी में BSP से अपना हक वापस लेना है
- गांव से बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने का आह्वान
- 2027 से पहले दलित वोट बैंक पर तेज हुई सियासी लड़ाई
उत्तर प्रदेश की दलित राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले नई हलचल दिखाई देने लगी है। बहुजन समाज पार्टी के अंदर आकाश आनंद को लेकर मचे घमासान के बीच अब केंद्रीय मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (Athawale) के प्रमुख रामदास आठवले ने सीधे BSP के वोट बैंक पर नजरें जमा दी हैं।
मुरादाबाद पहुंचे आठवले ने अपने कार्यकर्ताओं से कहा कि उत्तर प्रदेश में पार्टी को फिर से मजबूत करना होगा और “BSP से अपना हक वापस लेना है।” उन्होंने संगठन को जिला, गांव और बूथ स्तर तक खड़ा करने की बात कही।
सबसे ज्यादा चर्चा उनके उस बयान की हो रही है जिसमें उन्होंने मायावती के भतीजे आकाश आनंद को RPI में आने का खुला न्योता दे दिया।
आकाश आनंद को खुला ऑफर
रैली के बाद मीडिया से बातचीत में रामदास आठवले ने कहा कि अगर आकाश आनंद बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के मिशन को आगे बढ़ाना चाहते हैं, तो उन्हें RPI में आकर काम करना चाहिए।
आठवले ने यह भी कहा कि आकाश आनंद के आने से उत्तर प्रदेश में RPI को मजबूती मिलेगी।
यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आकाश आनंद को हाल ही में BSP से अलग कर दिया गया है और पार्टी में उनकी भूमिका को लेकर लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।
‘BSP से अपना हक वापस लेना है’
रामदास आठवले ने कार्यकर्ताओं से संगठनात्मक विस्तार पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि पार्टी को मुरादाबाद से लेकर पूरे उत्तर प्रदेश में गांव और बूथ स्तर तक अपना नेटवर्क खड़ा करना होगा।
आठवले ने दावा किया कि 1970 के दशक में RPI का जो राजनीतिक आधार और पहचान थी, उसका बड़ा हिस्सा बाद में BSP के पास चला गया। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि अब पार्टी को अपना हक वापस लेना है।
BSP के वोटरों पर सीधी नजर
आठवले के बयान का सबसे बड़ा राजनीतिक संकेत BSP के पारंपरिक वोट बैंक को लेकर है।
उत्तर प्रदेश में लंबे समय तक BSP की ताकत दलित वोटों के बड़े हिस्से पर उसकी पकड़ रही है। अब RPI जैसे दल भी इस सामाजिक आधार में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
आठवले की पार्टी खुद को डॉ. भीमराव आंबेडकर की राजनीतिक विरासत से जोड़ती है और दलित प्रतिनिधित्व को अपनी राजनीति का प्रमुख आधार बताती है।
ऐसे में उनका यह बयान महज आकाश आनंद को न्योता नहीं, बल्कि BSP के सामाजिक आधार में राजनीतिक सेंध लगाने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।
BSP में क्यों मची है उथल-पुथल?
आकाश आनंद को लेकर BSP में पिछले कुछ दिनों से लगातार घटनाक्रम बदलते रहे हैं।
Mayawati ने पहले उन्हें पार्टी की जिम्मेदारियों से हटाया और बाद में पूरी तरह पार्टी से अलग कर दिया। इससे पहले भी आकाश आनंद को कई बार जिम्मेदारी देकर फिर हटाया जा चुका है।
इस पूरे घटनाक्रम ने BSP के अंदर नेतृत्व और उत्तराधिकार को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
Mayawati ने बाद में यह भी स्पष्ट कर दिया कि उनके परिवार के सदस्यों को राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।
आकाश आनंद को लेकर सहानुभूति का दावा
समर्थकों का एक वर्ग चाहता है कि Mayawati उन्हें फिर से पार्टी में वापस लें और बड़ी जिम्मेदारी दें।
यही स्थिति दूसरे दलों के लिए अवसर पैदा कर रही है।
रामदास आठवले का आकाश आनंद को RPI में आने का न्योता इसी राजनीतिक खाली जगह को भरने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है।
संविधान सम्मान महारैली से दिया संदेश
मुरादाबाद में आयोजित संविधान सम्मान महारैली को संबोधित करते हुए आठवले ने संविधान की रक्षा, सामाजिक समरसता और संगठन के विस्तार की बात की।
उन्होंने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि देश में कई सरकारें आईं और गईं, लेकिन जनता के समर्थन से उनकी राजनीतिक भूमिका बनी रही।
उनका जोर इस बात पर था कि RPI को उत्तर प्रदेश में सिर्फ प्रतीकात्मक उपस्थिति से आगे बढ़कर मजबूत संगठन खड़ा करना होगा।
2027 से पहले क्यों अहम है बयान?
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी धीरे-धीरे तेज हो रही है।
BSP इस समय अपने संगठन और नेतृत्व को लेकर अंदरूनी बदलावों से गुजर रही है। वहीं BJP, SP और दूसरे छोटे दल भी सामाजिक समीकरणों को नए सिरे से साधने में लगे हैं।
ऐसे में RPI का BSP के पारंपरिक वोटरों को सीधे संदेश देना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
अगर आकाश आनंद जैसे युवा चेहरे किसी दूसरे दल के साथ जाते हैं, तो इसका असर सिर्फ संगठन पर नहीं बल्कि BSP के युवा और दलित समर्थकों के मनोबल पर भी पड़ सकता है।
क्या आकाश आनंद RPI में जाएंगे?
फिलहाल आकाश आनंद की ओर से रामदास आठवले के इस न्योते पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि वे RPI में शामिल होंगे या नहीं।
लेकिन इतना साफ है कि आठवले ने उन्हें खुला राजनीतिक मंच ऑफर कर दिया है और इस बहाने BSP के वोट बैंक को लेकर भी अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है।
दलित राजनीति में नई जंग के संकेत
UP की राजनीति में दलित वोट हमेशा से निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं।
BSP की कमजोरी या आंतरिक संकट की स्थिति में RPI, आजाद समाज पार्टी और दूसरे दल इस वोट बैंक में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं।
रामदास आठवले का बयान इसी बड़े राजनीतिक मुकाबले का हिस्सा माना जा सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आकाश आनंद इस न्योते पर कोई कदम उठाते हैं और क्या RPI सच में UP में BSP के वोट बैंक में सेंध लगा पाती है।
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