'मोदी कहीं नहीं जाएंगे'—खरगे के विवादित बयान के 5 दिन बाद गुजरात में लगे नारे! PM मोदी के सामने महिलाओं ने दिया जवाब, कांग्रेस ने भी किया पलटवार

गुजरात के बनासकांठा में पीएम मोदी के सामने महिलाओं ने 'मोदी कहीं नहीं जाएंगे' के नारे लगाए। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इस पर तंज कसते हुए जवाब दिया।

PM Modi Gujarat News: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के 25 अक्टूबर के विवादित बयान के बाद 30 अक्टूबर को गुजरात में प्रधानमंत्री मोदी के सामने 'मोदी कहीं नहीं जाएंगे' के नारे लगे। महिलाओं ने तख्तियां भी दिखाईं। कांग्रेस के पवन खेड़ा ने प्रतिक्रिया दी।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | बनासकांठा/नई दिल्ली | 30 अक्टूबर 2026
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बनासकांठा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम के दौरान समर्थकों ने 'मोदी कहीं नहीं जाएंगे' के नारे लगाए।

खबर में खास

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज गुजरात के बनासकांठा जिले में रोड शो किया।
  • लोगों ने 'मोदी कहीं नहीं जाएंगे' लिखी तख्तियां दिखाईं।

  • भारत बोवाइन ब्रीडिंग एंड रिसर्च सेंटर में महिलाओं ने प्रधानमंत्री की मौजूदगी में यही नारा लगाया।

  • गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने भी कार्यक्रम में नारा दोहराया।

  • कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने इस पर तंज कसते हुए प्रतिक्रिया दी।

  • यह घटनाक्रम 25 अक्टूबर को पटना में मल्लिकार्जुन खरगे की विवादित टिप्पणी के पांच दिन बाद सामने आया।
गुजरात के बनासकांठा में शुक्रवार, 30 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के दौरान लगे एक नारे ने भाजपा और कांग्रेस के बीच चल रही राजनीतिक बयानबाजी को फिर चर्चा में ला दिया है।
प्रधानमंत्री मोदी के रोड शो में लोगों ने ऐसी तख्तियां दिखाईं, जिन पर लिखा था—'मोदी कहीं नहीं जाएंगे।' बाद में भिलडी स्थित भारत बोवाइन ब्रीडिंग एंड रिसर्च सेंटर में महिलाओं के एक समूह ने प्रधानमंत्री की मौजूदगी में यही नारा लगाया।
ये नारे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की उस टिप्पणी के बाद सामने आए हैं, जो उन्होंने 25 अक्टूबर को पटना में एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान की थी।
अब कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी गुजरात में लगे नारों पर प्रतिक्रिया देकर विवाद को एक नया राजनीतिक मोड़ दिया है।

PM मोदी के सामने महिलाओं ने क्या कहा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार सुबह गुजरात के बनासकांठा पहुंचे। यहां भिलडी में उन्होंने रोड शो किया। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी भी उनके साथ थे।
रास्ते में जुटे लोगों ने प्रधानमंत्री का स्वागत किया और कई तख्तियों पर लिखा था कि भारत के विकसित और आत्मनिर्भर बनने तक मोदी कहीं नहीं जाएंगे।
इसके बाद पशुपालन और प्रजनन अनुसंधान केंद्र में प्रधानमंत्री ने महिलाओं से बातचीत की तथा उनके साथ तस्वीरें खिंचवाईं। इसी दौरान महिलाओं के समूह ने मोदी के समर्थन में नारे लगाए।
नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने भी कार्यक्रम में लोगों से तख्तियां ऊपर उठाने को कहा और नारे लगवाए।

पांच दिन पहले खरगे ने क्या कहा था?

इस विवाद की शुरुआत 25 अक्टूबर को बिहार की राजधानी पटना में हुई थी।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती के कार्यक्रम में बोल रहे थे।
इसी दौरान सभा में मौजूद संतोष कुमार नामक व्यक्ति ने प्रधानमंत्री मोदी के सत्ता से न हटने संबंधी टिप्पणी की। खरगे ने जवाब में मोदी के पिता का उल्लेख करते हुए विवादित टिप्पणी कर दी।
इसके बाद भाजपा नेताओं ने खरगे की भाषा पर आपत्ति जताई। गृह मंत्री अमित शाह ने भी कांग्रेस अध्यक्ष पर सार्वजनिक मर्यादा का उल्लंघन करने का आरोप लगाया।
हालांकि, सभा में टिप्पणी करने वाले संतोष कुमार ने बाद में खुद को कांग्रेस कार्यकर्ता बताते हुए कहा कि उनकी बात अधूरी सुन ली गई थी। उनके मुताबिक उनका उद्देश्य यह कहना था कि बड़े जनआंदोलन के बिना मोदी सरकार को हटाना कठिन होगा।
यानी पटना में भी विवाद केवल एक नारे पर नहीं, बल्कि उसके संदर्भ और जवाब पर हुआ था।

पवन खेड़ा ने गुजरात के नारों पर क्या जवाब दिया?

गुजरात में मोदी समर्थक नारे लगने के बाद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर अंग्रेजी में संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए तंज किया, जिसका आशय था—'आपकी इच्छा!'
उन्होंने प्रधानमंत्री के संसद में उपस्थित होने पर भी टिप्पणी की और संसद सत्र शुरू होने से जुड़ा राजनीतिक तंज कसा।
पवन खेड़ा की प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि कांग्रेस ने गुजरात में लगे नारों को राजनीतिक जवाब देने का विषय बनाया है।
हालांकि, उनके इस कथन को प्रधानमंत्री के किसी भविष्य के कदम या आधिकारिक घटनाक्रम का संकेत नहीं माना जा सकता। यह कांग्रेस नेता की टिप्पणी है।

गुजरात के मंच से सरकार ने क्या संदेश दिया?

गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने सभा में समर्थकों के नारों को दोहराया। उन्होंने गरीबी, विकास और आत्मनिर्भर भारत जैसे विषयों को प्रधानमंत्री के कामकाज से जोड़कर अपनी बात रखी।
प्रधानमंत्री मोदी ने इसी दौरे में ₹14,000 करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। कार्यक्रम में कृषि, पशुपालन, सड़क और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाएं शामिल थीं।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 24वीं किस्त जारी करने का कार्यक्रम भी बनासकांठा में रखा गया था।

अब किस बात पर नजर रहेगी?

भाजपा और कांग्रेस के बीच यह विवाद 25 अक्टूबर के पटना कार्यक्रम से शुरू होकर 30 अक्टूबर के गुजरात दौरे तक पहुंच गया है।
दोनों पक्ष प्रधानमंत्री की लोकप्रियता, राजनीतिक भविष्य और सार्वजनिक बयानों को लेकर अलग-अलग संदेश दे रहे हैं।
लेकिन किसी सभा में लगे नारों से देश की समग्र जनमत स्थिति या भविष्य के चुनाव परिणाम का अनुमान नहीं लगाया जा सकता।
आज का नया घटनाक्रम यही है कि प्रधानमंत्री की मौजूदगी में समर्थकों ने 'मोदी कहीं नहीं जाएंगे' का नारा दोहराया और कांग्रेस ने उस पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी।

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