कांग्रेस सांसद बिमोल अकोइजम को दिल्ली हाईकोर्ट से राहत! JNU के बर्खास्तगी आदेश पर रोक, यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़ा मामला

11 छात्राओं की शिकायतों के बाद 9 अक्टूबर को JNU ने प्रोफेसर और कांग्रेस सांसद को बर्खास्त किया था। हाईकोर्ट ने फिलहाल उस आदेश पर रोक लगाई, आपराधिक जांच जारी है।

Bimol Akoijam News: दिल्ली हाईकोर्ट ने कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम की JNU से बर्खास्तगी पर अंतरिम रोक लगाई। जानिए 11 छात्राओं के आरोप, विश्वविद्यालय की कार्रवाई और अदालत की ताजा स्थिति।

कांग्रेस सांसद बिमोल अकोइजम को दिल्ली हाईकोर्ट से राहत! JNU की बर्खास्तगी पर रोक, जानिए क्या है मामला

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कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम को 2 नवंबर 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट से JNU के बर्खास्तगी आदेश के मामले में अंतरिम राहत मिली।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली | 2 नवंबर 2026

खबर में खास

  • दिल्ली हाईकोर्ट ने कांग्रेस सांसद बिमोल अकोइजम को अंतरिम राहत दी।
  • 9 अक्टूबर को JNU ने यौन उत्पीड़न के आरोपों की आंतरिक जांच के बाद उन्हें बर्खास्त किया था।

  • कम-से-कम 11 छात्राओं की शिकायतों से जुड़ा है मामला।

  • दिल्ली पुलिस ने भी संबंधित शिकायतों पर FIR दर्ज की है।

  • अदालत की अंतरिम रोक का अर्थ आरोपों से बरी होना नहीं है।

दिल्ली हाईकोर्ट से क्या राहत मिली?

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से बर्खास्त किए गए प्रोफेसर और कांग्रेस के लोकसभा सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम को सोमवार, 2 नवंबर को दिल्ली हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिली है।
अदालत ने विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी उनकी बर्खास्तगी के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है।
इस नए फैसले की जानकारी सोमवार शाम सामने आई। हालांकि, उपलब्ध प्रारंभिक रिपोर्टों में आदेश की विस्तृत शर्तें और अगली सुनवाई की तारीख स्पष्ट नहीं हैं।

9 अक्टूबर को JNU ने क्यों किया था बर्खास्त?

JNU प्रशासन ने 9 अक्टूबर 2026 को बिमोल अकोइजम की सेवाएं समाप्त करने का आदेश जारी किया था।
विश्वविद्यालय के अनुसार, उसकी आंतरिक समिति ने छात्राओं की यौन उत्पीड़न संबंधी शिकायतों की जांच की थी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर विश्वविद्यालय ने गंभीर अनुशासनात्मक कार्रवाई का निर्णय लिया।
यह आदेश कुलपति शांतिश्री डी. पंडित की ओर से जारी किया गया था।
विश्वविद्यालय का कहना था कि कार्रवाई संबंधित नियमों और जांच रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए की गई।

11 छात्राओं ने क्या आरोप लगाए?

JNU की कम-से-कम 11 छात्राओं ने प्रोफेसर के व्यवहार को लेकर शिकायतें दर्ज कराई थीं।
इनमें शैक्षणिक गतिविधियों के दौरान अनुचित टिप्पणियों, अवांछित व्यवहार और व्यक्तिगत संपर्क से जुड़े आरोप शामिल थे।
आंतरिक समिति ने शिकायतों, गवाहों और संबंधित सामग्री की जांच की।
हालांकि, विश्वविद्यालय की अनुशासनात्मक कार्रवाई और आपराधिक अदालत में दोष सिद्ध होने की प्रक्रिया अलग-अलग हैं। अभी आरोपों को न्यायिक रूप से सिद्ध अपराध मानना उचित नहीं होगा।

पुलिस जांच की क्या स्थिति है?

विश्वविद्यालय की कार्रवाई के बाद दिल्ली पुलिस ने भी शिकायतों के संबंध में FIR दर्ज की थी।
इसके बाद अकोइजम को जांच में शामिल होने के लिए नोटिस जारी किया गया और अक्टूबर में उनसे पूछताछ भी की गई।
पुलिस की आपराधिक जांच, विश्वविद्यालय की आंतरिक कार्रवाई और हाईकोर्ट में बर्खास्तगी से संबंधित विवाद अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं।

कांग्रेस सांसद ने आरोपों पर क्या कहा?

बिमोल अकोइजम ने पहले ही यौन उत्पीड़न के आरोपों को खारिज किया था।
उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके खिलाफ कार्रवाई में निष्पक्ष प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और पूरी कार्यवाही राजनीतिक रूप से प्रेरित है।
JNU शिक्षक संघ ने भी बर्खास्तगी की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए थे।
दूसरी ओर, विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपनी कार्रवाई को आंतरिक समिति की जांच पर आधारित बताया था।

कौन हैं बिमोल अकोइजम?

अंगोमचा बिमोल अकोइजम मणिपुर की इनर मणिपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस सांसद हैं।
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में वह कांग्रेस के टिकट पर निर्वाचित हुए थे। राजनीति में सक्रिय होने से पहले वह JNU के स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज में अध्यापन से जुड़े थे।

आगे क्या होगा?

दिल्ली हाईकोर्ट की अंतरिम रोक से फिलहाल विश्वविद्यालय का बर्खास्तगी आदेश प्रभावित हुआ है।
लेकिन इससे छात्राओं की शिकायतें समाप्त नहीं होतीं और न ही आपराधिक मामले का फैसला हो जाता है।
अब अदालत के विस्तृत आदेश, विश्वविद्यालय की अगली कानूनी कार्रवाई और पुलिस जांच के घटनाक्रम पर नजर रहेगी।
इस मामले में शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा, निष्पक्ष जांच और संबंधित व्यक्ति के कानूनी अधिकार—तीनों महत्वपूर्ण हैं।

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