RSS नेता बोले—'मेरा नाम भी दो जगह था, चुनाव आयोग का नोटिस मिला!' SIR पर विपक्ष से सवाल, Gen Z आंदोलन पर भी बड़ा बयान

इंदौर में RSS सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने SIR का समर्थन करते हुए अपने नाम की दोहरी प्रविष्टि और चुनाव आयोग का नोटिस मिलने का उदाहरण दिया।

RSS के दत्तात्रेय होसबाले ने बताया कि उनका नाम दो जगह मतदाता सूची में दर्ज था और उन्हें चुनाव आयोग का नोटिस मिला। जानिए SIR, विपक्ष और Gen Z आंदोलन पर उनका बयान।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | इंदौर/नई दिल्ली | 4 नवंबर 2026
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RSS सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले (फाइल फोटो)। इंदौर में 4 नवंबर को उन्होंने SIR का समर्थन किया और अपने नाम की दोहरी मतदाता प्रविष्टि के कारण चुनाव आयोग का नोटिस मिलने की बात कही।
देशभर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच जारी राजनीतिक विवाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का नया बयान सामने आया है। बुधवार को इंदौर में संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने SIR का समर्थन करते हुए अपने नाम की दो जगह वोटर लिस्ट में प्रविष्टि होने का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि इस कारण उन्हें भी चुनाव आयोग से नोटिस मिला था। साथ ही राजनीतिक दलों के विरोध और युवाओं के आंदोलनों पर भी अपनी राय रखी।

खबर में खास

  • RSS के सरकार्यवाह ने खुद को चुनाव आयोग का नोटिस मिलने की बात बताई।
  • होसबाले ने SIR के विरोध पर राजनीतिक दलों से सवाल किए।
  • देश में युवाओं को भड़काने की कथित कोशिशों को लेकर चिंता जताई।
  • आरक्षण जारी रखने और सामाजिक असमानता दूर करने की बात कही।
  • विपक्ष मतदाता सूची से पात्र लोगों के नाम हटने की आशंका उठाता रहा है।

'मेरा नाम भी दो जगह था, मुझे नोटिस मिला'

इंदौर में संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक के बाद होसबाले ने पत्रकारों से कहा कि उनका नाम पैतृक गांव की मतदाता सूची में भी दर्ज था, जबकि वह अपने वर्तमान निवास स्थान पर मतदान करते हैं।
उन्होंने बताया कि गांव वाली प्रविष्टि कई वर्षों से बनी हुई थी, हालांकि उन्होंने वहां कभी मतदान नहीं किया।
होसबाले ने सवाल उठाया कि एक व्यक्ति का नाम दो अलग-अलग स्थानों की मतदाता सूचियों में क्यों रहना चाहिए।
उनके अनुसार, इसी कारण चुनाव आयोग ने उन्हें नोटिस भेजा था। उन्होंने इसे मतदाता सूची में सुधार की आवश्यकता समझाने के उदाहरण के तौर पर प्रस्तुत किया।

SIR के विरोध पर विपक्ष से सवाल

होसबाले ने कहा कि मतदाता सूचियों में मृत व्यक्तियों, दोहरी प्रविष्टियों और अपात्र नामों की पहचान करना जरूरी है।
उन्होंने तर्क दिया कि चुनावी व्यवस्था की विश्वसनीयता के लिए समय-समय पर मतदाता सूची का पुनरीक्षण होना चाहिए।
उनका कहना था कि लोकतंत्र में राजनीतिक दल विरोध कर सकते हैं, लेकिन किसी प्रक्रिया का विरोध करने से पहले उसके तथ्यों की जांच करना भी जरूरी है।

विपक्ष की आपत्ति क्या है?

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल SIR के तहत पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटने की आशंका उठाते रहे हैं।
विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयोग के कामकाज पर भी सवाल उठाए हैं। दूसरी तरफ आयोग मतदाता सूचियों की शुद्धता और वैधानिक प्रक्रिया का हवाला देता रहा है।
इसलिए विवाद केवल दोहरी प्रविष्टियां हटाने का नहीं, बल्कि इस प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं के अधिकार सुरक्षित रहने का भी है।

Gen Z आंदोलन पर क्या बोले होसबाले?

दिल्ली के जंतर-मंतर पर युवाओं के प्रदर्शनों से संबंधित सवाल पर होसबाले ने दावा किया कि देश के भीतर और बाहर कुछ 'अराजक शक्तियां' युवाओं को भड़काने की कोशिश कर रही हैं।
हालांकि उन्होंने युवाओं की वास्तविक समस्याओं को सुनने और उनसे संवाद करने की आवश्यकता भी बताई।
उनका कहना था कि सत्ता परिवर्तन लोकतांत्रिक चुनावों से होना चाहिए, हिंसा या अशांति से नहीं।
कथित बाहरी साजिश का उनका बयान एक दावा है। इसके समर्थन में किसी विशिष्ट सार्वजनिक जांच का निष्कर्ष इस रिपोर्ट में स्थापित नहीं है।

आरक्षण पर RSS ने क्या कहा?

होसबाले ने आरक्षण को सामाजिक और ऐतिहासिक असमानता दूर करने का माध्यम बताया।
उन्होंने कहा कि जिन समुदायों को भेदभाव के कारण नुकसान हुआ है, उनके लिए आरक्षण की व्यवस्था तब तक जारी रहनी चाहिए, जब तक संबंधित असमानता समाप्त नहीं होती।

अब राजनीतिक सवाल क्या है?

होसबाले के बयान से SIR पर संघ का सार्वजनिक रुख स्पष्ट हुआ है।
लेकिन मतदाता सूची का अंतिम मूल्यांकन केवल राजनीतिक बयानों से नहीं होगा। उसमें दोहरी और अपात्र प्रविष्टियां हटाने के साथ पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने की प्रक्रिया तथा उपलब्ध शिकायत-निवारण व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी।
यही वह प्रश्न है, जिस पर चुनाव आयोग, विपक्ष और मतदाताओं के बीच चर्चा जारी है।

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