कल INDIA मार्च से दूर, आज प्रदर्शन में AAP: कांग्रेस ने पूछा—‘अब याद आया?’ सौरभ ने खरगे से की शिकायत
6 अक्टूबर के INDIA ब्लॉक मार्च में शामिल नहीं हुई थी AAP; अब दिल्ली CEO कार्यालय के बाहर विरोध में उतरने के ऐलान के बाद देवेंद्र यादव और सौरभ भारद्वाज के बीच सोशल मीडिया पर तीखी बहस
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और SIR के खिलाफ विपक्षी आंदोलन के बीच कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के रिश्तों में नया तनाव सामने आया है। मंगलवार को INDIA ब्लॉक के मार्च से दूर रहने वाली AAP ने बुधवार को दिल्ली CEO कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन में शामिल होने का ऐलान किया। इसके बाद दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने सौरभ भारद्वाज से पूछा कि वह पहले के प्रदर्शन में क्यों नहीं आए। जवाब में भारद्वाज ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से हस्तक्षेप की अपील की। Live Hindustan
CEC के खिलाफ साथ, लेकिन AAP-कांग्रेस में शुरू हुई अपनी ही लड़ाई
CEC विरोध के बीच कांग्रेस और AAP नेताओं में सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राष्ट्रीय डेस्क | 7 अक्टूबर 2026
खबर में खास
AAP ने 6 अक्टूबर के INDIA ब्लॉक मार्च से दूरी बनाई थी
पार्टी ने कहा था—इस मुद्दे पर अपनी तरह से लड़ाई लड़ेगी
7 अक्टूबर को दिल्ली CEO कार्यालय के बाहर प्रदर्शन में शामिल होने का ऐलान
सौरभ भारद्वाज ने कार्यकर्ताओं को बड़ी संख्या में पहुंचने को कहा
दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने AAP पर सवाल उठाए
पूछा—INDIA की बैठक और कल के मार्च में क्यों नहीं आए?
देवेंद्र यादव ने पूछा—“विपक्ष के साथ या BJP के?”
सौरभ भारद्वाज ने सीधे मल्लिकार्जुन खरगे को टैग कर जवाब दिया
कहा—दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया दे रहे हैं
AAP का दावा—उसे वाम दलों ने प्रदर्शन में बुलाया
सौरभ का दावा—AAP और उसके छात्र संगठन ने 2, 3 और 4 अक्टूबर को भी विरोध किया
पूर्व AAP नेता प्रियंका कक्कड़ ने पंजाब चुनाव को दूरी की वजह बताया
प्रियंका कक्कड़ 3 अक्टूबर को कांग्रेस में शामिल हुई थीं
2024 लोकसभा चुनाव में दिल्ली में AAP-कांग्रेस साथ लड़े थे
बाद में विधानसभा चुनाव दोनों ने अलग-अलग लड़ा
CEC/SIR पर दोनों का विरोध जारी, लेकिन राजनीतिक तालमेल में दूरी साफ दिख रही है
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ गुस्सा एक, लेकिन AAP-कांग्रेस में भिड़ंत
नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची की Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर विपक्षी दल लगातार सड़क पर हैं, लेकिन इसी आंदोलन के बीच कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच नया राजनीतिक टकराव सामने आ गया है।
दोनों दल CEC और SIR को लेकर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन प्रदर्शन की रणनीति को लेकर उनकी राह अलग दिखाई दे रही है।
मंगलवार को जब राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव और दूसरे विपक्षी सांसद चुनाव आयोग की ओर मार्च पर निकले तो AAP के सांसद उसमें शामिल नहीं हुए थे। AAP ने उस समय कहा था कि वह यह लड़ाई अपने तरीके से लड़ रही है।
लेकिन बुधवार को तस्वीर बदल गई।
कल मार्च में नहीं, आज प्रदर्शन में AAP
AAP ने 7 अक्टूबर को दोपहर 1 बजे दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी यानी CEO के कार्यालय के बाहर होने वाले विरोध प्रदर्शन में शामिल होने का ऐलान किया।
दिल्ली AAP अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों से बड़ी संख्या में प्रदर्शन में पहुंचने की अपील की।
उन्होंने कहा कि वाम दलों, कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों के साथ AAP भी कथित “वोट चोरी” और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन करेगी। Aam Aadmi Party
यहीं से कांग्रेस और AAP के बीच नया विवाद शुरू हो गया।
देवेंद्र यादव ने पूछा—कल कहां थे?
AAP के बुधवार के प्रदर्शन की घोषणा के बाद दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने सौरभ भारद्वाज पर सोशल मीडिया के जरिए निशाना साधा।
उन्होंने सवाल उठाया कि AAP न तो विपक्ष की बैठक में शामिल हुई और न ही एक दिन पहले हुए बड़े INDIA ब्लॉक प्रदर्शन में।
उन्होंने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को मिले समर्थन का उल्लेख करते हुए पूछा कि क्या अब अचानक AAP को INDIA गठबंधन की याद आ गई है। Live Hindustan
देवेंद्र यादव ने अंत में सीधा सवाल किया:
“आप हैं किधर? विपक्ष के साथ या भाजपा के?”
सौरभ भारद्वाज ने खरगे से की शिकायत
देवेंद्र यादव के सवाल पर AAP की तरफ से जवाब आने में ज्यादा देर नहीं लगी।
सौरभ भारद्वाज ने सीधे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को संबोधित करते हुए कहा कि दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
उन्होंने दावा किया कि बुधवार के प्रदर्शन में AAP अपनी तरफ से अचानक नहीं पहुंच रही, बल्कि पार्टी को वाम दलों की ओर से शामिल होने के लिए बुलाया गया है।
सौरभ भारद्वाज ने खरगे से हस्तक्षेप की अपील भी की।
AAP बोली—हम पहले भी सड़क पर थे
AAP ने कांग्रेस के इस आरोप को भी खारिज किया कि पार्टी अब अचानक CEC और SIR के मुद्दे पर सक्रिय हुई है।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि AAP और उससे जुड़ा छात्र संगठन 2, 3 और 4 अक्टूबर को भी सड़कों पर प्रदर्शन कर चुके हैं।
2 अक्टूबर के जंतर-मंतर विरोध में सौरभ भारद्वाज, आतिशी और अन्य नेताओं समेत बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था। Jansatta
भारद्वाज का तर्क है कि AAP CEC और चुनावी प्रक्रिया के मुद्दे पर पहले से आंदोलन कर रही है और कांग्रेस की ओर से उसका विरोध करना साझा आंदोलन को कमजोर कर सकता है।
कल के INDIA मार्च से AAP क्यों दूर रही?
6 अक्टूबर को INDIA ब्लॉक ने संसद से चुनाव आयोग के मुख्यालय तक मार्च निकालने की कोशिश की थी।
राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव, अभिषेक बनर्जी और दूसरे विपक्षी नेताओं के साथ बड़ी संख्या में सांसद मौजूद थे।
AAP ने इस मार्च से दूरी बनाते हुए कहा था कि वह SIR और चुनाव आयोग के खिलाफ लड़ाई “अपने तरीके से” लड़ रही है।
इसी वजह से आज उसका दूसरे संयुक्त प्रदर्शन में शामिल होना कांग्रेस नेताओं के निशाने पर आ गया।
राहुल-प्रियंका की गिरफ्तारी के बाद बदली तस्वीर?
मंगलवार का प्रदर्शन कई घंटे चला था।
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। राहुल गांधी बैरिकेड पर चढ़कर तिरंगा लहराते भी दिखाई दिए थे। बाद में उन्होंने आकाशवाणी भवन के आसपास लंबा धरना दिया। The Indian Express
इसी प्रदर्शन को लेकर कांग्रेस का कहना है कि जब उसके शीर्ष नेता सड़क पर संघर्ष कर रहे थे, तब AAP साथ नहीं थी।
AAP दूसरी तरफ कह रही है कि हर विरोध प्रदर्शन में एक ही मंच या एक ही तरीके से शामिल होना जरूरी नहीं है।
क्या CEC के इस्तीफे पर दोनों पार्टियां एक साथ हैं?
राजनीतिक तालमेल में भले दूरी हो, लेकिन CEC और SIR के मुद्दे पर दोनों पार्टियों की कई मांगें एक-दूसरे से मिलती हैं।
AAP नेताओं ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई है और मतदाता सूची से पात्र नाम हटाए जाने के आरोप लगाए हैं। India Today
कांग्रेस भी SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठा रही है।
चुनाव आयोग इन राजनीतिक आरोपों को खारिज करता रहा है और उसका कहना है कि मतदाता सूची revision का उद्देश्य मृत, duplicate या अपात्र entries को हटाना और पात्र मतदाताओं को सूची में बनाए रखना है।
फिर असली विवाद किस बात का है?
विवाद CEC के खिलाफ आंदोलन से ज्यादा विपक्षी राजनीति में नेतृत्व और रणनीति का दिखाई देता है।
कांग्रेस चाहती है कि प्रमुख विपक्षी दल एक साझा राजनीतिक मंच पर दिखाई दें।
AAP फिलहाल संसद और कुछ राष्ट्रीय मुद्दों पर विपक्षी दलों के साथ सहयोग करने की बात करती है, लेकिन सड़क के हर आंदोलन को INDIA ब्लॉक के बैनर तले नहीं लड़ना चाहती।
इसी अंतर ने पहले दूरी बनाई और अब सोशल मीडिया की खुली बहस का रूप ले लिया है।
2024 में साथ, फिर अलग हो गए थे AAP-कांग्रेस
AAP और कांग्रेस के रिश्तों में यह खींचतान नई नहीं है।
2024 लोकसभा चुनाव में दोनों पार्टियों ने दिल्ली में गठबंधन कर चुनाव लड़ा था।
लेकिन इसके कुछ ही समय बाद AAP ने स्पष्ट कर दिया था कि गठबंधन सिर्फ लोकसभा चुनाव के लिए था और दिल्ली विधानसभा चुनाव पार्टी अकेले लड़ेगी। Live Hindustan
इसके बाद दिल्ली की स्थानीय राजनीति में कांग्रेस और AAP लगातार एक-दूसरे के खिलाफ चुनावी और राजनीतिक मुकाबले में रही हैं।
प्रियंका कक्कड़ की एंट्री से बढ़ा नया विवाद
इस टकराव में एक और दिलचस्प नाम प्रियंका कक्कड़ का है।
AAP की राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता रह चुकीं प्रियंका कक्कड़ ने 3 अक्टूबर को पार्टी छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया।
अब उन्होंने अपनी पुरानी पार्टी पर ही सवाल उठाते हुए दावा किया है कि AAP आगामी पंजाब चुनाव की वजह से कांग्रेस और विपक्षी खेमे से दूरी बना रही है।
उनका कहना है कि अगर दोनों पार्टियां पहले गठबंधन कर सकती थीं, तो मौजूदा दूरी के पीछे पंजाब की राजनीतिक प्रतिस्पर्धा एक वजह हो सकती है।
यह प्रियंका कक्कड़ का राजनीतिक आकलन है; AAP ने इसे अपनी आधिकारिक वजह के रूप में स्वीकार नहीं किया है।
पंजाब चुनाव ने क्यों बढ़ाई दूरी?
पंजाब में AAP और कांग्रेस एक-दूसरे के सीधे प्रतिद्वंद्वी हैं।
इसी कारण राष्ट्रीय स्तर पर BJP के खिलाफ साझा मुद्दों पर साथ आने के बावजूद पंजाब में दोनों दल एक-दूसरे के खिलाफ राजनीतिक जमीन बचाने की कोशिश करते हैं।
ऐसे में हर राष्ट्रीय विपक्षी कार्यक्रम में दोनों का साथ खड़ा होना राज्य स्तर की राजनीति के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है।
लेकिन फिलहाल AAP ने आधिकारिक तौर पर यह नहीं कहा है कि 6 अक्टूबर के INDIA मार्च से दूरी का कारण पंजाब चुनाव था।
क्या INDIA ब्लॉक में AAP वापस आ रही है?
बुधवार के प्रदर्शन में शामिल होने को सीधे INDIA ब्लॉक में औपचारिक वापसी मानना भी सही नहीं होगा।
AAP ने सिर्फ इतना कहा है कि वह CEC और कथित मतदाता सूची गड़बड़ी के खिलाफ सड़क पर होने वाले विरोध में भाग लेगी। Aam Aadmi Party
पार्टी ने INDIA गठबंधन की संगठनात्मक संरचना में औपचारिक वापसी की कोई नई घोषणा नहीं की है।
इसलिए headline में “AAP फिर INDIA गठबंधन में शामिल” लिखना अभी गलत होगा।
साझा मुद्दे पर विपक्ष का अपना-अपना रास्ता
दिल्ली में पिछले कुछ दिनों के प्रदर्शन एक दिलचस्प तस्वीर दिखा रहे हैं।
CEC और SIR के खिलाफ कांग्रेस, AAP, वाम दल, छात्र संगठन और दूसरे समूह विरोध कर रहे हैं, लेकिन कई प्रदर्शन अलग-अलग आयोजित किए गए।
2 अक्टूबर को AAP और दूसरे समूह सड़कों पर थे। 6 अक्टूबर को INDIA ब्लॉक का बड़ा मार्च हुआ, जिसमें AAP शामिल नहीं थी। 7 अक्टूबर को AAP, कांग्रेस और वाम दल फिर एक ही मुद्दे पर CEO कार्यालय के बाहर उतरने की तैयारी में हैं। Aam Aadmi Party
यानी मुद्दा साझा है, लेकिन राजनीतिक तालमेल अब भी पूरी तरह सहज नहीं है।
अब आगे क्या?
सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह होगा कि कांग्रेस और AAP की यह सोशल मीडिया बहस सिर्फ दिल्ली के दो प्रदेश अध्यक्षों तक सीमित रहती है या शीर्ष नेतृत्व भी इसमें उतरता है।
सौरभ भारद्वाज ने सीधे मल्लिकार्जुन खरगे से हस्तक्षेप की अपील की है। दूसरी ओर दिल्ली कांग्रेस ने AAP से विपक्षी खेमे में अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
अगर CEC और SIR के खिलाफ आंदोलन आने वाले दिनों में और बड़ा होता है तो कांग्रेस और AAP के लिए यह तय करना जरूरी होगा कि वे साझा मंच से आंदोलन करते हैं या अलग-अलग।
ज्ञानेश कुमार और SIR के मुद्दे पर कांग्रेस और AAP की मांगों में समानता जरूर दिखाई देती है, लेकिन सड़क की राजनीति ने दोनों के पुराने मतभेद फिर सामने ला दिए हैं। मंगलवार को INDIA मार्च से AAP की दूरी और बुधवार के दूसरे विपक्षी प्रदर्शन में उसकी एंट्री ने कांग्रेस को सवाल उठाने का मौका दिया। अब देवेंद्र यादव और सौरभ भारद्वाज की खुली बहस के बाद नजर इस बात पर रहेगी कि यह विवाद यहीं रुकता है या कांग्रेस-AAP के राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंचता है।