उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की 150 विधानसभा सीटों की मांग पर पूर्व BJP सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव के बिना सब सूना है और यूपी में कांग्रेस का अपना कोई खास अस्तित्व नहीं है।
कांग्रेस ने मांगीं 150 सीटें तो BJP नेता ने बताई अखिलेश यादव की ताकत, गठबंधन के भीतर छिड़ी नई बहस
कांग्रेस की 150 सीटों की मांग पर बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि अखिलेश यादव के बिना सब सूना है।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | उत्तर प्रदेश डेस्क | 30 सितंबर 2026
खबर में खास
कांग्रेस ने यूपी में मांगीं कम से कम 150 सीटें
बृजभूषण सिंह बोले—अखिलेश के बिना सब सूना
कांग्रेस के राजनीतिक अस्तित्व पर उठाया सवाल
सपा पहले ही 350 सीटों पर तैयारी में जुटी
सीट बंटवारे पर बढ़ सकती है गठबंधन की मुश्किल
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर खींचतान तेज होती जा रही है। कांग्रेस की ओर से राज्य की कम से कम 150 सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग की जा रही है। इसी बीच BJP नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के एक बयान ने प्रदेश का सियासी तापमान और बढ़ा दिया है।
कांग्रेस की 150 सीटों की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने कहा, “अखिलेश के बिना सब सूना है।” उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव के बिना कांग्रेस का कोई राजनीतिक अस्तित्व नहीं है।
कांग्रेस की मांग पर बृजभूषण का जवाब
मीडिया ने बृजभूषण शरण सिंह से सवाल किया था कि कांग्रेस यूपी में INDIA गठबंधन के तहत कम से कम 150 सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग कर रही है। इसके जवाब में उन्होंने अखिलेश यादव को गठबंधन की मुख्य ताकत बताते हुए कहा कि उनके बिना सबकुछ सूना नजर आता है।
BJP नेता का यह बयान इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि सपा और कांग्रेस दोनों 2027 का विधानसभा चुनाव साथ लड़ने की बात तो कर रहे हैं, लेकिन सीटों की संख्या और उम्मीदवारों के चयन पर सहमति बनती दिखाई नहीं दे रही है।
कांग्रेस ने क्यों मांगीं 150 सीटें?
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा है कि पार्टी प्रदेश में 150 से कम विधानसभा सीटों पर चुनाव नहीं लड़ेगी। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि पार्टी को उत्तर प्रदेश में संगठन दोबारा खड़ा करने के लिए अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की जरूरत है।
दूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी के नेताओं का तर्क है कि सीटों का बंटवारा केवल मांग के आधार पर नहीं बल्कि उम्मीदवार की जीतने की क्षमता और संबंधित क्षेत्र में पार्टी की पकड़ देखकर होना चाहिए। कांग्रेस की मांग के जवाब में सपा के 350 सीटों पर अपनी तैयारी मजबूत करने की खबर भी सामने आई है।
सपा नेताओं ने कांग्रेस पर उठाए सवाल
कांग्रेस की 150 सीटों की मांग पर सपा के कई नेता पहले ही नाराजगी जता चुके हैं। सपा नेता आईपी सिंह ने कांग्रेस को अकेले उत्तर प्रदेश की सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ने की चुनौती तक दे दी थी।
हालांकि, अखिलेश यादव अपनी पार्टी के नेताओं को कांग्रेस के खिलाफ गैरजरूरी बयानबाजी से बचने की सलाह दे चुके हैं। इसके बावजूद दोनों दलों के नेताओं के बीच लगातार आ रहे बयानों से गठबंधन के भविष्य पर सवाल उठने लगे हैं।
सपा-कांग्रेस गठबंधन का क्या होगा?
समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में साथ चुनाव लड़ा था। इस गठबंधन को प्रदेश में चुनावी सफलता भी मिली थी। अब दोनों दल 2027 में BJP को चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन विधानसभा चुनाव में सीटों की संख्या कहीं अधिक होने के कारण बंटवारा आसान नहीं दिख रहा है।
कांग्रेस अधिक सीटों के सहारे अपना संगठन मजबूत करना चाहती है, जबकि समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में खुद को गठबंधन का प्रमुख दल मानती है। ऐसे में सीटों की संख्या और उम्मीदवारों के नाम पर समझौता नहीं हुआ तो दोनों दलों के बीच तनाव और बढ़ सकता है।
धर्मेंद्र यादव ने नेताओं को दी नसीहत
सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने कांग्रेस नेताओं की बयानबाजी पर कहा कि पार्टी नेतृत्व को तय करना चाहिए कि उसके नेताओं को क्या बोलना है और क्या नहीं। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी और अखिलेश यादव के साथ आने से 2024 में गठबंधन को सफलता मिली थी।
धर्मेंद्र यादव का कहना है कि 2027 में इससे भी बड़ी सफलता मिल सकती है और अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनेंगे। इससे साफ है कि सपा गठबंधन को जारी रखना चाहती है, लेकिन नेतृत्व और सीटों पर अपनी मजबूत स्थिति भी बनाए रखना चाहती है।
कांग्रेस की 150 सीटों की मांग पर बृजभूषण शरण सिंह का ‘अखिलेश के बिना सब सूना है’ वाला बयान गठबंधन की असली ताकत पर नई बहस छेड़ता है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सपा और कांग्रेस सीटों पर समझौता करके 2027 में साथ उतरेंगे या चुनाव से पहले बढ़ती बयानबाजी दोनों दलों की राह अलग कर देगी।