बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर नहीं थम रहा अत्याचार

मयमनसिंह में अंसार सदस्य बृजेंद्र बिस्वास की गोली मारकर हत्या

यूनुस सरकार की नाक के नीचे बढ़ते हमले, फैक्ट्री सिक्योरिटी में तैनात हिंदू जवान पर साथी का अचानक हमला; पूर्व में दीपू चंद्र दास की जघन्य हत्या की यादें ताजा

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बांग्लादेश में एक और हिंदू बृजेंद्र बिस्वास की हत्या

 

मयमनसिंह (बांग्लादेश) : बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय पर हिंसक घटनाओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। हाल ही में मयमनसिंह जिले के भालुका उपजिले में ग्रामीण अर्धसैनिक बल (अंसार) के एक हिंदू सदस्य बृजेंद्र बिस्वास की गोली मारकर निर्मम हत्या कर दी गई। यह घटना नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के कार्यकाल में हुई, जिसने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटना का विवरण: फैक्ट्री परिसर में साथी का घातक हमला
बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भालुका उपजिले के मेहराबारी इलाके में स्थित सुल्ताना स्वेटर्स लिमिटेड फैक्ट्री की सुरक्षा व्यवस्था के लिए 20 अंसार सदस्य तैनात थे। इनमें बृजेंद्र बिस्वास भी शामिल थे, जो फैक्ट्री की निगरानी में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। सोमवार शाम करीब 6:30 बजे, जब बृजेंद्र अपने सहयोगी नोमान मियां के साथ कमरे में बैठे थे, तभी नोमान ने अचानक अपनी शॉटगन निकाल ली।

लबीब ग्रुप के अंसार प्रभारी एपीसी मोहम्मद अजहर अली ने बताया कि घटना के समय दोनों के बीच कोई विवाद या तकरार नहीं हुई थी। नोमान ने चिल्लाते हुए कहा, "गोली मार दूंगा," और फिर ट्रिगर दबा दिया। गोली बृजेंद्र की बाईं जांघ में लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। हमलावर नोमान मौके से फरार हो गया, लेकिन स्थानीय पुलिस ने उसे शीघ्र ही गिरफ्तार कर लिया। जांच जारी है, और प्रारंभिक पूछताछ में धार्मिक या व्यक्तिगत दुर्भावना का संकेत मिला है।

अल्पसंख्यकों पर बढ़ते खतरे की कड़ी
यह हत्या मयमनसिंह जिले में हिंदुओं के खिलाफ हाल की दूसरी बड़ी घटना है। कुछ दिन पूर्व ही दीपू चंद्र दास नामक एक हिंदू युवक को क्रूरता से पीट-पीटकर अधमरा किया गया था। उसके बाद अपराधियों ने उसे पेड़ से बांधकर जिंदा जला दिया था। ये घटनाएं बांग्लादेश में हिंदू समुदाय की असुरक्षा को उजागर करती हैं, जहां धार्मिक तनाव और राजनीतिक अस्थिरता के बीच अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़ रहे हैं।

मानवाधिकार संगठनों और हिंदू समुदाय के नेताओं ने यूनुस प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। वे कहते हैं कि ऐसी घटनाएं न केवल व्यक्तिगत हत्याएं हैं, बल्कि समुदाय-विरोधी साजिश का हिस्सा लगती हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत सहित कई देशों ने बांग्लादेश सरकार से अल्पसंख्यक सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।

आगे की चुनौतियां: सुरक्षा और न्याय की मांग
इस घटना ने बांग्लादेश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, खासकर अर्धसैनिक बलों में। विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक आधार पर हिंसा को रोकने के लिए कड़े कानून और निष्पक्ष जांच जरूरी हैं। बृजेंद्र बिस्वास के परिवार को न्याय मिलना चाहिए, ताकि अन्य अल्पसंख्यक सदस्यों में भय का माहौल न फैले।

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