दिल्ली में जुटीं दुनिया की बड़ी ताकतें: मोदी-पुतिन की अहम बैठक, अब 7 साल बाद भारत आ रहे जिनपिंग पर टिकी नजर

18वें BRICS शिखर सम्मेलन के लिए दिल्ली वैश्विक कूटनीति का केंद्र बन गई है। पीएम मोदी ने पुतिन से व्यापार, ऊर्जा और रक्षा सहयोग पर चर्चा की, जबकि शी जिनपिंग के साथ होने वाली बैठक पर दुनिया की निगाहें टिकी हैं।

दिल्ली में BRICS Summit 2026 के दौरान प्रधानमंत्री मोदी, व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग

भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से द्विपक्षीय वार्ता की। अब सात साल बाद भारत आ रहे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ मोदी की बैठक सबसे अधिक चर्चा में है।

नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली इस समय दुनिया की कूटनीति का सबसे बड़ा केंद्र बन गई है। 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए रूस, चीन, ईरान, दक्षिण अफ्रीका और समूह के अन्य सदस्य देशों के नेता भारत पहुंच रहे हैं। भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को आयोजित होने वाले इस सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की।

मोदी-पुतिन वार्ता में व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, असैन्य परमाणु सहयोग, उर्वरक, विनिर्माण, रेलवे, इस्पात और महत्वपूर्ण खनिजों सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। इसके बाद अब पूरी दुनिया की निगाह प्रधानमंत्री मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच प्रस्तावित मुलाकात पर टिक गई है।

चीन के राष्ट्रपति करीब सात वर्षों के अंतराल के बाद भारत आ रहे हैं। ऐसे में सीमा विवाद, द्विपक्षीय व्यापार और दोनों देशों के संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिशों के बीच यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

मोदी-पुतिन बैठक में किन मुद्दों पर हुई चर्चा?

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BRICS Summit 2026 से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की; अब शी जिनपिंग के साथ प्रस्तावित बैठक पर दुनिया की नजर है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच नई दिल्ली में हुई बैठक में भारत-रूस के पुराने रणनीतिक संबंधों को नई गति देने पर जोर दिया गया। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने और भारतीय उत्पादों के लिए रूसी बाजार में नए अवसर तैयार करने पर चर्चा की।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, बैठक के प्रमुख विषयों में व्यापार, ऊर्जा और रक्षा सहयोग के साथ असैन्य परमाणु ऊर्जा, उर्वरक, रेलवे, इस्पात और महत्वपूर्ण खनिज भी शामिल रहे।

प्रधानमंत्री मोदी ने यूक्रेन संघर्ष को लेकर भारत का पुराना रुख दोहराते हुए कहा कि समस्याओं का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से निकाला जाना चाहिए। भारत ने संघर्ष समाप्त कराने के लिए हर संभव रचनात्मक सहयोग देने की अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई।

पुतिन को पीएम मोदी ने दिया खास उपहार

द्विपक्षीय बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को तमिल साहित्य के महान ग्रंथ ‘तिरुक्कुरल’ का रूसी अनुवाद भेंट किया। इस उपहार को भारत और रूस के सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है।

तिरुक्कुरल में जीवन, नैतिकता, शासन और मानवीय मूल्यों से जुड़े विचार शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले भी विदेशी नेताओं को भारतीय संस्कृति और अलग-अलग राज्यों की विरासत से जुड़े उपहार देते रहे हैं।

सात साल बाद भारत आएंगे शी जिनपिंग

BRICS सम्मेलन का सबसे चर्चित घटनाक्रम चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा है। करीब सात वर्षों बाद उनकी भारत यात्रा हो रही है। प्रधानमंत्री मोदी और जिनपिंग की प्रस्तावित बैठक को भारत-चीन संबंधों के भविष्य के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सीमा पर तनाव कम करने, प्रत्यक्ष उड़ानें बढ़ाने, कैलाश मानसरोवर यात्रा, व्यापार असंतुलन और दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली जैसे मुद्दे बातचीत में प्रमुखता से सामने आ सकते हैं। हालांकि, बैठक का अंतिम एजेंडा दोनों देशों की आधिकारिक बातचीत के बाद ही स्पष्ट होगा।

विश्व के दो बड़े और सबसे अधिक आबादी वाले देशों के नेताओं की इस बैठक का असर केवल एशिया ही नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

ईरान के राष्ट्रपति भी पहुंचे भारत

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन भी BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत पहुंचे हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच उनकी मौजूदगी सम्मेलन को और महत्वपूर्ण बना रही है।

पेजेशकियन BRICS को विकासशील देशों की आवाज मजबूत करने और एकतरफा वैश्विक व्यवस्था का मुकाबला करने वाला प्रभावशाली मंच बता चुके हैं। प्रधानमंत्री मोदी और ईरानी राष्ट्रपति की बातचीत में ऊर्जा सुरक्षा, चाबहार बंदरगाह, व्यापार तथा पश्चिम एशिया की स्थिति जैसे विषय उठ सकते हैं।

भारत मंडपम में होगा 18वां BRICS सम्मेलन

18वां BRICS शिखर सम्मेलन नई दिल्ली के भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को आयोजित किया जाएगा। भारत इस समय BRICS की अध्यक्षता कर रहा है। सम्मेलन के लिए राजधानी में सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं और विदेशी प्रतिनिधिमंडलों से जुड़े प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रतिबंध भी लागू किए गए हैं।

एबीपी न्यूज़ के लाइव अपडेट के मुताबिक, सम्मेलन के दौरान व्यापार, स्थानीय मुद्राओं में भुगतान, ऊर्जा सुरक्षा और सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर रहने की संभावना है।

BRICS के एजेंडे में कौन से मुद्दे?

सम्मेलन में खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन, महत्वपूर्ण आपूर्ति शृंखलाओं की मजबूती, डिजिटल भुगतान तथा विकासशील देशों की वैश्विक संस्थाओं में भागीदारी बढ़ाने जैसे विषयों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

BRICS देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक प्रमुखों ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष तथा विश्व बैंक जैसी वैश्विक वित्तीय संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया है। इसके साथ ही सुरक्षित और कम लागत वाली सीमा-पार भुगतान व्यवस्था विकसित करने पर काम आगे बढ़ाने की बात कही गई है।

क्या डॉलर पर निर्भरता घटाने की दिशा में बढ़ेगा BRICS?

BRICS देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और वैकल्पिक भुगतान व्यवस्था लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। सदस्य देश ऐसी व्यवस्था चाहते हैं जिससे अंतरराष्ट्रीय लेनदेन अधिक सुरक्षित, सस्ता और तेज हो सके।

हालांकि, इसे तुरंत साझा मुद्रा अथवा डॉलर को पूरी तरह बदलने की योजना मानना सही नहीं होगा। अलग-अलग देशों की अर्थव्यवस्थाओं, मुद्राओं और वित्तीय नीतियों में अंतर होने के कारण इस दिशा में कोई भी बड़ा परिवर्तन चरणबद्ध तरीके से ही संभव है।

दुनिया की नजर मोदी की द्विपक्षीय बैठकों पर

इस सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी कई देशों के नेताओं के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें कर सकते हैं। रूस के राष्ट्रपति पुतिन के साथ वार्ता के बाद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियन के साथ होने वाली बातचीत सबसे ज्यादा चर्चा में है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, सम्मेलन के लिए दिल्ली में व्यापक तैयारियां की गई हैं। भारत मंडपम, विदेशी मेहमानों के ठहरने वाले होटलों और हवाई अड्डे से जुड़े प्रमुख रास्तों को सजाया गया है।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या दिल्ली का BRICS सम्मेलन केवल साझा घोषणाओं तक सीमित रहेगा या व्यापार, डिजिटल भुगतान, वैश्विक संस्थाओं में सुधार और अंतरराष्ट्रीय संघर्षों पर कुछ ठोस सहमति भी सामने आएगी। इसका जवाब सम्मेलन के अंतिम घोषणापत्र और नेताओं की द्विपक्षीय बैठकों के बाद मिलेगा।

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