लखनऊ में नदियां उफनाईं: फसलें डूबीं, पुलिया पर पानी; जानें किन इलाकों में बढ़ी परेशानी

बंथरा और निगोहां में सई का पानी खेतों तक पहुंचा, रहीमाबाद में आवाजाही प्रभावित; गोमती का जलस्तर नियंत्रित करने के लिए बैराज के गेट खोले गए

लखनऊ के ग्रामीण इलाके में पानी से घिरे खेत और जलमग्न रास्ता

लखनऊ के नदी किनारे बसे इलाकों में बढ़ते पानी से मुश्किलें बढ़ गई हैं। फसलों और ग्रामीण रास्तों पर असर पड़ा है। जानें प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति और प्रशासन की तैयारी।

लखनऊ में नदियों का पानी बढ़ा, कहीं फसलें डूबीं तो कहीं रास्तों पर संकट

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लखनऊ के नदी किनारे वाले इलाकों में बढ़ते पानी से खेती और आवाजाही प्रभावित।

लखनऊ। राजधानी के नदी किनारे बसे ग्रामीण इलाकों में बढ़ते पानी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बंथरा में सई नदी के उफान से खेत जलमग्न हैं और आसपास के गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, तेरवा और गोड़वा समेत कई गांवों के आसपास स्थिति चिंताजनक बनी है। खेतों में पानी भरने से किसानों को फसल नुकसान की चिंता है। स्रोत: दैनिक जागरण

रहीमाबाद में पुलिया के ऊपर बह रहा पानी

रहीमाबाद के झाऊ बेरिया गांव में बेहता नाले का पानी मुख्य रास्ते की पुलिया के ऊपर बहने लगा है। इससे ग्रामीणों की आवाजाही और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। अमर उजाला के मुताबिक, ग्राम प्रधान ने बताया कि पुलिया के दोनों ओर सुरक्षा दीवार नहीं है। ऐसे में पानी बढ़ने पर रास्ता पार करना जोखिम भरा हो जाता है।

तहसीलदार कुमकुम मिश्रा ने गुरुवार को मौके का निरीक्षण किया और ग्रामीणों से बातचीत की। उन्होंने बच्चों को अकेले पुलिया पार नहीं करने देने को कहा। ग्राम प्रधान को पुलिया के दोनों ओर रस्सी लगाने के निर्देश भी दिए गए। स्रोत: अमर उजाला

पुराने हादसे के बाद भी स्थायी समाधान का इंतजार

इसी गांव में वर्ष 2024 में एक बच्चे की नाले में डूबने से मौत हुई थी। अमर उजाला की रिपोर्ट में ग्रामीणों के हवाले से बताया गया है कि हादसे के बाद पुलिया ठीक कराने का आश्वासन दिया गया था। ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार मांग करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। अब दोबारा पानी बढ़ने से परिवारों की चिंता लौट आई है। स्रोत: अमर उजाला

निगोहां में खेतों तक पहुंचा पानी, किसानों ने मांगा सर्वे

हिन्दुस्तान की 4 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, निगोहां में सई का पानी तालाबों के रास्ते खेतों तक पहुंचा है। जवाहरखेड़ा, राती, रंजीतखेड़ा, तारापुर और अघईया के आसपास ग्रामीण चिंतित हैं। धान, उड़द और तिल की फसलें प्रभावित हुई हैं।

किसानों ने बंधा टूटने की बात कहते हुए उसकी मरम्मत, प्रभावित क्षेत्रों के निरीक्षण और फसल नुकसान का सर्वे कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पानी जल्द नहीं घटा तो नुकसान बढ़ सकता है। स्रोत: हिन्दुस्तान

बंथरा में सई के उफान से गांवों पर खतरा

दैनिक जागरण ने सई का जलस्तर लगभग 12 फीट पहुंचने की जानकारी दी है। हालांकि, इस माप को पूरे क्षेत्र में पानी की गहराई या आधिकारिक खतरे का निशान नहीं समझना चाहिए। रिपोर्ट का मुख्य संकेत नदी के बढ़ते जलस्तर और आसपास की खेती पर पड़ रहे असर को लेकर है। प्रभावित फसलों के नुकसान की अंतिम आधिकारिक गणना उपलब्ध नहीं है। स्रोत: दैनिक जागरण

गोमती का पानी निकालने के लिए बैराज के गेट खुले

हिन्दुस्तान के अनुसार, गुरुवार को गोमती बैराज के दो गेट पूरी तरह और तीन गेट लगभग दो फुट तक खोले गए। सिंचाई विभाग के अधिकारी ने उस समय स्थिति नियंत्रित बताई थी। गऊघाट पर गुरुवार का जलस्तर 349.5 फुट बताया गया, जो सामान्य से करीब ढाई फुट अधिक था।

वहीं, रहीमाबाद में जलस्तर और बढ़ने पर नाव तथा अन्य व्यवस्थाएं करने की बात प्रशासन ने कही है। ये विवरण 4 सितंबर को प्रकाशित रिपोर्ट के हैं। 

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