MP Politics: नर्मदा नदी किनारे मिले 343 वोटर ID कार्ड, कांग्रेस ने उठाए चुनावी प्रक्रिया पर सवाल; पुलिस जाँच शुरू
खरगोन के मंडलेश्वर घाट पर सफाई अभियान के दौरान मिले मतदाता पहचान पत्र प्रारंभिक जानकारी में इंदौर की राऊ विधानसभा सीट से जुड़े बताए जा रहे हैं। कांग्रेस ने FIR और निष्पक्ष जाँच की मांग की है।
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खरगोन के मंडलेश्वर घाट पर सफाई अभियान के दौरान मिले मतदाता पहचान पत्र प्रारंभिक जानकारी में इंदौर की राऊ विधानसभा सीट से जुड़े बताए जा रहे हैं। कांग्रेस ने FIR और निष्पक्ष जाँच की मांग की है।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | खरगोन, मध्य प्रदेश | 26 अक्टूबर 2026
खबर में खास
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खरगोन जिले के मंडलेश्वर में नर्मदा किनारे 343 मतदाता पहचान पत्र मिले।
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शुरुआती जानकारी के अनुसार कार्ड इंदौर की राऊ विधानसभा सीट से जुड़े हैं।
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कांग्रेस ने FIR दर्ज करने और निष्पक्ष जाँच कराने की मांग की।
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राजस्व विभाग की टीम ने मिले हुए पहचान पत्र कब्जे में लिए।
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कार्ड नदी तक कैसे पहुंचे और उनकी वैधता क्या है, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
नर्मदा किनारे सैकड़ों वोटर कार्ड मिलने से उठे सवाल
मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में नर्मदा नदी के किनारे सैकड़ों मतदाता पहचान पत्र मिलने का मामला राजनीतिक विवाद का विषय बन गया है।
मंडलेश्वर घाट पर रविवार, 25 अक्टूबर को सफाई अभियान के दौरान स्थानीय लोगों को बड़ी संख्या में वोटर ID कार्ड पड़े मिले। कुछ कार्ड पानी में भी दिखाई दिए।
स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना प्रशासन को दी। इसके बाद मामले से संबंधित वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ।
PTI की रिपोर्ट के अनुसार, कुल 343 मतदाता पहचान पत्र मिले हैं। शुरुआती जाँच में इनके इंदौर जिले की राऊ विधानसभा सीट से जुड़े होने की जानकारी सामने आई है।
इंदौर के वोटर कार्ड खरगोन कैसे पहुंचे?
इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण सवाल पहचान पत्रों के स्रोत और उनके नदी किनारे पहुंचने के तरीके को लेकर है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, मिले हुए दस्तावेजों पर इंदौर के तिलक नगर और आस्था पैलेस जैसे क्षेत्रों के पते दर्ज हैं।
राऊ विधानसभा क्षेत्र इंदौर जिले में है, जबकि पहचान पत्र खरगोन जिले के मंडलेश्वर में मिले।
अभी यह स्थापित नहीं हुआ है कि ये पहचान पत्र किसने जारी किए थे, नदी किनारे किसने छोड़े और सभी कार्ड वैध या सक्रिय मतदाता रिकॉर्ड से संबंधित हैं या नहीं।
केवल पहचान पत्र मिलने से मतदाता सूची में नाम हटाने, फर्जी मतदान या चुनाव परिणाम प्रभावित होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इन सवालों का जवाब जाँच से ही मिलेगा।
कांग्रेस ने की FIR दर्ज करने की मांग
घटना सामने आने के बाद कांग्रेस ने प्रशासन और निर्वाचन व्यवस्था पर सवाल उठाए।
खरगोन जिला कांग्रेस अध्यक्ष रवि नायक अन्य कार्यकर्ताओं के साथ मंडलेश्वर थाने पहुंचे और FIR दर्ज करने की मांग करते हुए शिकायत दी।
कांग्रेस ने यह भी मांग की कि नदी में गोताखोरों की मदद से तलाशी कराई जाए, ताकि यह पता चल सके कि और पहचान पत्र तो नहीं फेंके गए हैं।
रवि नायक ने चेतावनी दी कि मामला दर्ज नहीं होने पर कांग्रेस थाने का घेराव करेगी।
कांग्रेस के नेताओं ने घटना को गंभीर बताते हुए स्वतंत्र जाँच की मांग की है। हालांकि इसे सुनियोजित चुनावी गड़बड़ी बताने संबंधी राजनीतिक आरोपों की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पुलिस और प्रशासन ने अब तक क्या कार्रवाई की?
मंडलेश्वर की अनुविभागीय पुलिस अधिकारी श्वेता शुक्ला ने पहचान पत्र मिलने की पुष्टि की है।
उनके अनुसार, राजस्व विभाग की टीम ने दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए हैं और संबंधित थाना प्रभारी को मामले की जाँच करने के निर्देश दिए गए हैं।
पुलिस को कांग्रेस की ओर से शिकायत भी मिली है।
हालांकि उपलब्ध रिपोर्टों में किसी आरोपी की गिरफ्तारी या FIR दर्ज होने का स्पष्ट आधिकारिक विवरण नहीं है। इसलिए इन कार्रवाइयों को पूरा हो चुका बताना उचित नहीं होगा।
राऊ विधानसभा सीट से क्या है राजनीतिक संबंध?
प्रारंभिक जानकारी में जिन पहचान पत्रों का संबंध राऊ विधानसभा क्षेत्र से बताया गया है, वह सीट वर्तमान में भाजपा विधायक मधु वर्मा के पास है।
इससे पहले कांग्रेस के जीतू पटवारी इस विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
मामला ऐसे समय सामने आया है जब मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनावी रिकॉर्ड की शुद्धता को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में राजनीतिक बहस चल रही है।
हालांकि इस घटना का SIR प्रक्रिया से कोई प्रत्यक्ष संबंध अभी सिद्ध नहीं हुआ है।
जाँच में किन सवालों का जवाब मिलना बाकी?
