‘मजदूरी चोरी’ का आरोप, कांग्रेस ने मोदी सरकार को घेरा; बीड की रिपोर्ट का जयराम रमेश ने दिया हवाला

महाराष्ट्र के बीड में ग्रामीण रोजगार योजना के रिकॉर्ड और जमीनी स्थिति में कथित अंतर पर जयराम रमेश ने सवाल उठाए। उन्होंने फर्जी हाजिरी और मजदूरों का पैसा हड़पने का आरोप लगाया है।

कांग्रेस ने ग्रामीण रोजगार योजना में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। जयराम रमेश ने बीड की एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए मजदूरों की हाजिरी और भुगतान पर सवाल उठाए। ये आरोप हैं, किसी जांच में स्थापित निष्कर्ष नहीं।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली | 20 अक्टूबर 2026
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ग्रामीण रोजगार योजना में कथित अनियमितताओं को लेकर जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। जयराम रमेश और नरेंद्र मोदी की फाइल तस्वीरों का कोलाज।
ग्रामीण रोजगार योजना में मजदूरों की उपस्थिति और भुगतान को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर नया हमला बोला है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने मंगलवार को महाराष्ट्र के बीड से जुड़ी एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कथित फर्जी हाजिरी और मजदूरी की रकम हड़पने का आरोप लगाया। उन्होंने इसे “ग्रामीण मजदूरी चोरी” बताया। 

खबर में खास

  • जयराम रमेश ने बीड के कार्यस्थलों से जुड़ी रिपोर्ट पर सवाल उठाए।
  • कांग्रेस ने रोजगार के रिकॉर्ड और वास्तविक काम के बीच अंतर होने का आरोप लगाया।
  • केंद्र का घोषित पक्ष है कि नई व्यवस्था ग्रामीण परिवारों की रोजगार सुरक्षा मजबूत करेगी। 

बीड की रिपोर्ट में क्या दावा किया गया?

PTI के अनुसार, रमेश ने जिस रिपोर्ट का उल्लेख किया, उसमें बीड के पांच कार्यस्थलों पर मजदूर नहीं मिलने का दावा था, जबकि योजना के रिकॉर्ड में लोगों को काम करते दिखाया गया था।
रमेश ने आरोप लगाया कि कई ग्रामीण महीनों से काम नहीं मिलने की बात कह रहे हैं, लेकिन दस्तावेजों में उनकी उपस्थिति दर्ज है। उन्होंने स्थानीय राजनीतिक लोगों पर मजदूरी की रकम हड़पने का भी आरोप लगाया। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस समाचार के लिए नहीं की गई है।

उत्तर प्रदेश का भी किया उल्लेख

रमेश ने अपने बयान में उत्तर प्रदेश और अन्य भाजपा-शासित राज्यों में कथित फर्जी हाजिरी तथा क्लोन ऐप से जुड़े मामलों की मीडिया रिपोर्टों का भी उल्लेख किया। उनका तर्क था कि ग्रामीण रोजगार की व्यवस्था में तकनीक का इस्तेमाल मजदूरों के अधिकार सुरक्षित करने के लिए होना चाहिए, उन्हें लाभ से बाहर करने के लिए नहीं। 

जिस रोजगार व्यवस्था पर सवाल, वह क्या है?

विवाद विकसित भारत—गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण), यानी VB-G RAM G से जुड़ा है। सरकारी जानकारी के अनुसार, यह नई व्यवस्था 1 जुलाई 2026 से लागू हुई और इसमें पात्र ग्रामीण परिवारों के लिए एक वित्त वर्ष में 125 दिन के मजदूरी रोजगार की गारंटी का प्रावधान है। यह गारंटी परिवार के स्तर पर है, प्रत्येक सदस्य को अलग-अलग 125 दिन की नहीं। 
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 30 जून की विज्ञप्ति में कहा था कि नई व्यवस्था लागू होने के दौरान चालू कार्य बाधित नहीं होंगे और नए कार्ड जारी होने तक मौजूदा ई-केवाईसी सत्यापित जॉब कार्ड मान्य रहेंगे। सरकार ने समय पर मजदूरी भुगतान और पारदर्शी क्रियान्वयन को भी अपनी प्राथमिकता बताया था। 

सरकार की प्रतिक्रिया क्या है?

योजना को लेकर सरकार का पहले से घोषित उद्देश्य रोजगार और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करना है। हालांकि, आज जयराम रमेश के लगाए आरोपों पर PTI की उपलब्ध रिपोर्ट में सरकार की अलग प्रतिक्रिया शामिल नहीं है। जून में जारी नीतिगत जानकारी को इन नए आरोपों का जवाब नहीं माना जाना चाहिए। 

मजदूरों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

ग्रामीण रोजगार की मांग का दायरा बड़ा है। ग्रामीण विकास मंत्रालय के प्रारंभिक आंकड़ों पर आधारित इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर में लगभग 1.56 करोड़ ग्रामीण परिवारों ने इस योजना के तहत काम मांगा था। यह संख्या काम की मांग करने वाले परिवारों की है, सभी को रोजगार मिल जाने की नहीं। 
ऐसे मामलों में वास्तविक स्थिति समझने के लिए उपस्थिति रिकॉर्ड, किए गए काम, भुगतान विवरण और संबंधित मजदूरों के बयान का मिलान जरूरी है। फिलहाल नया घटनाक्रम कांग्रेस का आरोप है; किसी अधिकारी या राजनीतिक व्यक्ति का दोष साबित हो जाने का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

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